जलभराव पर नोएडा प्राधिकरण का बड़ा एक्शन: जेई बर्खास्त, सुपरवाइजर की सेवा समाप्त, ठेकेदार पर 5 लाख रूपये जुर्माना

Panchayat 24 (नोएडा) : बरसात के दौरान ग्राम बरौला में लगातार बनी हुई जलभराव की समस्या ने आखिरकार प्राधिकरण प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश ने जल निकासी व्यवस्था में गंभीर लापरवाही और विकास कार्यों में शिथिलता पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और कार्यदायी संस्था के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि जनसुविधाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जलभराव जैसी समस्याएं केवल नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं। इसी कारण दोषियों के विरुद्ध बिना किसी विलंब के कार्रवाई की गई है।
समीक्षा के बाद जारी आदेशों के अनुसार, जूनियर इंजीनियर (जेई) पार्थ राठौड़ तथा सुपरवाइजर मांगेराम की सेवाएं ड्यूटी में घोर लापरवाही और कार्य में शिथिलता के कारण तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। वहीं प्रबंधक करण सिंह त्यागी (सिविल) और प्रबंधक रमेन्द्र (जल एवं सीवर) को जलभराव की स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित न कर पाने के कारण प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।
यही नहीं, संबंधित कार्यदायी संस्था मैसर्स वर्म इंडिया पर कार्य में लापरवाही के चलते 5 लाख रूपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। साथ ही संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उसे कार्य में शिथिलता और लापरवाही के आधार पर ब्लैकलिस्ट क्यों न किया जाए।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने प्राधिकरण के सभी वर्क सर्किलों के अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी क्षेत्र में जलभराव अथवा अन्य मूलभूत नागरिक समस्याओं के समाधान में देरी या लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध इससे भी अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण प्रशासन ने दोहराया कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता शहरवासियों को जलभराव से राहत दिलाना, जल निकासी व्यवस्था को प्रभावी बनाना तथा विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। अधिकारियों का मानना है कि जवाबदेही तय किए बिना नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं है। इसी उद्देश्य के तहत जवाबदेह प्रशासन की नीति पर अमल करते हुए यह कार्रवाई की गई है।





