दादरी विधानसभा

चार दशक की निष्ठा के बाद उपेक्षा का दर्द: भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता जगभूषण गर्ग ने मुख्यमंत्री योगी से लगाई न्याय की गुहार

Panchayat 24 (दादरी) : भारतीय जनता पार्टी के लिए वर्ष 1980 से निरंतर सक्रिय रहकर संगठन और जनसेवा में अपनी भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ कार्यकर्ता जगभूषण गर्ग ने पार्टी में कथित उपेक्षा और पूर्व में किए गए आश्वासनों के पूरा न होने की पीड़ा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखी है। गर्ग ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में अपने लगभग चार दशक लंबे राजनीतिक सफर, संगठन के प्रति निष्ठा और चुनावी अवसरों को लेकर मिले आश्वासनों का सिलसिलेवार उल्लेख करते हुए पार्टी में उचित सम्मान और दायित्व दिए जाने की मांग की है। यह पत्र सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

गर्ग के पत्र के अनुसार, उन्होंने सन् 1980 से भाजपा की सेवा की है और संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। नगर स्तर पर सभासद और नगर अध्यक्ष जैसे पदों से लेकर जिला कार्यकारिणी के विभिन्न दायित्वों तक उन्होंने पार्टी के लिए कार्य किया। उनका दावा है कि राजनीतिक परिस्थितियां कितनी भी विपरीत रही हों, उन्होंने भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा में कोई कमी नहीं आने दी और निरंतर संगठन के लिए सक्रिय रहे।

चेयरमैन पद की दावेदारी, लेकिन टिकट का अवसर नहीं मिला

पत्र में जगभूषण गर्ग ने अपनी राजनीतिक पीड़ा का प्रमुख कारण निकाय चुनावों में टिकट को लेकर मिले आश्वासनों को बताया है। उनके अनुसार, वर्ष 2000 से ही वह निकाय चुनाव में चेयरमैन पद के प्रत्याशी के रूप में प्रयास करते रहे, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के आग्रह पर उन्होंने कई बार चुनाव लड़ने से स्वयं को पीछे कर लिया।

गर्ग का कहना है कि महिला सीट होने के कारण उनके परिवार से किसी अन्य व्यक्ति के राजनीति में न होने का हवाला देकर उन्होंने वरिष्ठ नेताओं की बात स्वीकार की। उन्हें आश्वासन दिया गया कि सामान्य सीट होने पर उन्हें पार्टी का टिकट दिया जाएगा।

उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2018 के चुनाव में भी उन्हें सामान्य सीट होने पर टिकट दिए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन उस समय भी टिकट किसी अन्य प्रत्याशी को दे दिया गया। इसके बाद उन्हें वर्ष 2023 में चुनाव लड़ाने का आश्वासन दिया गया।

2023 में भी आश्वासन अधूरा, फिर दूसरे प्रत्याशी को टिकट

जगभूषण गर्ग के अनुसार, वर्ष 2023 में भी पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ाने का आश्वासन दिया था। लेकिन जब चुनाव का समय आया तो उन्होंने पार्टी के निर्णय के अनुरूप गीता पंडित को टिकट दिए जाने को स्वीकार किया। पत्र में उनका कहना है कि उन्होंने उस समय समाज के आदेश और अंतरात्मा की आवाज पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

गर्ग के अनुसार, जब वह चुनाव में निर्णायक स्थिति में पहुंचे तो स्थानीय विधायक तेजपाल सिंह नागर और क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेन्द्र सिसोदिया ने उन्हें मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया।

5 मई 2023 की मुलाकात का पत्र में उल्लेख

पत्र में जगभूषण गर्ग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 5 मई 2023 को गाजियाबाद में हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने उन्हें पार्टी हित में चुनाव हूं लड़ने के लिए कहा और गीता पंडित को जिताने के लिए उनसे सहयोग करने को कहा।

गर्ग का दावा है कि उस दौरान मुख्यमंत्री ने तत्कालीन विधायक तेजपाल नागर तथा क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेन्द्र सिसोदिया को उनकी जिम्मेदारी सौंपी और उनसे कहा कि “इनको सरकार में सम्मानजनक पद पर समायोजित करना है।”

यही आश्वासन अब जगभूषण गर्ग की वर्तमान पीड़ा का केंद्र बन गया है। उनका कहना है कि लंबे राजनीतिक जीवन और संगठन के प्रति समर्पण के बावजूद उन्हें वह सम्मानजनक दायित्व नहीं मिल सका, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।

“सम्मान पद का नहीं, चार दशक की निष्ठा का सवाल”

गर्ग की मुख्यमंत्री को लिखी अपील को केवल किसी पद की मांग के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। पत्र के शब्दों में एक ऐसे पुराने कार्यकर्ता की पीड़ा दिखाई देती है, जिसने पार्टी के गठन के दौर से संगठन के साथ बने रहकर पार्टी के प्रति अपने समर्पण भाव का परिचय दिया बल्कि कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी अपनी निष्ठा कायम रखी।

उनकी शिकायत का मूल स्वर यह है कि राजनीतिक जीवन में बार-बार व्यक्तिगत अवसरों का त्याग करने और संगठन के निर्णय को स्वीकार करने के बावजूद जब सम्मानजनक दायित्व का समय आया तो किया गया आश्वासन मूर्त रूप नहीं ले सका।

मुख्यमंत्री से “उचित सम्मान” की मांग

पत्र के अंत में जगभूषण गर्ग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अत्यंत विनम्र शब्दों में आग्रह किया है कि वह उनके जैसे “इष्ट भक्त रूपी कार्यकर्ता” को उचित सम्मान प्रदान कर समाज में उनका मान-सम्मान बढ़ाने की कृपा करें।

गर्ग का यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा संगठन लगातार अपने पुराने, जमीनी और समर्पित कार्यकर्ताओं को पार्टी की शक्ति का आधार बताता रहा है। ऐसे में चार दशक से अधिक समय से संगठन के साथ जुड़े होने का दावा करने वाले एक वरिष्ठ कार्यकर्ता की शिकायत निश्चित रूप से संगठन के भीतर कार्यकर्ता के सम्मान, राजनीतिक आश्वासन और संगठनात्मक दायित्वों के निर्वहन जैसे सवालों को सामने लाती है।

फिलहाल यह पत्र एक पुराने भाजपा कार्यकर्ता की उस कसक को सामने लाता है, जिसमें चार दशक की राजनीतिक तपस्या के बाद भी अपेक्षित सम्मान और दायित्व न मिलने की पीड़ा मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की विवशता दिखाई देती है।

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