ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक : ग्रेटर नोएडा में श्रमिक आवास, हॉस्टल और पुस्तकालय बनाने को मंजूरी

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक विकास में अहम भागीदारी निभाने वाले अप्रवासी श्रमिकों को बेहतर जीवन शैली देने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने तीन अहम फैसले लिए हैं। शासन के निर्देश पर प्राधिकरण बोर्ड ने ग्रेटर नोएडा में श्रमिक आवास, लेबर हॉस्टल और सार्वजनिक पुस्तकालय बनाने को मंजूरी दे दी है। ग्रेटर नोएडा में ये तीनों ही परियोजनाएं अब मूर्त रूप में आ सकेंगी।
अप्रवासी श्रमिकों के लिए ईडब्ल्यूएस फ्लैट
औद्योगिक शहर ग्रेटर नोएडा में अपना और अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में अप्रवासी श्रमिक आते हैं। एक वक्त के बाद वे यहां अपने लिए आशियाना बनाकर रहने की ख्वाहिश रखते हैं। बिल्डर फ्लैटों की कीमत ऐसे लोगों के पहुंच से दूर होती है, जिससे अपने घर का सपना पूरा नहीं हो पाता है। कई बार वे अनधिकृत कालोनियों में अपनी गाढ़ी कमाई लगा देते हैं। इस समस्या के हल के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पतवाड़ी और बिरौंडी गांव में ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाने जा रहा है। इसकी जमीन चिंहित हो गई है। सभी औपचारिकता पूरी कर इसी साल के अंत तक निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य जनपदों और राज्यों से आने वाले निर्माण श्रमिकों तथा परिवारों को सुविधायुक्त बेहतर और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है।
ट्रांजिट लेबर हॉस्टल
रोजगार की तलाश में ग्रेटर नोएडा आने पर अप्रवासी श्रमिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तत्काल अस्थाई आवास की होती है। होटल बहुत महंगा पड़ता है। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ट्रांजिट हॉस्टल योजना के लिए के अंतर्गत ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से सेक्टर ईकोटेक-06 व ईकोटेक-11 में 3000-3000 वर्ग मीटर भूमि चिंहित कर ली गई है। प्राधिकरण यह भूखंड श्रम विभाग को निशुल्क ट्रांसफर कर देगा। श्रम विभाग इसका निर्माण करेगा। इस हॉस्टल में अप्रवासी मजदूर बहुत कम किराया देकर रोजगार तलाश सकेंगे और रोजगार मिलने के बाद वे अपने लिए स्थाई आवास तलाश सकेंगे। प्राधिकरण बोर्ड के इस फैसले से हजारों अप्रवासी श्रमिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
सेक्टर अल्फा वन में बनेगी पब्लिक लाइब्रेरी
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने तीसरा अहम फैसला सेक्टर अल्फा वन में पब्लिक लाइब्रेरी बनाने का लिया है। यह लाइब्रेरी 1360 वर्ग मीटर में होगी, जिसमें से 440 वर्ग मीटर में तीन मंजिला लाइब्रेरी बनेगी और बाकी एरिया में पार्किंग, शौचालय व अन्य सुविधाएं होंगी। इस लाइब्रेरी में छोटे बच्चों, छात्रों, युवाओं और सीनियर सिटीजन, सभी के लिए किताबेें उपलब्ध होंगी। इससे उन छात्रों को अधिक लाभ मिलेगा, जो पैसे देकर किताबें नहीं खरीद सकते। वे यहां न्यूनतम शुल्क देकर किताबें ईशु करा सकेंगे और अपनी परीक्षा की तैयारी कर सकेंगे। इसका निर्माण कार्य भी इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगा।
ग्रेटर नोएडा में आवासीय भूखंडों पर निर्माण के लिए 30 जून 2028 तक अतिरिक्त समय, आवंटियों को वर्तमान विलंब शुल्क के साथ मिलेगा अंतिम अवसर, इसके बाद रद्द होगा आवंटन
ग्रेटर नोएडा की आवासीय भूखंड योजनाओं के आवंटियों को भवन निर्माण पूरा कर कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए एक अंतिम अवसर दिया गया है। ऐसे आवंटियों को 30 जून 2028 तक अतिरिक्त समय देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है, जिनके भूखंडों पर अभी निर्माण पूरा नहीं हुआ है या कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया गया है। यह समय विस्तार वर्तमान में प्रचलित विलंब शुल्क के साथ अप्रूव्ड किया गया है। इस अवधि के बाद आवंटन भी अगर किसी ने कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र नहीं ले लिया तो उसका आवंटन रद्द कर दिया जाएगा।
एनडीआरएफ के लिए 30 फ्लैट निशुल्क आवंटित करने का फैसला
ग्रेटर नोएडा में आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए एनडीआरएफ के रीजनल रेसपोंस सेंटर (क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र) के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आवासीय सुविधा उपलब्ध कराएगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने एनडीआरएफ 8वीं वाहिनी, गाजियाबाद के रीजनल रेसपोंस सेंटर सेक्टर ओमीक्रॉन-1ए में 30 फ्लैट निशुल्क आवंटित करने का प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी है। इसके लिए एनडीआरएफ की तरफ से भवन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। प्रस्ताव के अनुसार यहां तैनात कर्मी परिवार सहित निवास नहीं करेंगे, बल्कि आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई के लिए टीम के रूप में तैनात रहेंगे। आवासों का उपयोग कैंप, परिसर और स्टाफ कार्यालय के रूप में किया जाएगा। टीम की तैनाती रोटेशन के आधार पर होगी। इस फैसले से प्राकृतिक आपदा, औद्योगिक दुर्घटना, भवन गिरने, बाढ़ सहित अन्य आपात स्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी आएगी।
मैकेनिकल स्वीपिंग से ग्रेटर नोएडा की सड़कों की सफाई होगी और बेहतर
ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर धूल-मिट्टी के नियंत्रण और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। सीएक्यूएम व आईआईटी रुड़की के सुझाव पर ग्रेटर नोएडा सेंट्रल एवं ईस्ट क्षेत्र में सड़कों की पांच वर्ष के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग से कराने कराया जाएगा। इसके लिए मशीनरी प्राधिकरण उपलब्ध कराएगा और मशीनों का संचालन एवं रखरखाव आदि की जिम्मेदारी कॉन्ट्रैक्टर पर होगी। आईआईटी रुड़की के एस्टीमेट पर प्राधिकरण ने दोनों जोन के लिए टेंडर निकाला। दोनों जोन में सड़कों की सफाई के लिए कॉन्ट्रैक्टर का चयन कर लिया गया है। बता दें कि सेंट्रल जोन के अंतर्गत सेक्टर-ईटा-1, डेल्टा-1, 2, 3, केपी-4, जीटा-1, ईटा-2, बेगमपुर, बोड़ाकी, मकौड़ा, मलकपुर, मुबारकपुर, पाली, साकीपुर, लखनावली आदि गांव हैं, जबकि ईस्ट जोन में सेक्टर-36, 37, म्यू-1, ज्यु 1, 2, 3, चाई-5, अस्तौली, डाबरा, चुहड़पुर, घरबरा, घोड़ी -बछेड़ा, जुनपत, जुनैदपुर, घंघोला देवला, अजायबपुर, अटाई मुरादपुर, दाउदपुर, खेरली, लड़पुरा, लुक्सर, मायचा, कनारसी, कासना, खानपुर, पौवारी, सलेमपुर गुर्जर, विरौंडी, विरौंडा आदि गांव शामिल है।
बोर्ड बैठक में चेयरमैन दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार (वर्चुअल), ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश, ग्रेनो प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस, एसीईओ प्रेरणा सिंह, एसीईओ सुमित यादव, यीडा के ओएसडी शैलेंद्र सिंह, ग्रेनो प्राधिकरण के जीएम वित्त स्वतंत्र गुप्ता, जीएम प्रोजेक्ट एके सिंह, ग्रेनो प्राधिकरण की ओएसडी गुंजा सिंह, ओएसडी अभिषेक पाठक, ओएसडी गिरीश झा, ओएसडी मुकेश कुमार सिंह, ओएसडी अजय शर्मा आदि अधिकारीगण मौजूद रहे।




