हिंडन का जर्जर पुल बनेगा इतिहास, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने गिराने की तैयारी शुरू की

– तीन दशक पुराने ढांचे पर मंडरा रहा हादसे का खतरा, सिंचाई विभाग को भेजा गया पत्र; कार्रवाई न होने पर प्राधिकरण स्वयं करेगा ध्वस्तीकरण
Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाले हिंडन नदी पर स्थित लगभग तीन दशक पुराने जर्जर पुल को अब हमेशा के लिए हटाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। समय की मार से कमजोर हो चुके इस पुल को लेकर लंबे समय से स्थानीय लोगों में भय बना हुआ था। पुल की बदहाल स्थिति को देखते हुए ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने इसके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। प्राधिकरण ने इस संबंध में सिंचाई विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि यदि विभाग की ओर से शीघ्र कदम नहीं उठाए गए तो जनहित और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्राधिकरण स्वयं पुल को गिराने की कार्रवाई करेगा।
आज भले ही हिंडन नदी पर आधुनिक पुल से यातायात सुचारु रूप से संचालित हो रहा हो, लेकिन एक समय ऐसा था जब डीएससी मार्ग पर स्थित यही पुल नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के बीच आवागमन का एकमात्र माध्यम था। शुरुआती वर्षों में दोनों शहरों के बीच संपर्क का पूरा भार इसी पुल पर निर्भर था।
साल 1993 के आसपास इस पुल का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर हिंडन नदी में गिर गया था। इसके बाद इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पुल टूटने के बाद नया पुल बनने तक का समय लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था। यात्रियों को बसों से पुल के एक छोर तक लाया जाता था। वहां से वे पैदल टूटे हुए हिस्से को पार कर दूसरी ओर खड़ी बसों में बैठकर अपनी यात्रा पूरी करते थे। इसी व्यवस्था के सहारे लगभग डेढ़ वर्ष तक लोगों ने आवागमन किया।
बाद में पुराने पुल के समानांतर नए पुल का निर्माण कराया गया, जिसके चालू होने के बाद यातायात सामान्य हो सका और लोगों को वर्षों की परेशानी से राहत मिली।
नए पुल के निर्माण के बाद पुराने पुल की मरम्मत तो कराई गई, लेकिन उसे वाहनों के लिए उपयोग में नहीं लाया गया। समय के साथ यह पुल केवल पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के उपयोग तक सीमित रह गया।
अब स्थिति यह है कि पुल के पिलर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कई स्थानों पर कंक्रीट टूटकर नीचे गिर चुकी है और ढांचा लगभग हवा में झूलता हुआ प्रतीत होता है। इसके बावजूद लोग इस पुल से गुजरते हैं, कुछ लोग यहां खड़े होकर सेल्फी भी लेते हैं। पुल के नीचे स्थानीय बच्चे खेलते हुए भी अक्सर देखे जाते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि पुल की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उनका मानना है कि यदि यह ढांचा अचानक ढह गया तो इसकी चपेट में आने वाले पैदल यात्री, साइकिल सवार अथवा पुल के नीचे खेल रहे बच्चे गंभीर दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। लंबे समय से स्थानीय नागरिक प्रशासन से इस जर्जर पुल को हटाने की मांग करते रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी ने बताया कि जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से सिंचाई विभाग को पत्र भेजकर पुल के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सिंचाई विभाग की ओर से इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जाती या अनावश्यक विलंब होता है, तो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण स्वयं पहल करते हुए इस जर्जर पुल को गिराने की कार्रवाई करेगा, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित जनहानि से बचा जा सके।





