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एकनाथ शिंदे ने भारतीय जनता पार्टी संग सरकार बनाने की दिशा में बढ़ाए कदम, मंथन शुरू

Eknath Shinde took steps towards forming government with Bharatiya Janata Party, churning started

Panchayat24 : उद्धव ठाकरे से बागावत करने वाला एकनाथ शिंदे गुट लगातार मजबूत होता जा रहा है। यह गुट अब भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार गठन को लेकर दोनों ओर से प्रयास शुरू हो गए हैं। गुहाठी में ही एकनाथ शिंदे अपने गुट के सभी नेताओं संग होटल में बैठक कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बैठक में एकनाथ शिंदे डिप्‍टी सीएम और मंत्रियों के मंत्रालयों पर चर्चा होगी। बैठक नई सरकार में एकनाथ शिंदे को डिपटी सीएम पद मिल सकता है। यह भी पता चल रहा है कि एकनाथ शिंदे गुट को डिप्‍टी सीएम सहित 8 कैबिनेट मंत्री और 5 राज्‍यमंत्री जबकि भाजपा को 29 कैबिनेट मंत्री होंगे। एकनाथ शिंदे गुट निर्दलीय विधायकों को भी भाजपा कोटे से मंत्री बनाए जाने की बात कह रहा है।  लेकिन सरकार गठन से पूर्व एकनाथ शिंदे सभी बाधाओं को पार कर लेना चाहते हैं।

भाजपा किसी जल्‍दबाजी से बचना चाहती है

शिवसेना में छिड़ी कलह और बगावत पर भाजपा वेट एण्‍ड वॉच की रणनीति को अपना रही है। वह किसी भी तरह की जल्‍दबाजी में नहीं है। भाजपा चाहती है कि पहले शिवसेना के बगावती गुट अर्थात एकनाथ शिंदे गुट को वैधानिक मान्‍यता मिल जाए। इसके बाद शांति से सरकार गठन किया जाए। जब तक ऐसा नहीं होता, भाजपा महाराष्‍ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्‍व में महाविकास अघाड़ी सरकार पर छाए राजनीतिक संकट को शिवसेना का अनदरूनी मामला बता रही है।

उद्धव ठाकरे नहीं, एनसीपी के नरहरि जिरवाल है एकनाथ शिंदे के निशाने पर

एकनाथ शिंदे ने भले ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत की है, लेकिन असल में उनके निशाने पर एनसीपी विधायक नरहरि‍ जिरवाल है। दरअसल, महाराष्‍ट्र विधानसभा अध्‍यक्ष का पद लगभग 9 महीनों से खाली था। एनसीपी नेता अैर डिप्‍टी स्‍पीकर नरहरि जिरवाल ही स्‍पीकर का कार्य का निर्वाहन कर रहे है। एकनाथ शिंदे डिप्‍टी स्‍पीकर को स्‍पीकर पद से हटाने के लिए नोटिस दे चुके हैं। वहीं डिप्‍टी स्‍पीकर के पास एक दिन पहले शिवसेना ने 12 बागी विधायकों की सदस्‍यता रद्द करने की याचिका दायर की थी।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार नरहरि को स्‍पीकर पद से हटाने के लिए पहले 14 दिन का नोटिस देना होगा। एकनाथ शिंदे गुट नोटिस जारी कर चुके हैं। शिंदे गुट अब नरहरि जिरवाल को स्‍पीकर पद से हटाने का प्रस्‍ताव पारित कराकर एक तीर से दो निशाने साधना चाहता है। जानकारों की माने तो यदि उद्धव ठाकरे सरकार नरहरि जिरवाल को डिप्‍टी स्‍पीकर पद पर बना नहीं रख सके तो लोकतांत्रिक परम्‍पराओं के अनुसार यह उद्धव ठाकरे की हार होगी और उन्‍हें मुख्‍यमंत्री पद से इस्‍तीफा देना होगा। शिंदे गुट की रणनीति स्‍पष्‍ट है कि नरहरि जिरवाल को स्‍पीकर पद से हटते ही भाजपा के साथ मिलकर अपने पक्ष का स्‍पीकर बनाकर दलबदल की कार्रवाई से बचााजा सकता है।यदि उद्धव ठाकरे इसके बावजूद इस्‍तीफा नहीं देते हैं तो भाजपा के साथ मिलकर उनके खिलाफ अप्रस्‍ताव लाया जा सकता है।

पार्टी के नाम और सिंबल पर टिका है उद्धव गुट का भविष्‍य

उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट का भविष्‍य बहुत कुछ पार्टी के शिसेना नाम और धनुष तथा तीर चुनाव चिन्‍ह पर निभर करता है। जैसा प्रतीत हो रहा है कि एकनाथ शिंदे गुट के पास पार्टी के दो तिहाई विधायकों का समर्थन है, ऐसे में संभावना है कि चुनाव आयोग भी एकनाथ शिंदे गुट के पक्ष में अपना फैसला सुना दे और पार्टी का नाम और सिंबल एकनाथ शिंदे गुट के पक्ष में चला जाए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उद्धव ठाकरे गुट को अभी और भी अधिक झटके लग सकते हैं। बताया जा रहा है कि शिवसेना के 18 में से 14 सांसद भी एकनाथ शिंदे के पाले में हैं। इसे एकनाथ शिंदे गुट के पार्टी और चुनाव चिन्‍ह पर दावे को मजबूत करती है।

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