ग्रेटर नोएडा जोन

दनकौर के बिहारी लाल इंटर कॉलेज की जमीन पर कब्जे की कोशिश, आक्रोषित छात्रों ने ढहाई निर्माणाधीन दीवार,

प्रबंधन का आरोप—राजस्व अभिलेखों और पैमाइश में जमीन स्कूल की, फिर भी बार-बार कब्जे का प्रयास; पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : दनकौर  स्थित बिहारी लाल इंटर कॉलेज स्कूल की जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रबंधन का आरोप है कि राजस्व अभिलेखों, नक्शे और मौके की जांच-पैमाइश के बाद संबंधित राजस्व अधिकारियों ने जमीन को विद्यालय की भूमि माना है, इसके बावजूद कुछ लोग बार-बार कब्जे का प्रयास कर रहे हैं। आरोप है कि स्कूल से जुड़े लोगों को धमाका भी गया है। ताजा मामले में बीती अवैध कब्जे को नीयत से देर रात बनाई गई दीवार को लेकर आक्रोशित छात्रों ने सुबह उसे गिरा दिया।

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार कॉलेज का भवन करीब 78 वर्ष पुराना है। वर्ष 1948 से यहां विद्यालय का संचालन हो रहा है। विद्यालय की भूमि से संबंधित पुराने राजस्व अभिलेखों, खतौनी और वर्ष 1992 के आदेश का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि विवादित भूमि विद्यालय के स्वामित्व/अधिकार क्षेत्र में आती है।

रात में दीवार खड़ी करने का आरोप

प्रबंधन के अनुसार बीते 19 सितम्बर रात 8 बजे कुछ लोगों ने कृषि विद्यालय की भूमि, खतौनी और नक्शा स्थल पर बाउंड्री तोड़कर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया। शिकायत के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तत्काल कब्जा रोक दिया, लेकिन प्रबंधन के अनुसार तब तक निर्माण को नुकसान पहुंच चुका था।  आरोप है कि बीते 22 सितंबर को दनकौर और आसपास के क्षेत्र के कुछ लोगों के विद्यालय पहुंचकर धमकी दी। प्रबंधन के अनुसार इस बीच जिला प्रशासन और सदर तहसील स्टॉफ द्वारा अपनी जाँच में विद्यालय के दावे को सही पाया।

देर रात फिर निर्माण, कोतवाली में नहीं मिला सहयोग

इसके बावजूद बीते मंगलवार देर रात साजिशन कब्जे की नीयत से इस जमीन पर दोबारा दीवार खड़ी कर दी गई। सूचना पर विद्यालय के शिक्षक और प्रबंधन समिति के लोग दनकौर कोतवाली पहुंचे। आरोप है कि वहां अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसके बाद 112 पर सूचना देकर पुलिस सहायता मांगी गई। मामले के बाद छात्रों में भी आक्रोश फैल गया और उन्होंने कथित अवैध कब्जे के लिए खड़ी की गई दीवार को गिरा दिया।

विद्यालय प्रबंधन ने कथित भूमाफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने तथा विद्यालय की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

इस प्रकरण में मामला अब केवल जमीन के एक टुकड़े का विवाद नहीं रह गया है। सवाल यह है कि यदि राजस्व अभिलेख, खतौनी, नक्शा और सरकारी स्तर पर की गई जांच विद्यालय के पक्ष में हैं, तो बार-बार कब्जे की कोशिश आखिर किसके भरोसे पर हो रही है? वहीं, पुलिस की कार्रवाई और शिकायतों के निस्तारण को लेकर उठ रहे सवाल भी पूरे प्रकरण को गंभीर बनाते हैं। ऐसे में निष्पक्ष राजस्व जांच और प्रभावी पुलिस कार्रवाई ही विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।

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