Blog

जलसेतु के साथ ग्रेटर नोएडा में शिक्षा के नए युग की शुरुआत

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : ग्रेटर नोएडा अब केवल उद्योग, निवेश और तेजी से विकसित हो रहे शहरी बुनियादी ढांचे के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक शिक्षा और शोध के नए केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने ग्रेटर नोएडा में अपने प्रस्तावित कैंपस की औपचारिक घोषणा कर इस बदलाव की नींव रख दी है। कैंपस को ‘जलसेतु’ नाम दिया गया है।

सोमवार को दिल्ली स्थित नेशनल एग्रीकल्चर साइंस कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की मौजूदगी में कैंपस की औपचारिक घोषणा की। उत्तर प्रदेश में किसी विदेशी विश्वविद्यालय का यह पहला कैंपस होगा। इससे ग्रेटर नोएडा के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा के लिए विदेश जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो सकेगी।

तीन मंजिलों पर आकार लेगा अंतरराष्ट्रीय कैंपस

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का कैंपस ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय परिसर स्थित टावर-2 में स्थापित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने इसके लिए तीन फ्लोर लिए हैं और इसे दिसंबर 2026 में शुरू करने की तैयारी है।

कैंपस का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार करना, उनके कौशल का विकास करना और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना होगा। शिक्षा के साथ शोध, नवाचार और उद्योग की भागीदारी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को मिलेगा शैक्षणिक विस्तार

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी और भारत के बीच दो दशक से अधिक समय से चली आ रही शैक्षणिक, शोध और संस्थागत साझेदारी को ग्रेटर नोएडा कैंपस नई दिशा देगा। इससे शिक्षा, शोध, इनोवेशन, कौशल विकास और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है।

विश्वविद्यालय ने भारत में अपनी साझेदारी को व्यापक बनाने के साथ महिला सशक्तीकरण, बिजनेस, डेटा, इनोवेशन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए स्कॉलरशिप कार्यक्रम की भी घोषणा की है। इसका लक्ष्य भारतीय युवाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा और शोध के अवसर उपलब्ध कराना है।

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं अध्यक्ष विशिष्ट प्रोफेसर जॉर्ज विलियम्स एओ ने कहा कि भारत के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य युवाओं को ऐसे अवसर उपलब्ध कराना है, जिनके माध्यम से वे देश के सामाजिक और आर्थिक भविष्य में सार्थक योगदान दे सकें।

न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने ग्रेटर नोएडा कैंपस को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शैक्षणिक सेतु बताते हुए कहा कि इससे भारतीय छात्रों को वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी की विश्वस्तरीय शिक्षा तक आसानी से पहुंच मिलेगी।

प्राधिकरण देगा हरसंभव सहयोग

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने भी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर कैंपस की स्थापना में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ प्रेरणा सिंह, न्यू साउथ वेल्स के कोषाध्यक्ष डेनियल मुकी समेत कई प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे।

लगभग 50 हजार विद्यार्थी वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी में नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। टाइम्स हायर एजुकेशन की यूनिवर्सिटी इम्पैक्ट रैंकिंग में विश्वविद्यालय को विश्व स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त होने का दावा किया गया है। ऐसे में इसका ग्रेटर नोएडा में आना शहर के शैक्षणिक परिदृश्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दे सकता है।

जल सुरक्षा पर भी होगा विशेष फोकस

ग्रेटर नोएडा कैंपस को केवल शिक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि ‘जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की गई है। यह केंद्र उत्तर प्रदेश में जल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए सरकार, शोध संस्थानों, उद्योग और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाने का काम करेगा।

इसके अंतर्गत भूजल की स्थिरता, नदियों के स्वास्थ्य, सतत सिंचाई और शहरी जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। उद्देश्य केवल समस्याओं का अध्ययन करना नहीं, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करना होगा।

सतत जल प्रबंधन में शुरू होगी मास्टर डिग्री

विश्वविद्यालय ने कैंपस शुरू करने के साथ ही सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की भी घोषणा की है। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, सरकारी संस्थानों, बैंकिंग क्षेत्र और उद्योग जगत के विशेषज्ञों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब तेजी से बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के साथ जल सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में ग्रेटर नोएडा में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और जल संबंधी शोध का यह संगम आने वाले वर्षों में शहर को शिक्षा, नवाचार और सतत विकास के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

ग्रेटर नोएडा की बदलती पहचान

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का ‘जलसेतु’ कैंपस ग्रेटर नोएडा की बदलती तस्वीर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। जिस शहर की पहचान अब तक नियोजित औद्योगिक और आवासीय विकास से बनती रही है, वहां वैश्विक विश्वविद्यालय की मौजूदगी शिक्षा, रोजगार, शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नई संभावनाओं को जन्म दे सकती है।

यानी ग्रेटर नोएडा के विकास की कहानी अब केवल एक्सप्रेसवे, उद्योग और निवेश तक सीमित नहीं रहने वाली। ‘जलसेतु’ के साथ शहर की पहचान ज्ञान, कौशल और वैश्विक शिक्षा के नए गंतव्य के रूप में भी आकार लेने लगी है।

Related Articles

Back to top button