नोएडा जोन

अब जाम नहीं बनेगा जिंदगी की राह में बाधा, एम्बुलेंस को मिलेगा निर्बाध रास्ता

गौतमबुद्धनगर पुलिस की ‘ऑपरेशन फास्ट’ पहल: ट्रैफिक जाम में फंसी जिंदगी को समय पर अस्पताल पहुंचाने की अभिनव व्यवस्था

Panchayat 24 (नोएडा) : चिकित्सा आपातकाल में समय केवल महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर होता है। ऐसे में यदि किसी गंभीर मरीज या दुर्घटना पीड़ित की एम्बुलेंस ट्रैफिक जाम में फंस जाए तो सड़क पर ठहरा यातायात किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। इसी चुनौती का समाधान तलाशते हुए गौतमबुद्धनगर पुलिस ने ‘ऑपरेशन फास्ट’ (FAST – Fast Ambulance Seamless Transition) की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य आपातकालीन एम्बुलेंस को सुरक्षित, त्वरित और निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराना है।

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में पुलिस उपायुक्त मुख्यालय शैव्या गोयल द्वारा शोध के बाद प्रस्तावित यह व्यवस्था पारंपरिक ट्रैफिक प्रबंधन से आगे बढ़कर आपातकालीन परिस्थितियों में संवेदनशील और समन्वित पुलिसिंग का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

इस व्यवस्था के तहत ट्रैफिक पुलिस कंट्रोल रूम में 24 घंटे सक्रिय समर्पित एम्बुलेंस ट्रैफिक सुविधा सेल स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए 9218981716 हेल्पलाइन नंबर निर्धारित किया गया है। अस्पतालों, एम्बुलेंस संचालकों अथवा एम्बुलेंस कर्मियों से मरीज की स्थिति, गंतव्य और प्रस्तावित मार्ग की सूचना मिलते ही ट्रैफिक पुलिस संबंधित चौराहों पर यातायात नियंत्रित कर एम्बुलेंस के लिए रास्ता सुगम बनाएगी। यदि किसी निजी वाहन से भी किसी पीड़ित को अस्पताल पहुंचाया जाता है और उपरोक्त नंबर डायल कर सूचना दी जाती है तो उस वाहन के लिए भी मार्ग को सुगम बनाया जाएगा।

इसकी खासियत है रोलिंग ट्रैफिक क्लियरेंस मैकेनिज्म है अर्थात एम्बुलेंस जिस मार्ग से आगे बढ़ेगी, उसी क्रम में अगले चौराहों पर यातायात पहले से नियंत्रित किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सिग्नल प्रबंधन, विपरीत दिशा के वाहनों का नियमन और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था भी की जाएगी। इस तरह एम्बुलेंस को प्राथमिकता मिलेगी और आम नागरिकों को होने वाली असुविधा भी न्यूनतम रहेगी।

इस व्यवस्था की उपयोगिता परखने के लिए किए गए ट्रायल में व्यस्त यातायात के दौरान खाली एम्बुलेंस ने चिल्ला बॉर्डर से मैक्स और फोर्टिस अस्पताल तक लगभग 12 किलोमीटर की दूरी प्रत्येक मार्ग पर करीब 10 मिनट में तय की। यह परीक्षण बताता है कि बेहतर समन्वय और सक्रिय ट्रैफिक प्रबंधन से भीड़भाड़ के बीच भी आपातकालीन आवागमन को कितना सुगम बनाया जा सकता है।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष सड़क दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर ट्रॉमा मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। सिर की गंभीर चोट, अत्यधिक रक्तस्राव, हृदयाघात और स्ट्रोक जैसी स्थितियों में उपचार तक पहुंचने में हुई देरी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में एम्बुलेंस को प्राथमिकता से रास्ता दिलाना महज यातायात प्रबंधन नहीं, बल्कि जीवन बचाने की दिशा में सीधा हस्तक्षेप है।

प्रमुख सरकारी एवं निजी अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवा प्रदाताओं और आपातकालीन डिस्पैच केंद्रों को इस व्यवस्था से जोड़ना इसकी व्यावहारिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से नागरिकों को भी एम्बुलेंस के आगमन की सूचना देकर सहयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।

यहां एक बात महत्वपूर्ण है कि किसी शहर की यातायात व्यवस्था की श्रेष्ठता केवल वाहनों की गति से नहीं, बल्कि इस बात से भी आंकी जानी चाहिए कि संकट की घड़ी में वह किसी की जिंदगी को कितनी प्राथमिकता देती है। गौतमबुद्धनगर पुलिस की यह पहल इसी सोच को व्यवहार में उतारने का प्रयास है।

दरअसल, ‘ऑपरेशन फास्ट’ की असली सफलता तब होगी, जब किसी गंभीर मरीज की सांसें ट्रैफिक जाम में न उलझें और अस्पताल पहुंचने का हर मिनट उसकी जिंदगी बचाने में काम आए। यही नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग का सार और जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट की अवधारणा का वास्तविक उद्देश्य है।

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