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यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की नई छलांग: हाथरस बनेगा उत्तर प्रदेश का अगला औद्योगिक शहर

Panchayat 24 (यीड़ा/हाथरस) : यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे विकास की जो नई धारा नोएडा और जेवर से आगे बढ़ी है, उसकी अगली मंजिल अब हाथरस बनने जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने ‘मास्टर प्लान-2041’ के तहत हाथरस को आधुनिक औद्योगिक एवं शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने की कवायद तेज कर दी है। यह परियोजना केवल एक नया शहर बसाने की योजना नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक भूगोल को नया आयाम देने की तैयारी है।

करीब 10 हजार एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह हाईटेक अर्बन सेंटर हाथरस और सासनी तहसील के 50 से अधिक गांवों को समेटेगा। यीडा के चार प्रमुख अर्बन नोड्स में हाथरस को विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां उद्योग, आवास, व्यापार और आधुनिक शहरी सुविधाओं का संतुलित विकास होगा।

योजना के तहत विशाल औद्योगिक क्षेत्र के साथ आधुनिक आवासीय सेक्टर, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, लॉजिस्टिक्स पार्क, होटल, वेयरहाउस और पर्याप्त हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। कुल परियोजना क्षेत्र का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन बेल्ट के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा।

इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत इसकी लोकेशन है। प्रस्तावित शहर नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के प्रभाव क्षेत्र में स्थित होगा और यमुना एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग-93, बरेली-मथुरा हाईवे तथा अन्य प्रमुख मार्गों से सीधी कनेक्टिविटी रखेगा। यही कारण है कि इसे भविष्य के औद्योगिक निवेश के लिए एक रणनीतिक गंतव्य माना जा रहा है।

हाथरस की पहचान अब तक हींग, गुलाल और अन्य पारंपरिक एमएसएमई उत्पादों के लिए रही है। नई योजना इन उद्योगों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर पैकेजिंग, निर्यात सुविधाओं और वैश्विक बाजार से जोड़ने का अवसर देगी। इसके साथ ही फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, इलेक्ट्रिक वाहन कलपुर्जे, मशीन टूल्स, मेडिकल उपकरण और अन्य उन्नत विनिर्माण इकाइयों के लिए भी विशेष औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।

इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय युवाओं को मिलने की उम्मीद है। परियोजना के पूरा होने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे केवल हाथरस ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रज और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

यदि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और आधारभूत सुविधाओं का विकास तय समय और पारदर्शिता के साथ पूरा होता है तो हाथरस आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और शहरी केंद्रों में शामिल हो सकता है। स्पष्ट है कि यह परियोजना केवल ईंट-पत्थरों का नया शहर नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक शक्ति का मजबूत आधार बनने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।

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