ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

सरकारी खजाने को चूना, विज्ञापनों से कमाई! ग्रेटर नोएडा में नक्स क्रिएटर्स ब्लैकलिस्ट

Panchayat 24 : सार्वजनिक संपत्ति से निजी कमाई और सरकारी खजाने में बकाया—ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई ने विज्ञापन कारोबार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्राधिकरण ने चार यूनीपोल पर विज्ञापन लगाने का ठेका लेने वाली फर्म मैसर्स नक्स क्रिएटर्स को एक वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी एनजी रवि कुमार के निर्देश पर फर्म की जमानत राशि और बैंक गारंटी जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

प्राधिकरण के अनुसार, फर्म पर तीन करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी थी, जबकि उसने केवल 52 लाख रुपये जमा किए। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद जवाब नहीं दिया गया, जबकि आवंटित यूनीपोल पर विज्ञापन प्रदर्शित होते रहे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बकाया राशि कम से कम 2.48 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है। अब प्राधिकरण अन्य विज्ञापन ठेकेदारों के बकाये की भी जांच कर रहा है।

दिल्ली में 15 लाख की कथित रिश्वत के मामले में गिरफ़्तारी

मामले का दूसरा गंभीर पहलू दिल्ली से जुड़ा है। सितंबर 2026 में सीबीआई ने नक्स क्रिएटर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अनंत कुमार शर्मा, कंपनी से जुड़े दिलीप पटेल और दिल्ली नगर निगम के कर्मचारी अनिल कुमार उर्फ खत्री को कथित 15 लाख की रिश्वत के लेनदेन के मामले में गिरफ्तार किया था।

आरोप था कि निर्धारित टेंडर अवधि समाप्त होने के बाद भी विज्ञापन प्रदर्शित करने और स्वीकृत संख्या से अधिक होर्डिंग लगाने की अनुमति देने के बदले अनुचित आर्थिक लाभ लिया जा रहा था। तलाशी के दौरान 25.25 लाख नकद मिलने की सूचना भी सुर्खियों में थी।

ग्रेटर नोएडा में ब्लैकलिस्टिंग और जमानत राशि जब्त करने की कार्रवाई प्रशासनिक एवं अनुबंध संबंधी प्रक्रिया है। ऐसे में यदि कोई फर्म विज्ञापन से कमाई करती रहे और निर्धारित लाइसेंस फीस जमा न करे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि निगरानी व्यवस्था कहां थी? बकाया बढ़ने तक भुगतान सुनिश्चित क्यों नहीं हुआ? क्या अन्य ठेकेदारों के अनुबंधों और सरकारी देनदारियों का भी नियमित ऑडिट होता है?

प्राधिकरण को सभी विज्ञापन ठेकों की भुगतान स्थिति, अनुबंध अवधि, स्वीकृत यूनीपोल की संख्या, नोटिस और बैंक गारंटी की निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए। जहां केवल बकाया हो, वहां वसूली और अनुबंध के अनुसार कार्रवाई हो; जहां भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिलें, वहां सक्षम जांच एजेंसी को मामला सौंपा जाए। बिना प्रमाण किसी अन्य ठेकेदार या अधिकारी को दोषी ठहराना भी उचित नहीं होगा।

नैक्स क्रिएटर्स के विरुद्ध कार्रवाई दूसरे ठेकेदारों के लिए चेतावनी बन सकती है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता बकाया वसूली, पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने से तय होगी। यदि किसी अधिकारी की मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो कार्रवाई केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

सरकारी संपत्ति किसी की निजी जागीर नहीं और सार्वजनिक राजस्व किसी की मर्जी पर निर्भर नहीं हो सकता। विज्ञापन कारोबार में नियमों का पालन ठेकेदार की जिम्मेदारी है, तो उसकी निगरानी और सरकारी धन की सुरक्षा प्राधिकरण का दायित्व। व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब नियम तोड़कर कमाई करना लाभ का नहीं, जवाबदेही का कारण बनेगा।

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