ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

चार मूर्ति अंडरपास: जाम से राहत, विकास को नई राह; अब भविष्य की चुनौतियों पर नजर डालने की बारी

डॉ. देवेंद्र कुमार शर्मा

किसी उपलब्धि की सार्थकता केवल उसके निर्माण में नहीं, बल्कि उससे खुलने वाली संभावनाओं में निहित होती है। सफलता जहां प्रशंसा अर्जित करती है, वहीं भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य भी निर्धारित करती है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट का चार मूर्ति अंडरपास इसी कसौटी पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह महज यातायात सुगमता का माध्यम नहीं, बल्कि शहर की भावी जरूरतों को समझने और विकास की दिशा तय करने का अवसर भी है। अर्थात इस अंडरपास का निर्माण ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के लिए एक मील का पत्थर तो साबित होगा ही साथ ही भविष्य के लिए कुछ चुनौतियाँ भी पेश करेगा।

दिल्ली-एनसीआर के व्यस्ततम चौराहों में शामिल चार मूर्ति गोलचक्कर को जाममुक्त करने के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने 4 फरवरी 2025 को इस परियोजना पर काम शुरू कराया। लगभग 95 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना पर करीब 88 करोड़ रुपये अंडरपास निर्माण में खर्च हुए हैं। बरसात में जलभराव की आशंका से निपटने के लिए दोनों प्रवेश द्वारों पर लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से कैनोपी और जल निकासी की व्यवस्था विकसित की गई है। दोनों सिरों पर बने गहरे संपवेल अतिरिक्त पानी को एकत्र कर अंडरपास को जलभराव से सुरक्षित रखने में सहायक होंगे।

अंडरपास के ऊपर से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच यातायात पहले ही शुरू हो चुका है, जिससे वाहन चालकों को काफी राहत मिली है। अब 5 नवंबर से इसे तीन दिन के सार्वजनिक परीक्षण के लिए खोलने की तैयारी है। परीक्षण के दौरान सामने आने वाली खामियों को दूर करने के बाद इसे नियमित आवागमन के लिए खोला जाएगा। हालांकि, स्थायी रूप से संचालन शुरू करने की तिथि अभी निर्धारित नहीं है। वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक प्रभात शंकर के अनुसार, सफल परीक्षण के बाद प्राधिकरण जल्द ही इसे जनता को समर्पित करेगा।

इस अंडरपास का महत्व केवल चार मूर्ति चौराहे पर लगने वाले जाम से मुक्ति तक सीमित नहीं है। इसके शुरू होने से गाजियाबाद और राष्ट्रीय राजमार्ग-9 की ओर से आने वाले वाहन नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, ग्रेटर नोएडा और सूरजपुर तक अधिक सुगमता से पहुंच सकेंगे। निर्बाध आवागमन से न केवल लोगों का समय बचेगा, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

लेकिन विकास की असली दूरदर्शिता वर्तमान समस्या का समाधान करने के साथ भविष्य की परेशानी को पहले ही पहचान लेने में है। तीन मूर्ति अंडरपास की सफलता के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सामने यही अगली चुनौती होगी।

न्यू नोएडा की प्रस्तावित बसावट और विकास गतिविधियों के विस्तार के साथ इस पूरे क्षेत्र में आवागमन का दबाव तेजी से बढ़ना स्वाभाविक है। चार मूर्ति से सूरजपुर की ओर आने वाली सड़क और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर जाने वाली 130 मीटर चौड़ी सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में मार्ग के प्रमुख गोलचक्करों पर यातायात का दबाव और जाम की समस्या बढ़ेगी । इसके संकेत भी मिलने शुरू हो गए हैं। इस अंडरपास के आसपास के कई चौराहों के ऊपर लगातार ट्रैफिक जाम का दबाव बढ़ रहा है।

इसलिए प्राधिकरण को अभी से ऐसे चौराहों और मार्गों की पहचान कर लेनी चाहिए, जहां भविष्य में अंडरपास या अन्य ग्रेड-सेपरेटर की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के वर्तमान सीईओ रवि कुमार एनजी जिस प्रकार भविष्यनमुखी दृष्टिकोण से शहर की समस्याओं, विशेषकर सड़क और सीवर की समस्याओं, पर काम कर रहे हैं यदि ऐसे में ट्रेफिक जाम की समस्या वाले कुछ अन्य स्थानों पर नए अंडरपास निर्माण या वैकल्पिक प्रावधान का फैसला प्राधिकरण द्वारा ले लिया जाता है तो यह कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, बल्कि भविष्ययोनमुखी दृष्टिकोण से यह जनहित में उठाया गया कदम ही होगा।

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