सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक से बदली आकृति चौधरी एनएसए प्रकरण की स्थिति, जिलाधिकारी मेधा रूपम को राहत

Panchayat 24 (गौतम बुद्ध नगर /जिला प्रशासन) : 23 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत से जुड़े इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के प्रभाव पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ ने विशेष रूप से हाईकोर्ट के पैरा 27 से 33 के अमल पर रोक लगाई है। इन अंशों में अधिकारियों पर की गई कड़ी टिप्पणियां और 5 लाख रूपये मुआवजे की वसूली का निर्देश शामिल था।
दरअसल, अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन से जुड़ा है। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को बाद में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत निरुद्ध किया गया था। 2 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी एनएसए हिरासत निरस्त करते हुए तत्काल रिहाई का निर्देश दिया था, बशर्ते किसी अन्य मामले में उनकी आवश्यकता न हो। हाईकोर्ट ने हिरासत की प्रक्रिया और उसके आधारों पर गंभीर सवाल उठाए तथा 5 लाख रूपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था, जिसकी वसूली संबंधित अधिकारियों से, जिलाधिकारी के वेतन सहित, करने को कहा गया था।
जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि एनएसए के तहत निरोध की प्रक्रिया कई स्तरों से होकर गुजरती है। उनके अनुसार प्रस्ताव पुलिस स्तर से शुरू होकर जिलाधिकारी, सलाहकार व्यवस्था तथा राज्य और केंद्र सरकार के स्तर तक जाता है। इसलिए केवल जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान पीठ की ओर से भी यह सवाल उठाया गया कि क्या इस बहुस्तरीय प्रक्रिया में जिलाधिकारी को अलग करके 5 लाख रूपये की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सकती है। वहीं आकृति चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस पेश हुए। उन्हें जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी गई है।
फिलहाल हाईकोर्ट के उस फैसले के संबंधित हिस्सों का क्रियान्वयन रुका हुआ है। यानी 5 लाख रूपये की वसूली और हाईकोर्ट की संबंधित टिप्पणियों पर अंतरिम रोक प्रभावी है। साथ ही छात्रा की एनएसए हिरासत निरस्त करने वाले हाईकोर्ट के आदेश के अमल पर भी रोक लगाई गई है। अब अगला महत्वपूर्ण चरण मामले की मेरिट पर सुनवाई है।
फिलहाल स्थिति स्पष्ट है: इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला अंतिम रूप से कायम या समाप्त नहीं हुआ है; सुप्रीम कोर्ट ने उसके संबंधित हिस्सों पर अंतरिम रोक लगाई है। मामले की अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आगे के आदेश पर निर्भर करेगी।




