गाज़ियाबाद

173वीं बोर्ड बैठक में दिखी भविष्य के गाजियाबाद की तस्वीर : हरनंदीपुरम, एयरोसिटी और एलिवेटेड ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे कई अहम प्रस्तावों को मिली मंजूरी

Panchayat 24 (गाजियाबाद) : गाजियाबाद के सुनियोजित, सुरक्षित और आधुनिक विस्तार की दिशा में शुक्रवार को विकास की एक नई रूपरेखा सामने आई। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की 173वीं बोर्ड बैठक में शहर के वर्तमान यातायात संकट से लेकर भविष्य की आवासीय जरूरतों, एयरोसिटी और हरनंदीपुरम जैसे बड़े विकास क्षेत्रों, बाढ़ सुरक्षा तथा निजी निवेश आधारित टाउनशिप परियोजनाओं तक से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।

मेरठ मंडलायुक्त एवं जीडीए बोर्ड के अध्यक्ष भानु चंद्र गोस्वामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए फैसलों से संकेत मिलता है कि गाजियाबाद का अगला शहरी विस्तार अब बिखरे विकास के बजाय नियोजित और बहुआयामी ढांचे पर केंद्रित होगा।

घंटाघर से भाटिया मोड़ तक बनेगा चार लेन एलिवेटेड कॉरिडोर

शहर की यातायात व्यवस्था में सबसे अहम फैसलों में जीटी रोड पर घंटाघर रामलीला मैदान के सामने से चौधरी मोड़ होते हुए भाटिया मोड़ आधार सेवा केंद्र तक करीब दो किलोमीटर लंबे चार लेन एलिवेटेड ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को मंजूरी देना रहा।

यह परियोजना पुराने और अत्यधिक व्यस्त शहरी हिस्से में यातायात का दबाव घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एलिवेटेड मार्ग बनने से मुख्य यातायात को अपेक्षाकृत निर्बाध आवागमन मिल सकेगा। इससे जाम, यात्रा समय, ईंधन खपत और वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी की उम्मीद है।

परियोजना को अर्बन चैलेंज फंड के तहत वित्तपोषित करने की दिशा में भी बोर्ड ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया। परियोजना लागत के 50 प्रतिशत हिस्से को बैंक योग्य बनाने के लिए ऋण लेने की सैद्धांतिक स्वीकृति के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी के लिए आईआईटी रुड़की से डिजाइन, निर्माण एवं परीक्षण तथा स्वतंत्र थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। निर्माण कार्य ईपीसी मोड में कराया जाएगा।

हरनंदीपुरम और एयरोसिटी को बाढ़ से बचाने की तैयारी

भविष्य के गाजियाबाद के सबसे बड़े नियोजित विकास क्षेत्रों में शामिल हरनंदीपुरम, प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और एयरोसिटी को बाढ़ के खतरे से सुरक्षित रखने के लिए हिंडन नदी के दाहिने तट पर बंधा निर्माण प्रस्ताव भी मंजूर हुआ।

यह बंधा इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए सुरक्षा कवच की भूमिका निभाएगा। इसका उद्देश्य बाढ़ और जलभराव के जोखिम को नियंत्रित करते हुए नए शहरी क्षेत्रों के लिए टिकाऊ आधारभूत संरचना तैयार करना है।

541 हेक्टेयर में आकार लेगी एयरोसिटी की परिकल्पना

प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के आसपास मोरटी, अटौर और मेवला अगरी गांवों की भूमि पर एयरोसिटी विकसित करने की दिशा में भी बोर्ड ने निर्णायक कदम उठाया। करीब 541 हेक्टेयर भूमि जुटाने के लिए भूमि पूलिंग, आपसी सहमति अथवा अधिग्रहण के विकल्पों से संबंधित प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियों को मंजूरी दी गई।

एयरोसिटी के विकसित होने पर क्षेत्र में आवासीय और वाणिज्यिक गतिविधियों के साथ होटल, परिवहन, सेवा, मनोरंजन और अन्य आर्थिक गतिविधियों का विस्तार संभव होगा। इससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

501 हेक्टेयर की हरनंदीपुरम योजना को मिली गति

गाजियाबाद की महत्वाकांक्षी हरनंदीपुरम आवासीय योजना का प्रस्तावित क्षेत्रफल करीब 501.2173 हेक्टेयर है। योजना के प्रथम चरण के तलपट मानचित्र की कार्यवाही के लिए अधिग्रहित 47.1612 हेक्टेयर भूमि में से 24.1213 हेक्टेयर के भू-उपयोग को कृषि से आवासीय किए जाने के प्रस्ताव को बोर्ड ने मंजूरी दी।

इस फैसले से नियोजित आवासीय क्षेत्र के विकास का रास्ता साफ होगा। यहां आवासीय भूखंडों के साथ सड़क, हरित क्षेत्र, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य शहरी आधारभूत सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है। इससे शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने और भविष्य की आवासीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

निजी निवेश वाली टाउनशिप परियोजनाओं को भी बढ़ावा

शाहपुर बम्हैटा में उत्तर प्रदेश टाउनशिप नीति-2023 के तहत निजी निवेश से विकसित हो रही परियोजना को भी बोर्ड की मंजूरी मिली। मैसर्स यू.एच. रियल्कॉन प्रा. लि. की करीब 80.7424 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित टाउनशिप में कंसोर्टियम/लैंड पूलिंग से प्राप्त 54.6520 एकड़ भूमि के भू-उपयोग को कृषि से आवासीय किए जाने को स्वीकृति दी गई।

करीब 78.77 एकड़ भूमि पर टाउनशिप विकास के लिए डीपीआर और तलपट मानचित्र से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। इससे क्षेत्र में सड़क, बिजली, जलापूर्ति, जल निकासी और सामुदायिक सुविधाओं के साथ नियोजित आवासीय विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

इसी क्रम में सागा क्रेसेंट पार्क इंटीग्रेटेड टाउनशिप और पार्क टाउन इंटीग्रेटेड टाउनशिप की परियोजना अवधि बढ़ाने के प्रस्तावों को भी स्वीकृति मिली, ताकि निर्धारित शर्तों के तहत लंबित विकास कार्य पूरे किए जा सकें।

इंदिरापुरम और राजनगर में भू-उपयोग में बदलाव

राजनगर योजना के सेक्टर-5 में करीब 3815.65 वर्गमीटर प्राथमिक विद्यालय भूखंड के भू-उपयोग को सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक से आवासीय—न्यून घनत्व में बदलने का प्रस्ताव मंजूर हुआ।

इंदिरापुरम में भी दो महत्वपूर्ण भू-उपयोग परिवर्तन किए गए। शक्ति खंड-4 में 5965.29 वर्गमीटर होटल भूखंड को आवासीय ग्रुप हाउसिंग में बदलने तथा शक्ति खंड-2 में 6959.586 वर्गमीटर व्यावसायिक भूखंड को ग्रुप हाउसिंग में परिवर्तित करने को मंजूरी दी गई। इन फैसलों से उपलब्ध भूमि का आवासीय जरूरतों के अनुरूप उपयोग बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

हापुड़ में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का रास्ता साफ

जीडीए क्षेत्र से जुड़े हापुड़ के ग्राम हसनपुर लोधा, तहसील धौलाना में करीब 13.1568 हेक्टेयर भूमि के भू-उपयोग को कृषि से औद्योगिक किए जाने के प्रस्ताव को भी बोर्ड ने मंजूरी दी। इससे औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

न्यायालयीय मामलों और हाईटेक टाउनशिप की भी समीक्षा

बैठक में सुशांत एक्वापोलिस से जुड़े प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में प्राप्त प्रत्यावेदन के निस्तारण का प्रस्ताव मंजूर किया गया। वहीं फिजेंट इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आवश्यक नियोजन कार्यवाही पर भी निर्णय लिया गया।

इसके अतिरिक्त गाजियाबाद की विभिन्न हाईटेक टाउनशिप परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए लंबित विकास कार्यों को स्वीकृत डीपीआर और निर्धारित मानकों के अनुरूप समयबद्ध ढंग से पूरा कराने पर जोर दिया गया।

पुराने फैसलों के अनुपालन की भी पड़ताल

बोर्ड ने 14 मई 2026 को हुई 172वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि के साथ पूर्व में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की स्थिति की भी समीक्षा की। संदेश स्पष्ट रहा कि बोर्ड के फैसले महज कागजी प्रक्रिया न बनें, बल्कि उनका धरातल पर समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित हो।

फैसलों में दिखा अगले कई दशकों का रोडमैप

173वीं बोर्ड बैठक के फैसलों को समग्र रूप से देखें तो गाजियाबाद के विकास का फोकस अब केवल नई कॉलोनियां बसाने तक सीमित नहीं है। यातायात, आवास, बाढ़ सुरक्षा, टाउनशिप, औद्योगिक निवेश, वाणिज्यिक गतिविधियों और आधुनिक शहरी सुविधाओं को एक ही विकास-श्रृंखला में जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।

एक ओर घंटाघर से भाटिया मोड़ तक एलिवेटेड कॉरिडोर पुराने शहर की यातायात समस्या का समाधान तलाशता है, तो दूसरी ओर हरनंदीपुरम और एयरोसिटी जैसे नए क्षेत्रों के लिए भूमि, आवास, परिवहन और बाढ़ सुरक्षा का आधार तैयार किया जा रहा है। निजी निवेश आधारित टाउनशिप और औद्योगिक भू-उपयोग में बदलाव इस विकास मॉडल को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ते हैं।

ऐसे में 173वीं बोर्ड बैठक को गाजियाबाद के भविष्य के शहरी स्वरूप की आधारशिला मजबूत करने वाली बैठक माना जा सकता है। यदि स्वीकृत परियोजनाओं का क्रियान्वयन तय समय, गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ होता है तो आने वाले वर्षों में गाजियाबाद को अधिक सुगम यातायात, बेहतर आवासीय विकल्प, सुरक्षित शहरी क्षेत्र, आधुनिक आधारभूत सुविधाओं और निवेश आधारित अर्थव्यवस्था वाला शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त मिल सकती है।

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