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सेक्टर-150 की एल्डिको सोसाइटी में एसटीपी टैंक बना मौत का कुआँ, दम घुटने से दो कर्मचारियों की मौत; ठेकेदार गिरफ्तार

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) :  नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-150 की एक आवासीय सोसाइटी में शनिवार और देर रात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के टैंक की सफाई के दौरान हुई दर्दनाक दुर्घटना ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी से दो कर्मचारियों की जान चली गई। घटना के बाद पुलिस ने संबंधित ठेकेदार को गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मामला नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र का है।

पुलिस के अनुसार, एल्डिको सोसाइटी में एसटीपी टैंक की सफाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान सफाई कर्मचारी शशिकांत शर्मा (40 वर्ष) टैंक के भीतर काम करते समय अचानक बेहोश हो गए। उन्हें बचाने के उद्देश्य से सुरक्षा गार्ड आकाश (22 वर्ष) बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के टैंक में उतर गया। दुर्भाग्यवश वह भी कुछ ही क्षणों में बेहोश होकर वहीं गिर पड़ा।

घटना की सूचना मिलते ही थाना नॉलेज पार्क पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुँची। संयुक्त अभियान चलाकर दोनों कर्मचारियों को टैंक से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया। चिकित्सकों ने उपचार के दौरान दोनों को मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने बताया कि मृतकों के शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले में संबंधित धाराओं के तहत अभियोग दर्ज कर लिया गया है तथा प्रारंभिक जांच के आधार पर जिम्मेदार ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर प्रश्न

यह हादसा एक बार फिर उन परिस्थितियों की ओर संकेत करता है, जिनमें सीवर और एसटीपी टैंकों की सफाई जैसे अत्यंत जोखिमपूर्ण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे बंद टैंकों में प्रवेश से पहले गैस परीक्षण, पर्याप्त ऑक्सीजन की उपलब्धता, सुरक्षा हार्नेस, श्वसन उपकरण तथा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की व्यवस्था अनिवार्य मानी जाती है। इन मानकों की उपेक्षा मामूली चूक को भी जानलेवा हादसे में बदल सकती है।

वहीं, मामले पर नोएडा जल विभाग के वर्क सर्किल 2 के एस एम प्रदीप कुमार में बताया की मामला बिल्डर सोसायटी से जुडा है। घटना की शिकायत उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ई की जाएगी।

घटना के बाद यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या कार्य प्रारंभ करने से पूर्व निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कराया गया था और क्या सोसाइटी प्रबंधन तथा कार्यदायी एजेंसी ने श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए थे। पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि अन्य व्यक्तियों की जिम्मेदारी सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

यह हादसा केवल दो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति नहीं है, बल्कि उन सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी कठोर परीक्षा है जिनका उद्देश्य ऐसे जोखिमपूर्ण कार्यों में श्रमिकों के जीवन की रक्षा करना है। यदि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, तो भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है।

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