स्पेशल स्टोरी

यात्रा वृत्तांत : मेरी झाँसी शहर की यात्रा

Panchayat 24 : किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि पाषाण युग में कई दिनों तक पैदल चलकर चंद किमी की दूरी तय करने वाला आदिमानव आज सभ्यता के विकास के साथ सैकड़ों किमी की दूरी को चंद घंटों में तय करेगा? परिवर्तन का यह दौर पहिए के आविष्कार से शुरू हुआ और तेज रफ्तार रेलगाड़ियों तथा हवाई जहाजों तक पहुंच गया है। वैसे, अंतरिक्ष यात्री इससे भी एक कदम आगे निकल गए हैं।

वर्तमान सरकार ने भी इस बदलाव की दिशा में सहयोग देते हुए वंदे भारत रेल को पटरियों पर दौड़ाया है। लोगों के बीच इस रेल की काफी चर्चा होती है। आज मुझे भी मेरे वरिष्ठ साथी राजेश बैरागी के साथ इस ट्रेन में यात्रा करने का मौका मिला। अवसर था दिल्ली हजरत निजामुद्दीन से वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन की यात्रा का। रेल यात्रा सुबह ठीक छह बजे शुरू हुई और 10:30 बजे झांसी पहुंच गई।

बीच रास्ते में मौसम की मेहरबानी हरियाली के रूप में उन पहाड़ों और मैदानों पर दिखी, जहां सामान्य दिनों में बहुत कम या न के बराबर हरियाली होती थी। आज महसूस हुआ कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे आधुनिक शहरों के लिए रेल यातायात कितना आवश्यक है। हालांकि, निकट भविष्य में एमएमटीएलएच के अंतर्गत बोड़ाकी में बड़ा और आधुनिक रेलवे स्टेशन बनेगा, जहां सभी लंबी दूरी की रेलों का ठहराव शुरू होगा।

खैर, हर यात्रा का अपना अनुभव होता है। यहां भी औद्योगिक विकास की रूपरेखा लगभग तैयार हो चुकी है। संभवतः तीन से चार माह में यहां औद्योगिक विकास की विधिवत शुरुआत हो जाएगी। क्षेत्र के विकास की यह जिम्मेदारी बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के कंधों पर है, जिसका नेतृत्व एक शानदार और विजनरी आईएएस अधिकारी संजय खत्री कर रहे हैं।

सौभाग्य से यात्रा के इस पड़ाव में उनसे भी मुलाकात का अवसर मिला। बता दें कि संजय खत्री का नोएडा एसीईओ के रूप में सफल कार्यकाल रहा है। उन्होंने प्राधिकरण के रोडमैप को काफी विस्तार से बताया। किसानों से लगभग 29 हजार हेक्टेयर भूमि का क्रय हो चुका है। शासन से मास्टर प्लान के जल्द अनुमोदन के बाद जमीन पर उतरने की तैयारी है। कई बड़े समूहों ने यहां उद्योग लगाने में रुचि दिखाई है। इससे एक बात तय है कि बीडा का भविष्य उज्ज्वल है।

बीडा का यह प्रयास जहां बुंदेलखंड के युवाओं के लिए रोजगार के बेहतर साधन उपलब्ध कराने का एक बड़ा माध्यम होगा, वहीं इसके लिए बीडा युवाओं के कौशल विकास के कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। निकट भविष्य में सिंगापुर इस कड़ी में बीडा का बड़ा सहयोगी होगा। शायद बीडा के इस प्रयास से बुंदेलखंड से युवाओं का रोजगार के लिए पलायन रुके और बुंदेलखंड की जवानी बुंदेलखंड के विकास के काम आए।

झांसी आए और रानी लक्ष्मीबाई का ऐतिहासिक किला न देखें, यह तो यात्रा के साथ अन्याय होता। अतः हमने ऐसा नहीं किया और किले का भ्रमण किया। दतिया पहुंचकर माता पीतांबरा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मां पीतांबरा का दतिया स्थित यह मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है।

यहां से हम लोग रेलवे स्टेशन पहुंच गए, जहां एक बार फिर वंदे भारत हमें हमारे अगले गंतव्य आगरा ले जाने वाली थी। वर्तमान दौर में अलग होते हुए भी शरीर के महत्वपूर्ण अंग के रूप में अपनी पहचान बना चुके मोबाइल से काफी समय की दूरी ने मन की व्याकुलता बढ़ा दी। बड़ी शिद्दत से मोबाइल पर व्हाट्सऐप संदेशों और सोशल मीडिया को ऐसे देखना शुरू किया, जैसे जंगल से लौटी गाय अपने बछड़े को दुलारती है।

तभी बैरागी जी का यात्रा-वृत्तांत पर लिखा गया लेख दिखा, जिसने मुझे 43 की उम्र में भी जेन जी कहा गया है, यह जानकर मन को अस्थायी ही सही, लेकिन सुकून मिला। साथ ही उन्होंने मेरे ऊपर आरोप लगाया कि मैंने यात्रा के दौरान उनके साथ सीट आवंटन में कोई दुर्भावना रखी। उनकी पोस्ट का फोटो बता रहा है कि मैंने उनके सम्मान में विंडो सीट उन्हें ऑफर की। मैं इन आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताता हूं।

खैर, यह उनकी लेखन शैली है, जो विषय की गंभीरता को बनाए रखते हुए उसको बोझिल और जटिल न बनाकर पाठक के लिए सरल और रुचिकर बनाती है। मैं दूर हूं या पास, उनका स्नेह और आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है।
यात्रा के अगले पड़ाव का अनुभव भी आपको जल्द लिखूंगा।

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