अन्य जिलेजेवर एयरपोर्टयमुना प्राधिकरण

जेवर एयरपोर्ट को मोदी के नाम से जोड़ने पर योगी कैबिनेट की मुहर!

विकास की परियोजना को प्रधानमंत्री के नाम से जोड़ने का फैसला

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में लाए गए प्रस्ताव को मंजूरी डी गई है। मुख्यमंत्री ने स्वयं मीडिया के समक्ष फैसले की जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और सहयोगी दलों के नेता भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए कहा कि सात अक्टूबर का दिन गौरवशाली इतिहास के रूप में दर्ज हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों का जिक्र किया और प्रदेश में 42 नए राजमार्ग बनाए जाने की बात कही।

हवाई अड्डे से आगे, आर्थिक बदलाव का नया केंद्र

जेवर एयरपोर्ट केवल हवाई यातायात की सुविधा बढ़ाने वाली परियोजना नहीं है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश, औद्योगिक उत्पादन, निर्यात और पर्यटन से जोड़ने की क्षमता रखने वाला महत्त्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा है। दिल्ली-एनसीआर के दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में इसकी परिकल्पना इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते यात्री दबाव को कम करने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2021 को जेवर एयरपोर्ट की आधारशिला रखी थी। इसके बाद परियोजना के निर्माण में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की भूमिका के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी का मॉडल अपनाया गया। ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहयोगी कंपनी इस परियोजना का विकास और संचालन कर रही है। प्रधानमंत्री ने 28 मार्च 2026 को एयरपोर्ट के प्रथम चरण का उद्घाटन किया। इस चरण के विकास पर लगभग 11,200 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।

आधिकारिक परियोजना विवरण के अनुसार, प्रथम चरण में हवाई अड्डे की सालाना यात्री क्षमता 1.2 करोड़ है। आगे के चरणों में इसका विस्तार करके क्षमता सात करोड़ यात्रियों सालाना तक पहुंचाने की योजना है। इसके साथ बहुआयामी कार्गो हब भी विकसित किया जा रहा है, जिससे औद्योगिक उत्पादों के परिवहन और निर्यात को गति मिलने की उम्मीद है।

निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास की संभावनाएं

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में विकसित हो रहा यह हवाई अड्डा फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं विनिर्माण इकाइयों, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसे प्रस्तावित विकास केंद्रों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। बेहतर हवाई संपर्क से निवेशकों, उद्यमियों और अंतरराष्ट्रीय कारोबारियों की आवाजाही सुगम हो सकती है। इसका लाभ गौतमबुद्ध नगर के साथ-साथ बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों को मिलने की संभावना है।

परियोजना की आर्थिक सफलता का वास्तविक आकलन केवल निर्माण अथवा यात्री क्षमता से नहीं, बल्कि नियमित उड़ानों, कार्गो परिचालन, निवेश की वास्तविक प्राप्ति, स्थानीय युवाओं के रोजगार और आसपास के क्षेत्रों में संतुलित विकास से होगा। भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों और परिवारों के हितों, पर्यावरणीय संतुलन तथा स्थानीय आधारभूत सुविधाओं पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।

नामकरण में विकास और राजनीतिक संदेश, दोनों

जेवर एयरपोर्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से जोड़ने का प्रस्ताव विकास परियोजना के साथ राजनीतिक और प्रतीकात्मक संदेश भी रखता है। समर्थकों की दृष्टि में यह परियोजना को राष्ट्रीय नेतृत्व की पहचान से जोड़ने का प्रयास है। वहीं, इस फैसले का मूल्यांकन करते समय यह भी ध्यान रखना होगा कि एयरपोर्ट की परिकल्पना, भूमि अधिग्रहण, वित्तीय व्यवस्था, निर्माण और संचालन में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, संबंधित विकास प्राधिकरणों तथा निजी भागीदार की अलग-अलग भूमिकाएं रही हैं।

किसी बड़ी परियोजना को राजनीतिक पहचान मिलना एक पक्ष है, जबकि उसकी उपयोगिता, आर्थिक प्रतिफल और आम नागरिकों को मिलने वाला लाभ दूसरा। जेवर एयरपोर्ट की दीर्घकालीन उपलब्धि इस बात से तय होगी कि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने, रोजगार पैदा करने और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में कितना सफल रहता है।

Related Articles

Back to top button