मालवीय नगर होटल अग्निकांड से सबक लेने की जरूरत, नोएडा में सुरक्षा ऑडिट की मांग

Panchayat 24 (नोएडा, 6 जून) : दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र स्थित एक होटल में हाल ही में हुई भीषण आग की घटना के बाद गौतमबुद्धनगर में होटलों, गेस्ट हाउसों और पीजी आवासों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर फोनरवा ने चिंता व्यक्त की गई है। इस संबंध में पुलिस आयुक्त गौतमबुद्धनगर को एक ज्ञापन भेजकर जिले में व्यापक सुरक्षा जांच अभियान चलाने की मांग की है।
फोनरवा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा ने कहा कि दिल्ली में हुई दुखद घटना ने यह स्पष्ट किया है कि अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे मामलों में अक्सर भवनों में पर्याप्त आपातकालीन निकास मार्गों की कमी, अग्निशमन उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही तथा सुरक्षा नियमों के अनुपालन में कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र हैं, जहां बड़ी संख्या में होटल, गेस्ट हाउस, हॉस्टल और पीजी आवास संचालित हो रहे हैं। ऐसे में जनसुरक्षा के दृष्टिकोण से इन प्रतिष्ठानों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की समीक्षा आवश्यक है।
प्रशासन, अग्निशमन विभाग और संबंधित प्राधिकरणों से संयुक्त अभियान चलाकर सभी होटल, गेस्ट हाउस और पीजी आवासों का निरीक्षण कराने की मांग की गई है। साथ ही फायर एनओसी की वैधता, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर सिस्टम, अग्निशमन यंत्रों तथा आपातकालीन निकास मार्गों की उपलब्धता की जांच करने पर भी जोर दिया गया है।
फोनरवा के अनुसार बहुमंजिला भवनों में आपदा के समय सुरक्षित निकासी व्यवस्था, विद्युत वायरिंग और अन्य विद्युत उपकरणों की तकनीकी जांच, मॉक ड्रिल के आयोजन तथा संचालकों एवं कर्मचारियों को नियमित फायर सेफ्टी प्रशिक्षण देने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई है।
ज्ञापन के माध्यम से फोनरवा ने यह भी सुझाव दिया गया है कि बिना आवश्यक अनुमतियों अथवा पंजीकरण के संचालित प्रतिष्ठानों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच भवनों की सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित निरीक्षण, तकनीकी ऑडिट और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से आग जैसी दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर अब लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।




