नोएडा जोन

शेल कंपनियों के जरिए हवाला और करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा चीनी नागरिक समेत तीन गिरफ्तार

Panchayat 24 (नोएडा) : उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने स्थानीय पुलिस ने आर्थिक अपराधों के विरुद्ध बड़ी सफलता हासिल करते हुए नोएडा में संचालित एक अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में एक चीनी नागरिक सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह शेल (फर्जी) कंपनियों का जाल बिछाकर हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग, अंडर-इनवॉयसिंग और अन्य आर्थिक अपराधों को अंजाम दे रहा था। एसटीएफ को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार चीन और हांगकांग तक जुड़े हुए हैं।

आरोपियों के विरुद्ध थाना फेस-2, नोएडा में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा विदेशी अधिनियम, 2025 के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

एसटीएफ ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें लियाओ लॉन्गहुई, मूल निवासी लियाओ लॉन्गहुई (Liao Longhui), मूल निवासी चीन और वह वर्तमान में वह टावर-17, पूर्वांचल सिटी, सेक्टर-93, नोएडा में रह रहा था। जबकि संजीव कुमार निवासी 1902, प्रतीक ग्रैंड सिटी, सिद्धार्थ विहार, गाजियाबाद और कोशलेन्द्र निवासी ग्राम गोकुलपुर, थाना सराय शीस, जनपद औरैया शामिल हैं। तीनों को सेक्टर-93 स्थित पूर्वांचल सिटी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

एसटीएफ के अनुसार, मुख्य आरोपी लियाओ लॉन्गहुई वर्ष 2018 में भारत आया था। उसने मोबाइल फोन कवर के कारोबार की आड़ में अपना नेटवर्क खड़ा किया। जांच में पता चला कि चीन से आने वाले कच्चे माल की कीमत कम दर्शाकर (अंडर-इनवॉयसिंग) और तैयार माल की बिक्री के माध्यम से धन का बड़ा हिस्सा हवाला चैनलों से चीन भेजा जाता था।

गिरोह ने कई भारतीय सहयोगियों की मदद से दर्जनों शेल कंपनियां बनाई। इन कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए गए, लेकिन उनका वास्तविक नियंत्रण चीनी नागरिक के हाथ में था। कंपनियों का इस्तेमाल धन के स्रोत को छिपाने, फर्जी वित्तीय लेन-देन दिखाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता था।

एसटीएफ की जांच में सामने आया कि लियाओ लॉन्गहुई का भारतीय वीजा वर्ष 2020 में समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद वह अवैध रूप से भारत में रह रहा था। उसने कई कर्मचारियों और परिचितों के दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी कंपनियां स्थापित कराईं। जांच में यह भी पता चला कि पहले भी एक अन्य मामले में कंपनी से जुड़े व्यक्ति के विरुद्ध फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पैन और जीएसटी प्राप्त करने का मुकदमा दर्ज हो चुका है।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह ने YTL Manufacturing Pvt. Ltd. के अलावा JNS Infra Heights Pvt. Ltd., Refan Enterprises India Pvt. Ltd., Tidydesk Essential Pvt. Ltd., Z One Enterprises, Hanuraj Trading Solution Pvt. Ltd., UPMAX India Pvt. Ltd., Mezetech Power India Pvt. Ltd., Excellence Mobile Tech India Pvt. Ltd. जैसी कंपनियों का उपयोग संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के लिए किया। इसके अतिरिक्त हांगकांग में पंजीकृत कंपनियों के माध्यम से भी लेन-देन किए जाने की जानकारी मिली है।

एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से पांच लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, एक टैबलेट, दो पैन कार्ड, दो चीनी पासपोर्ट, एक चीनी पहचान पत्र, एक कूटरचित आधार कार्ड, विभिन्न कंपनियों की 10 मुहरें, 11 बैंक चेकबुक, कंपनियों के पंजीकरण एवं शेयर संबंधी दस्तावेज, लगभग 4.72 करोड़ रुपये के बैंक चेक तथा 15,400 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद दस्तावेज इस बात के संकेत देते हैं कि नेटवर्क का संचालन सुनियोजित ढंग से किया जा रहा था।

एसटीएफ का मानना है कि यह गिरोह केवल हवाला तक सीमित नहीं था, बल्कि संगठित आर्थिक अपराधों के बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। एजेंसी अब चार्टर्ड अकाउंटेंट, बैंक खातों के संचालन, शेल कंपनियों के वास्तविक लाभार्थियों और विदेशों तक फैले वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है।

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