दादरी: समृद्ध इतिहास, उपेक्षित वर्तमान और अनिश्चित भविष्य, दोषी कौन?

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : गौतम बुद्ध नगर जिले की पहचान आज दुनिया में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से है। लेकिन विडंबना यह है कि जिस दादरी और आसपास की जमीन पर इस जिले की नींव रखी गई, वही क्षेत्र आज विकास की मुख्यधारा से सबसे अधिक कटता दिखाई दे रहा है। हालांकि इस क्षेत्र को ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान 2041 में शामिल किया गया है। इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नोएडा और ग्रेटर नोएडा चमके फिर दादरी क्षेत्र क्यों पिछड़ रहा है ? जिले के एक हिस्से में नियोजित विकास, दूसरे के हिस्से में मूलभूत सुविधाओं से रहित स्लम बस्तियों जैसी अवैध कॉलोनियाँ क्यों? और जब तक ग्रेटर नोएडा के मास्टर 2041 प्लान पर काम शुरू किया जाएगा तब क्या प्राधिकरण को निर्विवाद भूमि मिल सकेगी?
1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला दादरी क्षेत्र कभी आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र था। 1997 में गौतम बुद्ध नगर जिले के गठन के समय दादरी तहसील जिले का सबसे मजबूत आधार मानी जाती थी। प्रदेश की सर्वाधिक राजस्व देने वाली तहसीलों में शुमार दादरी के लोगों को उम्मीद थी कि नया जिला बनने के साथ यह क्षेत्र भी नियोजित विकास का मॉडल बनेगा। लेकिन तीन दशक बाद तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई देती है।
दादरी क्षेत्र के आधे हिस्से के रूप में जहां नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट ने विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचे, उद्योग, आवासीय सेक्टर और निवेश के नए आयाम स्थापित किए, वहीं रेलवे लाइन के उत्तर दिशा में दादरी और आसपास का बड़ा भूभाग आज भी स्पष्ट विकास नीति का इंतजार कर रहा है। भले ही इसका नाम “फेस-2” दे दिया गया, लेकिन आज तक उसके अनुरूप विकास की ठोस रूपरेखा जमीन पर नहीं उतर सकी।
यही नीति-शून्यता अब क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। नियोजित विकास के अभाव में भूमाफिया और अवैध कॉलोनाइजर सक्रिय हो गए हैं। गाजियाबाद सीमा से सटे छपरौला से लेकर बुलंदशहर सीमा तक दर्जनों गांवों के आसपास बिना सड़क, सीवर, जलनिकासी, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं के अवैध कॉलोनियों का जाल फैल चुका है। जिले का यह इलाका अनियोजित स्लम शहरीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। परिणामस्वरूप आज यह क्षेत्र प्रदेश के सबसे अधिक अवैध और कच्ची कॉलोनियों वाले क्षेत्र में शामिल है।
जानकारों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने किसानों को बेहतर मुआवजा देकर भूमि अधिग्रहण और लैंड बैंक बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, ताकि दादरी क्षेत्र को भी नियोजित विकास से जोड़ा जा सके। लेकिन प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली। परिणाम यह हुआ कि निजी कॉलोनाइजर किसानों से प्राधिकरण से ऊंचे दामों पर जमीन खरीदकर मनमाने ढंग से प्लॉटिंग कर रहे हैं और क्षेत्र की विकास संभावनाएं अव्यवस्थित बसावट में बदलती जा रही हैं।
विडंबना यह भी है कि जिले में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और अब न्यू नोएडा जैसी नई योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है, लेकिन दादरी का बड़ा भूभाग आज भी विकास के नक्शे पर धुंधला दिखाई देता है। ऐसा लगता है मानो जिले के अन्य क्षेत्रों के विकास की कीमत दादरी चुका रहा हो।
स्थानीय लोगों का दर्द भी यही है कि जिस क्षेत्र ने जिले को पहचान दी, वही आज अपने अस्तित्व और संतुलित विकास के लिए संघर्ष कर रहा है। यदि समय रहते इस क्षेत्र के लिए समग्र मास्टर प्लान, भूमि अधिग्रहण, जमीन क्रय अथवा लैंड पुलिंग या कोई अन्य नीति और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर ठोस निर्णय नहीं लिए गए, तो दादरी आने वाले वर्षों में अनियोजित बस्तियों और अवैध निर्माण के ऐसे जाल में फंस जाएगा, जहां से व्यवस्थित विकास की राह और कठिन हो जाएगी।
दादरी आज केवल एक क्षेत्र नहीं, बल्कि शासन की विकास नीति के उस विरोधाभास का प्रतीक बन चुका है, जहां एक ही जिले का एक हिस्सा स्मार्ट सिटी बनने की ओर बढ़ रहा है और दूसरा हिस्सा बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो यह क्षेत्र सरकार के नियोजित विकास के एजेंडे और प्राधिकरण की प्राथमिकताओं से बाहर है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि भौगोलिक स्थिति और संसाधनों की प्रबलता के चलते जिस क्षेत्र को नियोजित विकास के लिए प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी उसके प्रति शासन सत्ता और प्राधिकरण उदासीन क्यों है? दादरी क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सबसे विकसित और नियोजित जिले का वह हिस्सा है जहां विकास की राह आज भी अधूरी है। कुल मिलाकर दादरी क्षेत्र की वर्तमान दशा सरकार के द्वारा गौतम बुद्ध नगर के लिए चुने गए विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खडे करती है।





