ग्रेटर नोएडा में 6048 करोड़ का बजट पास, लेकिन किसान की जमीन की मुआवजा दर पर चुप्पी—इतने महत्वपूर्ण विषय पर प्राधिकरण और सरकार मौन क्यों?

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा): शनिवार को सम्पन्न हुई ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 143वीं बोर्ड बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए हैं। लेकिन किसानों की जमीन की मुआवजा दर नहीं बढ़ाए जाने पर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं।
दरअसल, निश्चित ही इन निर्णयों से विकास को गति मिलेगी। प्राधिकरण बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 6048 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति दी है। सर्वाधिक जोर भूमि अधिग्रहण, ग्रामीण विकास एवं निर्माण कार्यों पर है, जिस पर लगभग 5294 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एन. जी. रवि कुमार के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में ग्रेटर नोएडा के प्रति औद्योगिक निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा है। बड़े पैमाने पर निवेशक उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि की मांग कर रहे हैं। उन्हें भूमि उपलब्ध कराने के लिए प्राधिकरण लगातार प्रयासरत है। इस वित्तीय वर्ष के बजट में भूमि अधिग्रहण और आधारभूत संरचना पर विशेष जोर दिया गया है। इस बार भूमि अधिग्रहण पर लगभग 1150 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बोर्ड बैठक का उद्देश्य स्पष्ट है कि औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भूमि अधिग्रहण अथवा किसानों से सहमति के आधार पर भूमि का क्रय किया जाएगा। लेकिन बैठक के बाद कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। क्या वर्तमान दर 4125 रुपये प्रति वर्ग मीटर पर प्राधिकरण किसानों से भूमि प्राप्त कर सकेगा? दरअसल, नोएडा प्राधिकरण की मुआवजा दर पहले से ही अधिक है, जबकि यमुना प्राधिकरण द्वारा 4300 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है। वहीं, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा पिछले कई वर्षों से भूमि मुआवजा दर में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
ऐसे में प्राधिकरण के सामने औद्योगिक विकास हेतु भूमि बैंक एक बड़ी समस्या बन गया है। चिंताजनक पहलू यह है कि किसान प्राधिकरण को भूमि देने के बजाय निजी कॉलोनाइज़र को 7 से 8 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भूमि बेच रहे हैं। परिणामस्वरूप, एक ओर प्राधिकरण के हाथ से भूमि निकल रही है, तो दूसरी ओर अधिसूचित क्षेत्र में अवैध निर्माण तेजी से बढ़ रहा है। प्राधिकरण यह भली-भांति जानता है कि वर्तमान दर पर किसानों से भूमि अधिग्रहण या क्रय करना संभव नहीं है।
हालांकि, प्राधिकरण के सीईओ एन. जी. रवि कुमार किसानों की भूमि के मुआवजे में वृद्धि के पक्षधर रहे हैं और उन्होंने इसके लिए शासन स्तर पर मांग भी की थी। प्राधिकरण में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही थी कि इस बार शासन से अनुमति मिलने के बाद किसानों के लिए मुआवजा दर 6 से 7 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तथा विकसित सेक्टर में 6 प्रतिशत भूखंड देने का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पारित किया जा सकता है। लेकिन बैठक समाप्त होने के बाद किसानों को सबसे अधिक निराशा हाथ लगी।
सवाल उठता है कि जब प्राधिकरण मुआवजा दर बढ़ाना चाहता था, तो फिर इस विषय पर बोर्ड बैठक में कोई निर्णय क्यों नहीं लिया गया? क्या मुआवजा वृद्धि को शासन से अनुमति नहीं मिल सकी? आखिर ऐसा क्या हुआ कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को पारित नहीं किया गया? क्या इसके पीछे नोएडा और यमुना प्राधिकरण का कोई दबाव था?
दरअसल, जब से यह चर्चा शुरू हुई कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण मुआवजा दर बढ़ाकर 6 से 7 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर करने तथा विकसित सेक्टर में 6 प्रतिशत भूखंड देने पर विचार कर रहा है, तभी से यह आशंका भी जताई जाने लगी कि इसका सबसे अधिक प्रभाव नोएडा और यमुना प्राधिकरण पर पड़ेगा। नोएडा प्राधिकरण की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘न्यू नोएडा’ तथा यमुना प्राधिकरण की कई परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण कठिन हो जाएगा।
गौरतलब है कि नोएडा प्राधिकरण के पास औद्योगिक विकास के लिए पर्याप्त भूमि शेष नहीं बची है और वह हर हाल में ‘न्यू नोएडा’ परियोजना को शुरू करना चाहता है। यमुना प्राधिकरण की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। यदि किसान मुआवजा दर के कारण भूमि देने से इंकार करते हैं, तो कई परियोजनाएं संकट में पड़ सकती हैं और कुछ परियोजनाएं शुरू भी नहीं हो पाएंगी। इसके बावजूद यदि ऐसा किया गया तो संभवतः किसनों का विरोध भी शुरू हो सकता है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में सरकार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों की जमीन की मुआवजा दर बढाकर नोएडा प्राधिकरण के न्यू नोएडा और यमुना प्राधिकरण के किसानों के खिलाफ जाकर कोई निर्णय लेने से बचना चाहती है। संभवतः इसी कारण शासन ने फिलहाल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुआवजा वृद्धि प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यदि ऐसा है, तो नई सरकार के गठन तक मुआवजा दर में वृद्धि की संभावना कम ही दिखाई देती है।
हालांकि, इसका लाभ नोएडा प्राधिकरण की ‘न्यू नोएडा’ परियोजना और यमुना प्राधिकरण की योजनाओं पर कितना होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि इसका असर ग्रेटर नोएडा के विकास की गति पर अवश्य दिखाई देगा। कॉलोनाइजर और अवैध बिल्डर किसानों की जमीन की मुआवजा दर में वृद्धि नहीं होने का लाभ उठाएंगे। प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण तेजी से होने की संभावना बढ़ेगी। ग्रेटर नोएडा की कई सड़कों और परियोजनाओं के लिए जमीन हासिल करना लगभग असंभव होगा। प्राधिकरण का विकास मॉडल बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएगा।



