जिला प्रशासननोएडा विधानसभा

जिले में 152 ब्‍लैक स्‍पॉट दे रहे हैं हादसों को बुलावा, सांसद ने जताई नाराजगी, समीक्षा बैठक के बाद युवराज हादसा स्‍थल खतरनाक सूची में शामिल

152 black spots in the district are inviting accidents; the MP has expressed displeasure.

Panchayat 24 (नोएडा) : गौतम बुद्ध नगर जिले के नोएडा सेक्‍टर-150 में बिल्‍डर प्‍लॉट में बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में डूबने से कार सवार सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के बाद यह प्रकरण दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। गणतंत्र दिवस के बाद पुलिस, प्राधिकरण, प्रशासन और जनप्रतिनिधि एक्‍शन मोड में हैं और जनता के बीच विश्‍वास बहाली में जुट गए हैं। मंगलवार को नोएडा के सेक्‍टर-27 स्थित डीएम कैंप कार्यालय में संसद सदस्य सड़क सुरक्षा में जिला विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक संपन्‍न हुई।

जिला प्रशासन द्वारा नवंबर महीने में 152 ब्‍लैक स्‍पॉट चिन्हित कर पुलिस और नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा यमुना एक्‍सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को जानकारी दिए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। अर्थात जिले में अभी भी 152 ऐसे स्‍थान हैं जहां कभी भी लोग हादसों का शिकार हो सकते हैं। इस पर सांसद डॉ महेश शर्मा ने नाराजगी जाहिर की। उन्‍होंने बैठक में उपस्थित पुलिस एवं प्राधिकरणों के प्रतिनिधयों को अभी तक की गई कार्रवाई की विस्‍तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा।

बता दें क जिलाधिकारी मेधा रूपम ने सड़क सुरक्षा के लिहाज से नवंबर के महीने में विभिन्‍न माध्‍यमों से जानकारी हासिल करते हुए 152 ब्‍लैक स्‍पॉट की सूची तैयार की थी। वहीं, बैठक के बाद सेक्‍टर-150 के युवराज हादसा स्‍थल को भी जिला प्रशासन ने हॉट स्‍पॉट की सूची में शामिल कर लिया है। वहीं, हादसे के बाद एसआईटी जांच का केन्‍द्र बिन्‍दू बने रहे नोएडा प्राधिकरण के नव नियुक्‍त मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी कृष्‍णा करूणेश ने भी खामियों को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए हैं।

युवराज हादसे के कारण सूरजपुर स्थित जिला न्‍यायालय में भी तापमान हाई थी। यहां सभी की निगाहें इस प्रकरण में गिरफ्तार एवं आरोपी के मामलों की सुनवाई पर टिकी हुई थी। मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट संजीव त्रिपाठी की कोर्ट में गिरफ्तार बिल्‍डर अभय सिंह की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के वकीलों ने अपनी दलीलों में कहा कि युवराज की मौत के मामले में प्रत्‍यक्ष रूप से प्राधिकरण और पुलिस जिम्‍मेवार हैं। इन्‍हें जल भराव के बारे में कई बार सूचना दी गई थी। इसके बावजूद इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

आज ही आरोपी बिल्‍डर निर्मन सिंह की जमानत याचिका पर भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। बड़ी बात यह रही कि बचाव पक्ष की दलीलों में जिला प्रशासन, विशेष तौर पर जिलाधिकारी, पर कोई टिप्‍पणी नहीं की गई। इस सबके बीच पूरे मामले में सभी की निगाहें एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। शायद एसआईटी ही असली हादसे के लिए जिम्‍मेवार का पता लगा सके, क्‍योंकि अभी तक कोई भी संस्‍था अथवा व्‍यक्ति स्‍वयं को इसके लिए जिम्‍मेवार मानने को तैयार नहीं है।

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