माता-पिता की स्मृति को समाज की प्रेरणा बनाने का अनुकरणीय प्रयास, समाधि स्थल और प्रतिमाओं का हुआ लोकार्पण

माता-पिता का ऋण जीवनभर नहीं चुकाया जा सकता, उनकी सेवा और सम्मान ही सच्ची श्रद्धांजलि : नरेश टिकैत
Panchayat 24 (गाजियाबाद) : मोदीनगर तहसील के ग्राम रौरी में शनिवार को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और मातृ-पितृ भक्ति का एक भावनात्मक एवं प्रेरणादायी अध्याय उस समय साकार हुआ, जब समाजसेवी, चैयरमैन इंडस्ट्री ग्रेटर नोएडा एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्राह्मण महापंचायत सहदेव शर्मा ने अपने दिवंगत माता-पिता स्व. दीपचंद शर्मा (पूर्व सरपंच एवं प्रधान, ग्राम रोरी) तथा स्व. सावित्री देवी की स्मृति में निर्मित भव्य समाधि स्थल, आश्रम और प्रतिमाओं का लोकार्पण कराया।
इस अवसर पर देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए इस पहल को भारतीय पारिवारिक परंपराओं और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाला प्रेरणास्रोत बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि माता-पिता का ऋण (श्रेय) ऐसा सागर है, जिसकी गहराई को कोई संतान कभी पूरी तरह माप नहीं सकती। उनके उपकारों का प्रतिदान संभव नहीं, लेकिन सम्मान, सेवा और स्मरण के माध्यम से उनके प्रति कृतज्ञता अवश्य व्यक्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सहदेव शर्मा ने अपने माता-पिता की स्मृतियों को केवल निजी भावनाओं तक सीमित न रखकर उन्हें समाज के लिए प्रेरणा के एक विशाल संस्कार-सागर में परिवर्तित कर दिया है।
नरेश टिकैत ने कहा कि आज जब आधुनिक जीवनशैली के कारण पारिवारिक मूल्य चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं, तब इस प्रकार की पहल युवाओं को अपने माता-पिता के प्रति सम्मान, समर्पण और जिम्मेदारी का संदेश देने का कार्य करेगी। यह आयोजन समाज को यह सोचने के लिए भी प्रेरित करता है कि जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने माता-पिता के संस्कारों को जीवित रखना है।
कार्यक्रम में सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, विधायक डॉ. मंजू शिवाच, विधायक बलराम डांगी, सांसद रघुवीर सिंह, गौरीशंकर धाम के शिवम साधक सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि माता-पिता का सम्मान भारतीय संस्कृति का मूल आधार है और सहदेव शर्मा की यह पहल सामाजिक चेतना का एक प्रेरणादायी उदाहरण है।
अपने संबोधन में सहदेव शर्मा ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें सेवा, संघर्ष, ईमानदारी और समाज के प्रति समर्पण का जो अमूल्य संस्कार दिया, वही उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने दूर-दराज से पहुंचे अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्मारक केवल उनके माता-पिता की स्मृति का प्रतीक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का एक विनम्र प्रयास है।
कार्यक्रम का संचालन नानक चंद शर्मा ने किया, जबकि आयोजन को सफल बनाने में चौधरी रामकुमार सिंह (प्रदेश उपाध्यक्ष, भाकियू), विजेंद्र सिंह (जिला अध्यक्ष) और अक्षय कुमार सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर सैकड़ों गणमान्य नागरिक और हजारों लोग उपस्थित रहे।
ग्राम रौरी का यह आयोजन केवल प्रतिमाओं और समाधि स्थल के लोकार्पण का समारोह नहीं रहा, बल्कि यह संदेश देकर समाप्त हुआ कि माता-पिता का प्रेम और उनके संस्कार एक ऐसे अमृत-सागर हैं, जिनकी स्मृतियां पीढ़ियों तक समाज को दिशा और प्रेरणा देती रहती हैं।





