दादरी विधानसभा

परम्पराओं को नया अर्थ देती ‘ग्रीन दादरी, क्लीन दादरी’ की पहल

Panchayat 24 (डॉ देवेंद्र कुमार शर्मा) : रीति-रिवाज और परम्पराएं केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले संस्कार भी हैं। उनका मूल उद्देश्य सदैव मानव कल्याण और सामाजिक हित रहा है। समय की गति के साथ कुछ परम्पराओं की उपयोगिता भले ही क्षीण हुई हो, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि परम्परा का विचार ही अप्रासंगिक हो गया। आवश्यकता है तो बस इतनी कि समय की मांग के अनुरूप नई, उपयोगी और कल्याणकारी परम्पराओं का सृजन हो।

इसी दृष्टि से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जनजीवन का संस्कार बनाने की पहल उल्लेखनीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान से लेकर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों तक, सार्वजनिक जीवन में ऐसे प्रयोग सामने आए हैं जो किसी सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़कर सामाजिक संकल्प का स्वरूप ग्रहण कर सकते हैं। यदि स्वच्छता को आदत और पौधरोपण को संस्कार बना दिया जाए, तो इसका लाभ केवल प्रकृति को नहीं, आने वाली पीढ़ियों को भी मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा गौतम बुद्ध नगर में शुरू किया गया ‘ग्रीन दादरी, क्लीन दादरी’ अभियान इसी विचार को स्थानीय धरातल पर आगे बढ़ाता दिखाई देता है। दादरी विधानसभा में अभियान का शुभारंभ बिसरख से वृक्षारोपण और स्वच्छता के सेवा-संकल्प के साथ हुआ।

भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा के नेतृत्व में बारात घर और शिव मंदिर परिसर में पौधरोपण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहकर उनके संरक्षण का भी आह्वान किया। यही बात इस पहल को महज औपचारिक वृक्षारोपण से आगे ले जाती है—क्योंकि पौधा लगाना एक क्षण का कार्य है, उसे वृक्ष बनाना वर्षों का दायित्व।

जिला पंचायत सदस्य एवं पूर्व भाजपा जिला उपाध्यक्ष देवा भाटी ने आगामी दिनों में विभिन्न स्थानों पर होने वाले स्वच्छता एवं वृक्षारोपण कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष लोकेश त्यागी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख अमरीश भाटी, अरुण यादव, अंकित भाटी, रोहित भाटी, डॉ. सुरेंद्र बैसला, विपिन भाटी, शिवम शर्मा, निशांत तोंगड़ सहित पार्टी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

दरअसल, किसी अभियान की वास्तविक सफलता उसके उद्घाटन में नहीं, उसके निरंतर संस्कार बनने में है। जिस दिन जन्मदिवस, पर्व या किसी शुभ अवसर पर पौधा लगाना और सार्वजनिक स्थल को स्वच्छ रखना हमारे सामाजिक व्यवहार का स्वाभाविक हिस्सा बन जाएगा, उस दिन पर्यावरण संरक्षण किसी अभियान का विषय नहीं, जीवन-पद्धति का हिस्सा होगा।

‘ग्रीन दादरी, क्लीन दादरी’ की पहल को इसी व्यापक अर्थ में देखा जाना चाहिए—पुरानी परम्पराओं का सम्मान करते हुए ऐसी नई परम्पराओं को जन्म देना, जिनमें प्रकृति भी बचे, समाज भी संवरे और आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन थोड़ा अधिक स्वच्छ, हरा-भरा और सुरक्षित हो। बहरहाल, प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर इसकी शुरुआत जरूर है। देखना दिलचस्प होगा की समय बीतने पर भाजपा के नेता और कार्यकर्ता अपने निजी जीवन में इस विचार को कितना अपनाएंगे? अपने और अपने बच्चों के जन्मदिवस के अवसर पर भारी भरकाम खर्च के बजाए सादगीपूर्ण ग्रीन सोसायटी, क्लीन सोसायटी के विचार को अपनाएंगे?

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