किसानों को बड़ा तोहफा: ग्रेटर नोएडा में मुआवजा दर 6415, विकसित भूखंड का विकल्प भी

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : ग्रेटर नोएडा की विकासगाथा में अपनी जमीन देकर आधारशिला रखने वाले किसानों के लिए प्राधिकरण बोर्ड ने बड़ा और लंबे समय से प्रतीक्षित फैसला लिया है। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण बोर्ड ने किसानों से भूमि क्रय के लिए मौजूदा मुआवजा दर में एकमुश्त 2,290 रुपये प्रति वर्ग मीटर की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही मुआवजा 4,125 रुपये से बढ़कर 6,415 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गया है। यानी किसानों को अब पहले की तुलना में करीब 55.5 प्रतिशत अधिक मुआवजा मिलेगा।
इस फैसले को केवल मुआवजे की दर में वृद्धि के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे उन किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिनकी जमीन पर आधुनिक ग्रेटर नोएडा की औद्योगिक, आवासीय और संस्थागत इमारतें खड़ी हुई हैं। बोर्ड ने करीब एक दशक से बंद छह प्रतिशत आबादी भूखंड की व्यवस्था को भी फिर से बहाल करने का निर्णय लिया है।
दरअसल, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण लम्बे समय से किसानों की जमीन की मुआवजा डर बधाने के लिए प्रयासरत लेकिन किन्ही कारणों से सफलता नहीं मिली। परिणाम स्वरूप प्राधिकरण के पास लेंड बैंक का बड़ा अभाव हो गया जबकि कई बड़ी और महत्वकांक्षी परियोजनाओं के लिए जमीन की आवश्यकता थी। दूसरी ओर किसान, वर्तमान मुआवजा दर पर जमीन देने के लिए तैयार नहीं थे। वहीं, दूसरी ओर निजी बिल्डर और कॉलोनाइजर किसानों से प्राधिकरण से अधिक क़ीमत पर जमीन खरीद रहे थे और ऊँची दरों पर बेच रहे रहे। इसका किसानों को दोहरा नुकसान हो रहा था। प्राधिकरण के सीईओ ने एन जी रवि कुमार के प्रयासों से जहाँ किसानों को बढ़ी दर से जमीन कि क़ीमत मिलेगी, वहीं आवासीय भूखंड भी मिलेगा। दोनों को मिलाकर प्राधिकरण ने बिल्डर और कॉलोनाइजर से कहीं ऊँची दर पर मुआवजा दर तय करके किसानों के दोनों हाथों में लड्डू देने का काम किया है।
जमीन के साथ भविष्य में हिस्सेदारी
प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार के अनुसार नई व्यवस्था के तहत जिन किसानों को छह प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ मिलेगा, उनके लिए 5,725 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा निर्धारित किया गया है। आबादी भूखंडों के लिए अलग सेक्टर विकसित किए जाएंगे। इन सेक्टरों का विकास भी आवासीय, औद्योगिक और अन्य नियोजित सेक्टरों की तर्ज पर किया जाएगा।
एसीईओ के अनुसार इस फैसले की एक महत्वपूर्ण कड़ी यह है कि किसान जब अपनी जमीन प्राधिकरण के पक्ष में पंजीकृत कराएंगे, उसी समय उन्हें आबादी भूखंड का आरक्षण पत्र भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने और आबादी भूखंड के लिए अनिश्चितता में रहने की स्थिति को समाप्त करने की कोशिश की गई है।
आबादी भूखंड का क्षेत्रफल न्यूनतम 40 वर्ग मीटर और अधिकतम 2,500 वर्ग मीटर रखा गया है। प्रमुख मार्गों से लगी भूमि के किसानों को आबादी भूखंड के आवंटन में प्राथमिकता देने का भी निर्णय लिया गया है।
दस वर्ष बाद फिर लौटी छह प्रतिशत आबादी की व्यवस्था
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने वर्ष 2016 में छह प्रतिशत आबादी भूखंड देने की व्यवस्था समाप्त कर दी थी। अब लगभग दस वर्ष बाद इसे पुनः लागू करने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग के लिहाज से विशेष महत्व रखता है।
बोर्ड का उद्देश्य केवल किसानों को उनकी जमीन का आर्थिक मूल्य देना नहीं, बल्कि उन्हें उस विकास प्रक्रिया का सहभागी बनाना भी है, जिसके लिए उनकी कृषि भूमि का उपयोग किया जा रहा है। इस दृष्टि से आबादी भूखंड की व्यवस्था किसान और प्राधिकरण के बीच विकास के लाभ में साझेदारी की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।
अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी
ग्रेटर नोएडा में किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे के इतिहास पर नजर डालें तो इस बार की वृद्धि अपने आप में उल्लेखनीय है। वर्ष 2014-15 से 2021-22 तक मुआवजा दर 3,500 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी। वर्ष 2022-23 में इसे बढ़ाकर 3,750 रुपये किया गया। इसके अगले वर्ष 2023-24 में यह दर 4,125 रुपये प्रति वर्ग मीटर पहुंची और तब से यही दर लागू थी।
अब वर्ष 2026-27 में यह सीधे 6,415 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गई है। यानी पिछली वृद्धि की तुलना में इस बार एक ही निर्णय में 2,290 रुपये की छलांग लगाई गई है।
वर्षवार मुआवजा दर वर्ष मुआवजा दर 2014-15 से 2021-22 मे 3,500 रूपये प्रति वर्ग मीटर 2022-23 में 3,750 रूपये प्रति वर्ग मीटर 2023-24 से 2025-26 में 4,125 रूपये प्रति वर्ग मीटर 2026-27 6,415 प्रति वर्ग मीटर
जमीन खरीद की प्रक्रिया होगी आसान
बोर्ड ने किसानों को मुआवजा हासिल करने के लिए प्रक्रिया के स्तर पर भी राहत देने का निर्णय लिया है। भूमि क्रय की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एसीईओ की अध्यक्षता में भूमि अधिग्रहण सेल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह सेल किसानों को जमीन क्रय की प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग करेगा, ताकि उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
मुआवजा वितरण में पारदर्शिता बरतते हुए पूरी राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, जमीन पर मौजूद परिसंपत्तियों का भी मूल्यांकन कर किसानों को उनका अलग से मुआवजा दिया जाएगा।
ग्रेटर नोएडा के विस्तार के साथ जमीन का मूल्य जिस तेजी से बदल रहा है, उसके बीच किसानों के लिए लिया गया यह फैसला आर्थिक राहत के साथ सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। एक ओर बढ़ी हुई मुआवजा दर किसानों को उनकी भूमि का बेहतर मूल्य देगी, वहीं दूसरी ओर आबादी भूखंड की पुनर्बहाली उन्हें विकसित हो रहे शहर में अपने भविष्य के लिए स्थायी हिस्सेदारी का आधार प्रदान करेगी।
प्राधिकरण बोर्ड का यह निर्णय ग्रेटर नोएडा के विकास में किसानों के योगदान को केवल मुआवजे की राशि से आंकने के बजाय उन्हें विकास के लाभ का सहभागी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है।




