जिला प्रशासन

संविधान में मद्य निषेध का संकल्प, व्यवस्था में वैध शराब की अनुमति; फिर अवैध कारोबार क्यों?

बिना लाइसेंस शराब परोसने वालों पर आबकारी विभाग का शिकंजा, दो दिन में छह गिरफ्तार; भारी मात्रा में मदिरा बरामद

डॉ देवेंद्र कुमार शर्मा

Panchayat 24 (गौतमबुद्ध नगर) : भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 में राज्य को मादक पेय पदार्थों के सेवन पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित यह संवैधानिक संकल्प और दूसरी ओर सरकार की निगरानी में संचालित शराब की बिक्री पहली नजर में विरोधाभासी लग सकती है। लेकिन इस अंतर के पीछे सामाजिक व्यवहार, जनस्वास्थ्य और अवैध शराब से होने वाले जानलेवा खतरों की जटिल वास्तविकता छिपी है।

पत्रकारिता के एक दशक से अधिक के अनुभव के बावजूद एक साधारण नागरिक की तरह यह सवाल छात्र जीवन से ही लंबे समय से मन में था कि जब संविधान मद्य निषेध की बात करता है तो सरकार शराब के उत्पादन और बिक्री की अनुमति क्यों देती है? क्या राजस्व की कीमत पर नैतिकता से समझौता किया जा रहा है?

गौतमबुद्ध नगर के जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार से इस सवाल पर हुई बातचीत में उन्होंने इसे अंतर्विरोध के बजाय व्यावहारिक प्रशासनिक व्यवस्था के रूप में स्पष्ट किया। उनका तर्क था कि सरकार का उद्देश्य शराब सेवन को प्रोत्साहित करना नहीं, बल्कि इसके दुष्परिणामों को नियंत्रित करना है। यदि शराब का सेवन करने वालों पर अचानक पूर्ण प्रतिबंध थोप दिया जाए तो चोरी-छिपे इसका कारोबार बढ़ सकता है। मुनाफाखोर अवैज्ञानिक तरीके से जहरीली शराब तैयार कर सकते हैं, जिसकी कीमत अक्सर लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

उनके अनुसार, वैध उत्पादन, बिक्री और सेवन के लिए निर्धारित नियम-कानून इसी जोखिम को नियंत्रित करने का माध्यम हैं। सरकार चाहती है कि लोग नशे से दूर रहें, लेकिन जो लोग शराब का सेवन करते हैं, उनके लिए नियंत्रित और वैधानिक व्यवस्था उपलब्ध रहे, ताकि अवैध कारोबार और जहरीली शराब के खतरे पर अंकुश लगाया जा सके।

संविधान के नीति निदेशक तत्वों का उद्देश्य भी राज्य को जनस्वास्थ्य के संरक्षण की दिशा में मार्गदर्शन देना है। अनुच्छेद 47 के तहत मादक पेय और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पदार्थों के औषधीय प्रयोजनों से इतर सेवन पर रोक लगाने का प्रयास करने की अपेक्षा की गई है। यह व्यवस्था सीधे तौर पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लागू करने का आदेश नहीं, बल्कि राज्य के लिए एक संवैधानिक दायित्व और नीतिगत दिशा है।

लेकिन जब वैध व्यवस्था, लाइसेंस और कानून मौजूद हैं तो फिर कुछ लोग नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से शराब क्यों परोसते हैं? त्योहारों का मौसम शुरू होते ही गौतमबुद्ध नगर में सामने आए दो मामले इस प्रवृत्ति की तस्वीर पेश करते हैं।

जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार के मुताबिक, अवैध शराब की बिक्री और परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत पिछले दो दिनों में बिना वैध इवेंट बार लाइसेंस (FL-11) शराब परोसने वाले दो ठिकानों पर कार्रवाई की गई। इन मामलों में छह लोगों को गिरफ्तार कर बड़ी मात्रा में मदिरा बरामद की गई।

सेक्टर-43 में मकान बना अवैध बार

पहले मामले में, बीते सोमवार आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-2 संजय कुमार और थाना सेक्टर-39 पुलिस की संयुक्त टीम ने सेक्टर-43 स्थित मकान संख्या सी-106 पर छापा मारा। यहां बिना FL-11 इवेंट बार लाइसेंस के शराब परोसी जा रही थी। मौके से पार्टी संचालक कृतेश सिंह (गोरखपुर), शिखर सक्सेना और आयुष चौरसिया (दोनों कानपुर नगर) को गिरफ्तार किया गया। तलाशी में विदेशी मदिरा की 13 बोतलें बरामद हुईं, जिनकी कुल मात्रा 4.55 बल्क लीटर बताई गई।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के रेस्टोरेंट में भी कार्रवाई

इसी दिन दूसरे मामले में, आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-4 अभिनव शाही की टीम ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-16सी स्थित रेडिकॉन वेदान्तम कॉमर्शियल परिसर के द रॉयल स्पाइस रेस्टोरेंट पर दबिश दी। यहां भी बिना FL-11 लाइसेंस शराब परोसी जा रही थी। टीम ने रेस्टोरेंट मैनेजर तेजस्वा कावरा, मालिक महेश कुमार और सोनू गांधी को गिरफ्तार किया।

मौके से 500 एमएल की 48 बीयर कैन (कुल 24 बल्क लीटर) तथा विदेशी मदिरा की 26 बोतलें (कुल 5.265 बल्क लीटर) बरामद की गईं। आरोपियों के विरुद्ध थाना बिसरख में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आवश्यक विधिक कार्रवाई की गई।

जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त के निर्देशन में अवैध शराब की बिक्री, परिवहन और बिना लाइसेंस शराब परोसने वालों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा।

उनके अनुसार, शराब की वैधता कानून के अधीन है, मनमानी की छूट नहीं। सरकार की नियंत्रित व्यवस्था का उद्देश्य राजस्व अर्जित करने से आगे जनस्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ा है। लेकिन व्यवस्था तभी प्रभावी होगी, जब उसका पालन करने की जिम्मेदारी कारोबारियों के साथ उपभोक्ता भी समझें। आखिर कानून का विकल्प चोरी-छिपे कारोबार नहीं, बल्कि कानून का पालन ही हो सकता है।

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