ब्राह्मणों को साधने के लिए भाजपा का बड़ा दांव! शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम होगा ‘परशुरामपुरी’

Panchayat 24 (लखनऊ)। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरणों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के “ब्राह्मण कार्ड” के रूप में देख रहे हैं। राज्य मंत्रिपरिषद ने शाहजहांपुर जनपद के नगर पालिका परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जलालाबाद का नाम बदलकर “परशुरामपुरी” किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
यह निर्णय केवल एक नाम परिवर्तन नहीं माना जा रहा, बल्कि भाजपा की उस व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी समझा जा रहा है, जिसके माध्यम से पार्टी ब्राह्मण समाज के बीच अपने जनाधार को और मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
ब्राह्मण समाज को स्पष्ट राजनीतिक संदेश
पिछले कुछ वर्षों में विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी, ब्राह्मण समाज को अपने पक्ष में लाने के लिए लगातार सम्मेलन, संवाद और राजनीतिक संदेश देती रही हैं। ऐसे समय में भगवान परशुराम से जुड़े स्थल का नाम “परशुरामपुरी” करना भाजपा की ओर से एक स्पष्ट राजनीतिक संकेत माना जा रहा है कि पार्टी ब्राह्मण समाज की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने का दावा कर रही है।
नाराजगी कम करने की कोशिश?
राजनीतिक हलकों में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि प्रदेश के कुछ हिस्सों में ब्राह्मण समाज के एक वर्ग में असंतोष की भावना देखने को मिली थी। हालांकि भाजपा का ब्राह्मण नेतृत्व लगातार पार्टी के साथ खड़ा रहा है, फिर भी विपक्ष इस असंतोष को राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास करता रहा। ऐसे में “परशुरामपुरी” नामकरण को उस असंतोष को कम करने और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश देने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, सांस्कृतिक राजनीति भी
भाजपा लंबे समय से सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक पहचान को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाती रही है। भगवान परशुराम को ब्राह्मण समाज का आराध्य माना जाता है। ऐसे में जलालाबाद को “परशुरामपुरी” नाम देना सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक संदेश—दोनों को साथ लेकर चलने वाला कदम माना जा सकता है।
विपक्ष की रणनीति को जवाब
समाजवादी पार्टी ने समय-समय पर भगवान परशुराम की प्रतिमाएं स्थापित करने और ब्राह्मण सम्मेलनों के माध्यम से इस वर्ग को आकर्षित करने का प्रयास किया है। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने भी ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कर सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की थी। भाजपा का यह फैसला विपक्ष की उन रणनीतियों के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे ब्राह्मण मतदाताओं को यह संदेश दिया जा सके कि उनकी आस्था और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान भाजपा सरकार कर रही है।
सरकार का आधिकारिक पक्ष
सरकार का कहना है कि जलालाबाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है तथा पौराणिक ग्रंथों और स्थानीय परंपराओं में इसका उल्लेख मिलता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग तथा आवश्यक औपचारिकताओं के बाद मंत्रिपरिषद ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अधिसूचना जारी होने के बाद सभी सरकारी अभिलेखों में नगर का नाम “परशुरामपुरी” दर्ज किया जाएगा।
राजनीतिक महत्व
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाता प्रभावशाली माने जाते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के प्रतीकात्मक और सांस्कृतिक फैसलों का राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में “परशुरामपुरी” नामकरण को केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि भाजपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है।





