“शिक्षा केवल डिग्री नहीं, राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा माध्यम है” : एमएलसी श्रीचंद शर्मा

प्रश्न : आपके पहले कार्यकाल की प्रमुख प्राथमिकताएँ क्या थीं? क्या वे पूरी हो चुकी हैं और अगले कार्यकाल का एजेंडा क्या होगा?
उत्तर : जब भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार शिक्षक एमएलसी का चुनाव लड़ने का निर्णय लिया और मुझे दायित्व दिया, तभी से मेरी प्राथमिकता स्पष्ट रही—शिक्षार्थी, शिक्षक और शिक्षा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति लागू हुई, कोरोना काल में शिक्षा व्यवस्था को संभाला गया तथा शिक्षकों के हित में अनेक निर्णय लिए गए।
हमारे प्रयासों से वित्तविहीन शिक्षकों, एडेड और प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों सहित उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा का मार्ग प्रशस्त हुआ। शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी इसका लाभ मिले, इसके लिए लगातार प्रयास किए गए। मानदेय संबंधी समस्याओं के समाधान की दिशा में भी कार्य हुआ। साथ ही पाठ्यक्रम में भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को स्थान दिलाने का प्रयास किया गया।
प्रश्न : अगले कार्यकाल में आपकी प्रमुख प्राथमिकताएँ क्या होंगी?
उत्तर : हमारा प्रयास रहेगा कि सीबीएसई और आईसीएसई विद्यालयों के शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिले। इस संबंध में मुख्यमंत्री को प्रस्ताव दिया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त सीमित क्षेत्र में संचालित होने वाली स्कूल बसों को परमिट व्यवस्था से मुक्त कराने, विद्यालयों में किसी घटना की स्थिति में बिना निष्पक्ष जांच के शिक्षक, प्रधानाचार्य या प्रबंधक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज न होने, वित्तविहीन शिक्षकों के अनुभव को शिक्षक भर्ती में मान्यता दिलाने तथा गुमनाम शिकायतों के आधार पर शिक्षकों के अनावश्यक उत्पीड़न को रोकने के लिए सरकार के समक्ष ठोस पहल की गई है।
प्रश्न : उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
उत्तर : सबसे बड़ी आवश्यकता विद्यालयों के आधारभूत ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को और मजबूत करने की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कायाकल्प योजना के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों में शौचालय, फर्नीचर, कंप्यूटर, प्रयोगशालाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं। अब माध्यमिक विद्यालयों के पुराने और जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण के लिए अलंकार योजना के माध्यम से बड़ा बजट उपलब्ध कराया गया है।
प्रश्न : नई शिक्षा नीति को आप किस दृष्टि से देखते हैं?
उत्तर : नई शिक्षा नीति शिक्षा को रोजगार, कौशल और तकनीक से जोड़ती है। इसका उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना है। विद्यालयों में अटल प्रयोगशालाएं, डिजिटल संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और कौशल आधारित शिक्षा पर तेजी से काम हो रहा है।
प्रश्न : क्या इसके क्रियान्वयन में कोई चुनौती भी है?
उत्तर : सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त आधारभूत संरचना और प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य कर रही है।
प्रश्न : सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या प्रयास हुए हैं?
उत्तर : शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया है। चयन आयोग के माध्यम से योग्य शिक्षकों की नियुक्ति हो रही है। सरकार अब तक 1.65 लाख से अधिक प्राथमिक शिक्षक, 35 हजार से अधिक माध्यमिक शिक्षक, 5 हजार से अधिक राजकीय शिक्षक तथा 500 से अधिक प्रधानाचार्यों की नियुक्ति कर चुकी है। एडेड कॉलेजों के शिक्षकों को पदोन्नति के साथ प्रोफेसर लिखने और पीएचडी गाइड बनने का अधिकार भी दिया गया है।
प्रश्न : शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बढ़ता बोझ क्या चिंता का विषय है?
उत्तर : शिक्षक हमेशा सबसे विश्वसनीय माने जाते हैं, इसलिए चुनाव सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां उन्हें दी जाती हैं। फिर भी हमारा प्रयास रहेगा कि शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ न्यूनतम हो, ताकि वे शिक्षा पर अधिक ध्यान दे सकें।
प्रश्न : शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और संविदा कर्मियों के लिए क्या प्रयास हुए?
उत्तर : इन वर्गों के लिए न्यूनतम सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार प्रयासरत है। उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आयोग का गठन किया गया है और उन्हें भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
प्रश्न : स्थानांतरण और सेवा संबंधी समस्याओं पर क्या सुधार हुए?
उत्तर : स्थानांतरण नीति को पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है। अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है तथा अनावश्यक औपचारिकताओं को कम किया गया है, जिससे पात्र शिक्षकों का स्थानांतरण अधिक सहज हो सके।
प्रश्न : नई पेंशन योजना को लेकर आपका क्या दृष्टिकोण है?
उत्तर : वर्ष 2017 से पहले नई पेंशन योजना के क्रियान्वयन में गंभीर कमियां रहीं। भाजपा सरकार बनने के बाद शिक्षकों के खातों में लंबित अंशदान जमा कराया गया और सरकारी योगदान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया गया। हमारा प्रयास है कि नई पेंशन व्यवस्था और अधिक मजबूत तथा लाभकारी बने।
प्रश्न : तकनीकी शिक्षा और डिजिटल दक्षता को लेकर सरकार क्या कर रही है?
उत्तर : आईटीआई और प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है। उद्योगों और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से विद्यालयों में तकनीकी एवं कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ रोजगारोन्मुख दक्षता भी प्राप्त कर सकें।
प्रश्न : ग्रामीण और शहरी विद्यालयों के बीच की दूरी कैसे कम होगी?
उत्तर : सड़क, बिजली, इंटरनेट, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से गांवों की तस्वीर बदली है। मजबूत आधारभूत ढांचे का सीधा लाभ शिक्षा को भी मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों के विद्यार्थियों को भी वही अवसर मिलें जो शहरों में उपलब्ध हैं।
प्रश्न : नकल और पेपर लीक पर आपका दृष्टिकोण?
उत्तर : नकल और पेपर लीक मेहनती विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। भाजपा सरकार की नीति इस विषय पर जीरो टॉलरेंस की रही है। उत्तर प्रदेश में पहले भी नकल विरोधी कानून लागू किया गया और अब पेपर लीक रोकने के लिए भी कठोर कानूनी व्यवस्था बनाई गई है। हमारा विश्वास केवल योग्यता आधारित चयन में है।
प्रश्न : परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों के मानसिक दबाव को कैसे कम किया जाए?
उत्तर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पर चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाया है। विद्यालयों में भी शिक्षकों को विद्यार्थियों की नियमित काउंसलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रश्न : रोजगारपरक शिक्षा को लेकर क्या पहल हुई है?
उत्तर : नई शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा छह से ही कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा का समावेश किया गया है, ताकि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ किसी न किसी कौशल में दक्ष बन सकें।
प्रश्न : शिक्षा के राजनीतिकरण के आरोपों पर आपका क्या कहना है?
उत्तर : हर सरकार अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार परिवर्तन करती है। हमारा मानना है कि विद्यार्थियों को भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा, संस्कृति और विरासत से परिचित कराना आवश्यक है। यदि भारत अपनी उपलब्धियों और ज्ञान परंपरा का सम्मान करेगा, तभी नई पीढ़ी आत्मगौरव के साथ आगे बढ़ सकेगी।
प्रश्न : सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच की खाई कैसे कम होगी? प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने के पीछे सरकार की क्या नीति है?
उत्तर : सरकार का उद्देश्य किसी विद्यालय को बंद करना नहीं, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है। जहां छात्र संख्या बहुत कम है, वहां विद्यालयों का समायोजन किया गया है ताकि विद्यार्थियों को पर्याप्त शिक्षक मिल सकें। खाली भवनों का उपयोग बालवाड़ी जैसे शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
प्रश्न : आपने शिक्षक राजनीति ही क्यों चुनी?
उत्तर : मेरा जीवन शिक्षा और समाज सेवा से जुड़ा रहा है। मेरा विश्वास है कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि मैं शिक्षकों और विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने में सफल हुआ, तो अपने जीवन को सार्थक मानूंगा।
प्रश्न : आपके विरोधियों का आरोप है कि आपका झुकाव निजी विद्यालयों के शिक्षकों की ओर अधिक रहा है।
उत्तर : यह धारणा सही नहीं है। मेरे लिए सरकारी, एडेड, वित्तविहीन, सीबीएसई, आईसीएसई, शिक्षामित्र, अनुदेशक—सभी शिक्षक समान हैं। मैंने हर वर्ग की समस्याओं को उठाया है और उनके समाधान का प्रयास किया है। शिक्षक चाहे किसी भी व्यवस्था का हो, उसका सम्मान और हित हमारी प्राथमिकता है।
प्रश्न : यदि शिक्षक आपके पहले कार्यकाल का मूल्यांकन करें तो किस आधार पर करें?
उत्तर : मेरा आग्रह केवल इतना है कि शिक्षक यह देखें कि क्या मैं उनके सुख-दुख में उनके साथ खड़ा रहा, क्या उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया और समाधान का प्रयास किया। यदि उन्हें लगे कि मैंने एक प्रतिनिधि नहीं बल्कि एक सेवक की भूमिका निभाई है, तो वही मेरे कार्यकाल का सबसे बड़ा मूल्यांकन होगा।




