गुनाहों की सजा : परिवार के सामुहिक नरसंहार के दोषी को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा
Punishment for crimes: The court sentenced the guilty of massacre of the family to death
Panchayat24 : गाजियाबाद में 21 मई 2013 को एक परिवार के हुए सामुहिक नरसंहार में सोमवार को कोर्ट ने हत्यारोपी को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने एक लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया है। आरोपी ने निर्मम तरीके से चाकू से एक ही परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी थी। वह परिवार के घर ड्राइवर की नौकरी करता था। हत्यारोपी पिछले 9 सालों से गाजियाबाद स्थित डासना जेल में बंद था। जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चन्द्र शर्मा ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में अगस्त 2013 में 40 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। इसी साल नवम्बर में केस कोर्ट में ट्रायल पर शुरू हो गया। भियोजन पक्ष ने कुल 28 गवाह पेश किए। मामले में बहस पूरी होने के बाद एडीजे-19 कोर्ट ने 30 जुलाई को राहुल को सामुहिक हत्याकांड का एकमात्र दोषी मानते हुए 1 अगस्त को फांसी की सजा सुनाई है।
क्या है पूरा मामला ?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गाजियाबाद स्थित घंटाघर कोतवाली क्षेत्र के नईबस्ती में सतीश चन्द्र गोयल परिवार सहित रहते थे। उनका गाजियाबाद में खल एवं चूरी का कारोबार था। वह प्रॉपर्टी का कारोबार भी करते थे। घर में उनके अतिरिक्त पत्नी मंजू गोयल, पुत्र सचिन गोयल, बहू रेखा, पौत्र अमन, हनी और पौत्री मेघा थी। सतीश चन्द्र गोयल को किडनी की समस्या थी। 22 मई 2013 को उनकी किडनी ट्रांसप्लांट होनी थी। ऑपरेशन के लिए घर पर 25-30 लाख रूपये रखे हुए थे। इसकी जानकारी उनके पास ड्राइवर की नौकरी करने वाले राहुल वर्मा को पता था। राहुल वर्मा ने खतरनाक साजिश रची। वह 21 मई की रात लूट के इरादे से छत के रास्ते सतीश चन्द्र गोयल के घर में प्रवेश किया। लूट की घटना को अंजाम देने से पूर्व घर के लोग जाग गए। राहुल ने पकड़े जाने के भय से धारदार हथियार से एक एक कर सतीश चंद गोयल, पत्नी मंजू गोयल, पुत्र सचिन गोयल, बहू रेखा, पौत्र अमन, हनी और पौत्री मेघा सहित परिवार के सभी सात सदस्यों पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया और मौके से फरार हो गया। घटना की सबसे पहले खबर एक कम्पाउंडर को लगी जो सतीश चन्द्र गोयल को इंजेक्शन देने 22 मई की सुबह घर पर पहुंचा। उसने ही आस पड़ोस के लोगों को वारदात की जानकारी दी। सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
घर में चोरी करने पर राहुल को नौकरी से निकाला गया था
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चन्द्र शर्मा ने बताया कि एक परिवार के सामुहिक हत्याकांड को अंजाम दिए जाने के बाद शक की बुनियाद पर परिवार के चालक राहुल वर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। सतीश चन्द्र गोयल के दामाद सचिन ने को राहुल पर शक था। दरअसल, राहुल पूर्व में भी सतीश चन्द्र गोयल के घर से 4 लाख रूपये चोरी किए थे। इसके बाद राहुल को नौकरी से निकाल दिया गया था। राहुल पर पुलिस का शक उस वक्त और गहरा गया जब घटना के बाद से ही राहुल फरार था और उसका मोबाइल भी नहीं लग रहा था।
राहुल साजिश में अपने दोस्त प्रशांत को भी शामिल करना चाहता था
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राहुल इस हत्याकांड़ में अपने दोस्त प्रशांत को भी शामिल करना चाहता था। उसने प्रशांत को बड़ी रकम का लालच भी दिया था। उसने प्रशांत को अपनी सारी साजिश के बारे में बता दिया। लेकिन घटना से ठीक पहले प्रशांत ने साजिश में शामिल होने से इंकार कर दिया। लेकिन राहुल पर बड़ी रकम हाथ लगने का भूत सवार था। वह किसी भी कीमत पर वारदात को अंजाम देने की ठान चुका था। घटना के बाद दोस्त प्रशांत की गवाही उसे उसके गुनाहों की सजा दिलाने में अहम साबित हुई। दरअसल, राहुल घटना के बाद सरकारी गवाह बन गया था। घटनास्थल से पुलिस के हाथ लगे राहुल के फुट प्रिंट और सिगरेट पर लगी लार एवं परिवार के सभी सदस्यों के शरीर पर बने चाकू के घाव का साइज भी एक समान था। पुलिस ने डासना गेट स्थित उस दुकानदार के बयान भी दर्ज कराए जिससे राहुल ने चाकू 80 रूपये में खरीदा था।





