ग्रेटर नोएडा फेज दो के लोगों के लिए इंतजार की घड़ी हुई समाप्त : ईस्टर्न पेरिफेरल तक बनेगी 105 मीटर चौड़ी सड़क, ग्रेटर नोएडा फेस-1 व फेस-2 और डीएनजीआईआर ईपीई से जुड़ जाएंगे

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई गति देने वाले महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। इसके तहत ग्रेटर नोएडा फेस-1 और फेस-2 को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (ईपीई) तथा डीएनजीआईआर क्षेत्र से जोड़ने के लिए 105 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के पूरा होने से ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक, आवासीय और प्रस्तावित विकास क्षेत्रों की ईपीई तक सीधी और बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी।
परियोजना के तहत फेस-1 में इस सड़क का लगभग छह किलोमीटर हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका है। अब फेस-2 में ग्राम जुनपत से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। इसे 10 लेन तथा चार सर्विस लेन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे भविष्य में बढ़ने वाले यातायात के दबाव को देखते हुए पर्याप्त क्षमता उपलब्ध रहेगी।
रेलवे लाइन, फ्रेट कॉरिडोर और जीटी रोड पर बनेंगे तीन ओवरब्रिज
प्रस्तावित सड़क के मार्ग में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक पहुंचने से पहले रेलवे लाइन, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लिंक लाइन और जीटी रोड पड़ेंगे। इन महत्वपूर्ण अवरोधों पर यातायात को निर्बाध रखने के लिए तीन ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। इससे सड़क यातायात को रेलवे और अन्य प्रमुख परिवहन मार्गों के कारण रुकावट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
निर्माण का खर्च एनएचएआई उठाएगा
परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की होगी, जबकि सड़क के निर्माण पर होने वाला खर्च भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) वहन करेगा। प्रस्तावित सड़क के दायरे में ग्रेटर नोएडा फेस-1, फेस-2 और डीएनजीआईआर क्षेत्र की भूमि शामिल है।
डीएनजीआईआर क्षेत्र का विकास नोएडा प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में परियोजना के लिए डीएनजीआईआर क्षेत्र में आने वाली भूमि का अधिग्रहण नोएडा प्राधिकरण करेगा। भूमि अधिग्रहण की लागत नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 50:50 के अनुपात में वहन करेंगे।
औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा फायदा
105 मीटर चौड़ी इस सड़क को केवल एक नई सड़क परियोजना के तौर पर नहीं, बल्कि ग्रेटर नोएडा के विस्तारित औद्योगिक और शहरी विकास के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। ईपीई से सीधा जुड़ाव होने के बाद ग्रेटर नोएडा फेस-1 और फेस-2 के साथ डीएनजीआईआर क्षेत्र की बाहरी क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी।
विशेष रूप से औद्योगिक इकाइयों, माल परिवहन और भारी वाहनों के लिए यह कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जुड़ाव के बाद दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हिस्सों तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। इससे मौजूदा मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
ग्रेटर नोएडा में लगातार बढ़ रही औद्योगिक गतिविधियों और नए विकास क्षेत्रों को देखते हुए यह परियोजना भविष्य की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। बोर्ड की मंजूरी के बाद अब भूमि और अन्य औपचारिकताओं को आगे बढ़ाते हुए परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में कार्रवाई होगी।




