भविष्य में नई पहचान के साथ दूसरे गांवों के लिए रोल मॉडल बनेगा दुजाना

Panchayat 24 (दादरी) : बिसरख विकासखंड के दुजाना गांव की गिनती जिले के अग्रणी गांवों में होती है। दादरी क्षेत्र के 27सा (गुर्जर समाज के नागर गौत्र बाहुल्य गांवों का एक सामाजिक समूह जिसमे कुछ गैर नागर गौत्र के गुर्जर बाहुल्य गांव भी शामिल हैं) के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। शिक्षा और खेलकूद के क्षेत्र में ढेर सारी उपलब्धियों को हासिल करने वाला यह ऐतिहासिक गांव भविष्य में एक और बड़ी उपलब्धि के लिए पहचाना जाएगा। दुजाना गांव की यह उपलब्धि जिले और प्रदेश के दूसरे गांवों के लिए नजीर साबित होगी।
दरअसल, जिला प्रशासन ने दुजाना गांव को मॉडल सोलर विलेज़ के रूप विकसित करने के लिए चुना है। इस संबंध में मंगलवार को जिलाधिकारी मेधा रूपम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में दुजाना गांव को सौर ऊर्जा आधारित मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना और विभिन्न सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान गांव को सोलर मॉडल ग्राउंड के रूप में विकसित किए जाने हेतु तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) का पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुतीकरण किया गया।
प्रस्तुतीकरण में गांव में सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग, स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्र में ऊर्जा आत्मनिर्भरता विकसित करने के लिए प्रस्तावित कार्यों की जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने परियोजना के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के मध्य बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने तथा आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
जिला यूपीनेडा परियोजना अधिकारी लवेश कुमार सिसोदिया के अनुसार मॉडल सोलर विलेज के अंतर्गत घरेलू एवं सार्वजनिक भवनों में सोलर रूफटॉप सिस्टम और गांव की सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों पर सोलर स्ट्रीट लाइटिंग के साथ ग्रामीण आजीविका एवं कृषि आधारित गतिविधियों को भी सौर ऊर्जा से जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके तहत सोलर मिल्क चिलर, सोलर आटा चक्की और सोलर कोल्ड प्रेस यूनिट जैसी सुविधाएं स्थापित किए जाने की योजना है। आवश्यकता के अनुसार कृषि एवं ग्रामीण आजीविका से जुड़े अन्य सौर ऊर्जा आधारित उपकरण भी स्थापित किए जाएंगे।
इससे गांव में बिजली की बचत, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता में कमी, स्थानीय रोजगार एवं आय के अवसरों में वृद्धि तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।




