नोएडा श्रमिक आंदोलन : 203 संविदाकारों पर गिरी गाज, लाइसेंस रद्दीकरण और ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू, करोड़ों की पेनल्टी
Noida Labor Movement: The Hammer Falls on 203 Contractors; License Cancellation and Blacklisting Process Initiated, Penalties Worth Crores Imposed.

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : जिले में श्रम कानूनों की अनदेखी करने वाले संविदाकारों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। श्रम विभाग ने 24 औद्योगिक इकाइयों से जुड़े 203 संविदाकारों के लाइसेंस निरस्त करने और संबंधित एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी के अनुसार, हाल ही में श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़ की घटनाओं में कुछ संविदाकारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच में यह भी सामने आया कि कई संविदाकार श्रम कानूनों का पालन नहीं कर रहे थे और श्रमिकों को उनके वैधानिक लाभों से वंचित रखा जा रहा था।
इसी के चलते विभाग ने संबंधित संविदाकारों पर करीब 1 करोड़ 16 लाख 5 हजार रुपये की पेनल्टी लगाते हुए यह राशि श्रमिकों को भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अन्य संदिग्ध संविदाकारों की भी पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ भी जल्द कठोर कदम उठाए जाएंगे।
वेतन वृद्धि के मुद्दे पर भी बड़ा फैसला लिया गया है। शासन स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश के बाद गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अनुसूचित क्षेत्रों के श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएंगी और इसका भुगतान मई माह की 7 से 10 तारीख के बीच किया जाएगा।
श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई दरें संविदा और स्थायी—दोनों प्रकार के श्रमिकों पर समान रूप से लागू होंगी। साथ ही, कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ और ईएसआई के अलावा किसी भी अन्य प्रकार की कटौती को अवैध माना जाएगा। यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है तो संबंधित नियोक्ता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा श्रमिकों को ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, बोनस और ग्रेच्युटी जैसे सभी वैधानिक लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि समय पर वेतन न देने या कम भुगतान करने की स्थिति में न केवल संविदाकार, बल्कि संबंधित प्रधान नियोक्ता को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
प्रशासन ने साफ किया है कि श्रमिकों के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उल्लंघन की स्थिति में वसूली से लेकर न्यायालय में अभियोजन तक की कार्रवाई की जाएगी।



