यमुना प्राधिकरण

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रूप में जेवर क्षेत्र ने अंगीकार किया नया जेवर, पुराना बन जाएगा अतीत

Panchayat 24 (यीड़ा) : गौतम बुद्ध नगर का जेवर नगर जावाल ऋषि की जन्मदिन और तपोस्थली है। बताया जाता है इन्हीं के नाम पर नगर का नाम जेवर पड़ा है। जेवर क्षेत्र की  भूमि बेहद उपजाऊ और पैदावार देने वाली जमीन रही है। कृषि ही इस क्षेत्र की असल सम्पदा रही है। इस भूमि पर लहलाहती फसलें किसी सुशोभित करने वाले आभूषणों जैसी प्रतीत होती है। वास्तव में यही इस क्षेत्र का सदा से सच्चा जेवर रहा है।

बदले वक़्त के साथ औद्योगिक विकास में बड़ी बड़ी औद्योगिक इकाईयों का विस्तार अब तेजी से इस क्षेत्र की पहचान बन रही है। नोएडा इंटरनेसहना एयरपोर्ट इस दिशा में शीर्ष पर खड़ा है। 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद हैं। आयोजन को भव्य बनाने में शासन और प्रशासन एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। बतौर पत्रकार आयोजन स्थल पर चल रही तैयारियों का स्थालीय जायजा लेने के लिए अपने दो पत्रकार साथियों के साथ वहाँ पंहुचा।

इस बार एयरपोर्ट पहुँचने के लिए आसपास के गांव से होकर गुजरे तो उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर माहौल को भी जाँचने का अवसर मिला। मुख्य रास्ता भटककर दयानतपुर गांव में पंहुँचे तो एक स्थानीय बुजुर्ग से रास्ता पूछा। बुजुर्ग ने रास्ता बताते हुए संशय भरी नजरों से देखते हुए कहा कि वहाँ बिना अनुमति के प्रवेश संभव नहीं है। शायद वह पूर्व में अनुभव कर चुके थे कि सुरक्षा के चलते एयरपोर्ट साइट पर जाना आसान नहीं है।

हालांकि उद्घाटन समारोह को लेकर उनके मन में कोई उत्साह नहीं दिखा। फिर हम किशोरपुर होते हुए एयरपोर्ट साइट पर पहुंचे जहां भव्य टेंट लगाया हुआ था। आयोजन के लिए तेजी से तैयारियां चल रही है। उद्घाटन समरोह में एक लाख से अधिक लोगों के उपस्थित होने का दावा किया जा रहा है। यहां 66 ब्लॉक वाला टेंट लगाया जा रहा है। एक मुख्य मंच के साथ दो छोटे मंच बनाए गए है। सभास्थल पर पहुँचने के लिए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे पूरी तरह तैयार है।

इसके अतिरिक्त एयरपोर्ट तक पहुँचने वाले सभी मार्गों की दशा को दुरुस्त किया जा रहा है। इस बीच प्राधिकरण की टीमें गांवों और नहरों की क्षतिग्रस्त सड़कों और पटरियों पर भी काली तारकॉल वाली सड़कें बनाई जा रही है। इस बीच एयरपोर्ट साईट की बाउंड्री से सटी हुई गेहूं की फ़सल गिरी हुई थी। देखकर पता चल रहा था कि पूर्व में हुई बारिश और तेज हवा और आंधी के कारण फ़सल की यह हालत हुई है।

लेकिन एक तरफ दुल्हन की तरह सजधज कर तैयार हो रहे एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल के दूसरी और जमीन पर शीश झुकाए फसल मानो एयरपोर्ट से कह रही हो कि अभी तक मैंने जेवर क्षेत्र की अपनी संतानों का भरपूर पालन पोषण किया है। बदले वक़्त में अब यह जिम्मेवारी तुम्हारे कंधों पर आ गई है। कल तक मैं इस क्षेत्र की जेवर थी। आज आप इस क्षेत्र का जेवर होंगे। आप इस जिम्मेवारी का सफल निर्वहन करो इसके लिए आपको मेरी शीश झुकाकर नमन और शुभकामनाएं। स्थानीय किसान के सामने एक तरफ एयरपोर्ट निर्माण के बाद भविष्य की अपार सम्भावनाएं है दूसरी ओर वह फसल की बर्बादी है जो उनकी पीढ़ियों के जीवन का आधार रही है। किसान के मन में आशा और निराशा का द्वंद है- एयरपोर्ट के उद्घाटन की ख़ुशी मनाए या बर्बाद फसल को देखकर दुखी हो, जो भविष्य में अब इस क्षेत्र के लिए अतीत बन जाएगी।

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