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जेवर से दादरी तक सियासी शंखनाद: उद्घाटन बनाम रैली के बीच 2027 की बिसात बिछी

Political Clarion Call from Jewar to Dadri: The Chessboard for 2027 Is Set Amidst a Clash of Inaugurations and Rallies.

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) :    गौतम बुद्ध नगर में आगामी 28 और 29 मार्च को बड़े राजनीतिक आयोजन होने जा रहे है। 28 मार्च को जेवर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। जबकि 29 मार्च को दादरी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समता भाईचारा रैली को को सम्बोधित करेंगे। दोनों ही आयोजन 2027 के विधानसभा चुनाव का बिगुल फुकेंगे। दोनों आयोजनों को मेगा पोलिटिकल कांटेस्ट मना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपनी लोकप्रियता है जबकि अखिलेश यादव भी विपक्ष का बड़ा चेहरा हैं। प्रधानमंत्री क़ी सभा में लगभग डेढ़ से दो लाख लोगों के पहुंचने क़ी संभावना है जबकि अखिलेश यादव क़ी रैली के आयोजन स्थल में अधिकतम दस से पंद्रह हजार लोगों क़ी क्षमता है। इसके बावजूद मेरा मानना है कि दिनों आयोजनों में कोई आपसी प्रतिस्पर्धा नहीं है। दोनों ही आयोजन अपने संदर्भ में प्रसंगिकता है। दोनों आयोजनों में आपसी प्रतिस्पर्धा से कहीं अधिक भाजपा और सपा के नेताओं के बीच श्रेय लूटने की होड़ लगी है।

प्रधानमंत्री के द्वारा नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन की बात करें तो स्थानीय सांसद डॉ महेश शर्मा ने केंद्र सरकार में मंत्री बने रहने के दौरान इस दिशा में किए गए अपने प्रयासों का जिक्र लोगों के बीच कर रहे है। वह लोगों को बता रहे है कि कठिन दौर से निकलकर आज का दिन आया है।जबकि जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह अपने विधायक काल में किए गए सहयोग का जिक्र कर हवाई अड्डे के सफल उद्घाटन की बात कह रहे है। वहीं एक निजी न्यूज चैनल पर अखिलेश यादव ने भी जेवर एयरपोर्ट के निर्माण की शुरुआत कराने का दावा किया है। कुछ अधिकारी भी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष जेवर एयरपोर्ट के सफल निर्माण का श्रेय खुद को देते हैं। अखिलेश यादव की दादरी रैली की बात करें तो आगामी विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल फूँकने के लिए समाजवादी पार्टी द्वारा दादरी विधानसभा के दादरी नगर को चुना है। यह निर्णय पार्टी स्तर पर रणनीतिक तौर पर समझ से परे है जबकि यह निर्णय आयोजकों की रणनीति का बड़ा हिस्सा है।

दरअसल, दादरी विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी आज तक जीत दर्ज नहीं कर सकी है। वहीं दादरी सीट समाजवादी पार्टी की उन विधानसभा सीटों में से एक है जहां पार्टी का संगठन में सबसे कमजोर है। ऐसे में विधान सभा चुनाव का बिगुल यहां से फूँकना पार्टी के सामने कई तरह के सवाल खडे करता है। क्या पार्टी यह मानकर चल रही है की इस विधानसभा सीट पर अचानक कोई चमत्कारिक परिणाम देने की स्थिति में आ गई है? अखिलेश यादव की इस रैली के बाद दादरी विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के संगठन में क्या कोई बड़ा बदलाव आएगा जिसका लाभ पार्टी को पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मिलेगा ?

खैर, यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन रैली का टाइटल और जमीनी स्तर की तैयारियां आपस में कतई मेल नहीं खा रही हैं। फिर भी पार्टी के स्थानीय नेता निजी आधार पर इस रैली से अपने लिए पार्टी स्तर पर बड़ी सम्भावनाएं देख रहे हैं। इस दिशा में सबसे बड़ा नाम पार्टी प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता राजकुमार भाटी का है। इस सीट से लगातार कई विधानसभा चुनाव हारने के बाद उनकी राजनीतिक शैली में बड़ा बदलाब आया है जिसके चलते उनके ऊपर आरोप भी लगते रहे है। समाजवादी पार्टी की नई सोशल इंजीनियरिंग का नया फार्मूला पीडीए उनकी राजनीतिक शैली को खूब रास आ रहा है। परिणामस्वरूप वह पार्टी में पिछड़ा वर्ग, विशेषकर गुर्जर समाज, का बड़ा चेहरा बनकर उभरे है।

हालांकि पार्टी में स्वयं को सबसे बड़ा गुर्जर नेता साबित करना राजकुमार भाटी के सामने बड़ी चुनौती है। फिर भी रैली के सफल आयोजन का श्रेय का बड़ा हिस्सा राजकुमार भाटी के पक्ष में जाएगा। रैली की सफलता के बाद राजकुमार भाटी की राजनीतिक जिज्ञासा विधान परिषद पर जाकर तृप्त करेगी? यह रैली उनके लिए संभावना के द्वार खोल सकती है। पार्टी में यह चर्चा भी जोरों पर है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए होने वाले टिकट वितरण, विशेषकर गुर्जर बाहुल्य सीटों के लिए प्रत्याशी चयन, में उन्हें त्वज्जो मिल सकती है।

भले ही समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव की रैली को भाईचारा रैली का नाम दे रही हो लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि आयोजकों ने इसका ताना बाना समाजवादी पार्टी की गुर्जर कार्यकर्ता रैली का रूप देने के इर्दगिर्द ही बुना है। रैली में भीड़ जुटाने के लिए पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी नेता लगातार जनसंपर्क कर रहे है, लेकिन रैली की सफलता की गारंटी रैली स्थल से चंद कदमों की दूरी पर स्थित मुस्लिम आबादी ही होगी।

पार्टी के वरिष्ठ नेता गजराज नागर इस रैली के माध्यम से सिकन्द्राबाद विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी को साधने का पूरा प्रयास करेंगे। रैली के बाद अखिले यादव का उनके बदलपुर आवास पर भोज का कार्यक्रम गजराज नागर की रणनीति को बल प्रदान करेगा। जबकि रैली के माध्यम से दादरी विधानसभा से टिकट पाने के लिए पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी रहे डॉ महेंद्र सिंह नागर, पार्टी के वर्तमान जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी और पूर्व जिलाध्यक्ष फकीरचंद नागर अखिलेश यादव और पार्टी के नीति निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेंगे।

अंत में, रैली के मुख्य मंच के बेकग्राउंड में स्थित सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा को लेकर 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पूर्व इसी मैदान पर हुई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली से पूर्व पैदा हुए विवाद के जख्मों को हर कर सकती है।

 

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