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मोहे तबादला दे दो, पर यूपीसीडा न भेजो : अफसरों का ‘काला पानी’ वाला दर्द

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : ब्रिटिश शासन के दौर में ‘सज़ा-ए-काला पानी’ भारतवासियों के लिए सबसे अधिक कष्टकारी सजा मानी जाती थी। ब्रिटिश सरकार जिस व्यक्ति को यह सजा देती थी, समझ लीजिए वह तत्कालीन हुकूमत की नजर में बहुत बड़ा अपराधी था। खैर, आज भारत स्वतंत्र है, लेकिन ‘काला पानी’ कहानियों और कहावतों के माध्यम से अब भी लोगों के जहन में मौजूद है।

आजकल उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों का दौर चल रहा है। इस तबादला एक्सप्रेस का असर गौतमबुद्ध नगर के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में साफ दिखाई दे रहा है। वैसे तो तबादला सरकारी अधिकारी और कर्मचारी के जीवन का हिस्सा होता है, लेकिन ‘कंफर्ट जोन’ में आने के बाद किसी दूसरे स्थान पर तैनाती का विचार ही माथे पर पसीना ला देता है।

यदि कंफर्ट जोन की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर में स्थित गौतमबुद्ध नगर के तीनों औद्योगिक विकास प्राधिकरण—नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे—उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक कंफर्ट जोन माने जाते हैं। यहां तैनाती पाने के लिए गला-काट प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। कुछ ऐसा ही हाल इन तीनों औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में अपनी तैनाती बनाए रखने को लेकर भी रहता है।

फिर भी नौकरी है तो तबादला भी होगा ही। ऐसे में इन प्राधिकरणों के अधिकारी और कर्मचारियों का प्रयास यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) में तैनाती से बचने का रहता है। इसके लिए लखनऊ दरबार से जुड़े संत्री से लेकर मंत्री तक की चौखट की परिक्रमा का सिलसिला भी खूब चलता है। फिर भी अभयदान सभी को नहीं मिल पाता।

जो अपनी तैनाती बचाने में कामयाब हो जाते हैं, वे कुछ ऐसा भाव प्रकट करते हैं मानो वे तो यूपीसीडा जाने को तैयार थे, लेकिन क्या करें, उनका नाम तबादला सूची में शामिल ही नहीं हुआ। वहीं जिनका तबादला यूपीसीडा में हो जाता है, वे यही कहते हैं कि हमें तो नौकरी यहां भी करनी है और वहां भी करनी है। यूपीसीडा ही तो है, कोई काला पानी थोड़े ही है?

वैसे इस तरह के भाव में छिपे सुकून और पीड़ा को वही अनुभव कर सकता है, जो या तो अपना तबादला रुकवाने में कामयाब हो गया हो अथवा लाख प्रयासों के बावजूद अपना तबादला न रुकवा सका हो।

वहीं, जिन लोगों का यूपीसीडा से नोएडा, ग्रेटर नोएडा अथवा यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में तबादला होकर आया है, वे भले ही अपने भाव सार्वजनिक तौर पर प्रकट न करें, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उनके मन में कोई भाव न हो। सबके सामने भले ही वे शांति बनाए रखें, लेकिन अकेले में उनके भी एक बार खुशी के आंसू जरूर छलकने को आतुर हुए होंगे।

वैसे पिछले कुछ दिनों में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों से यूपीसीडा और यूपीसीडा से गौतमबुद्ध नगर के इन तीनों प्राधिकरणों में कई अधिकारियों के तबादले हुए हैं। ऐसा नहीं है कि यूपीसीडा में तबादले का सभी को मलाल ही हुआ हो। जब बिछड़े यार मिलेंगे तो अकेलापन भी दूर होगा। यही तो सकारात्मक भाव है, जिसके सहारे समय भी व्यतीत हो जाएगा और जिला वापसी की उम्मीद भी बनी रहेगी।
ऐसी परिस्थितियाँ ही एक जगत प्रसिद्ध कहावत “उम्मीद पर दुनिया कायम है।” को संबल प्रदान करती हैं.

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