यमुना प्राधिकरण ने बनाई ऐसी व्यवस्था, अधिग्रहण के बाद किसान जमीन पर नहीं कर सकेंगे आबादी का दावा, जानिए क्या है पूरा मामला ?
Yamuna Authority has made such a system that after acquisition, farmers will not be able to claim habitation on the land

Panchayat 24 : गौतम बुद्ध नगर जिले में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा जमीन अधिग्रहण के बाद किसानों और प्राधिकरणों के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव की स्थित बनी हुई है। किसान लगातार अपनी मांगों को लेकर आन्दोलन तथा धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। कई मुद्दे इतने जटिल हो गए है कि उनके समाधान के लिए सरकार और शासन स्तर से सुलह समझौते के प्रयास करने पड़ रहे हैं। इनमें आबादी का मुद्दा सबसे अहम हैं। यमुना प्राधिकरण ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा से अनुभव लेते हुए नई व्यवस्था बनाई है। इसके बाद प्राधिकरण द्वारा जमीन अधिग्रहण किए जाने के बाद किसानों के लिए किसी भी प्रकार का निर्माण करके उस जमीन पर आबादी का दावा पेश करना आसान नहीं होगा।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, प्राधिकरणों द्वारा विकास के लिए किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया जाता है। इसके लिए संबंधित गांवों की जमीन के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी कर दी जाती है। जमीन अधिग्रहण के लिए शुरू की गई कानूनी प्रक्रिया के बारे में अधिकांश किसानों को जानकारी नहीं होती है। किसान आवश्यकता के अनुसार सामान्य रूप से अधिसूचित जमीन पर निर्माण कार्य कर लेते हैं। बाद में अधिग्रहण के समय प्राधिकरणों द्वारा स्वीकृत नहीं किया जाता है। वहीं, किसानों द्वारा इस जमीन को आबादी की जमीन बताया जाता है। ऐसे में प्राधिकरण और किसानों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो जाता है।
यमुना प्राधिकरण ने उठाया यह कदम
प्राधिकरणों और किसानों के बीच आबादी की जमीन को लेकर होने वाले टकराव से बचने के लिए यमुना प्राधिकरण ने संबंधित गांवों की जमीन और गांवों की सीमाओं को चिन्हित करने के लिए सर्वे शुरू किया है। सर्वे में यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि गांव की आबादी कहां पर हैं, कहां पर निर्माण हुआ है, कौनसी जमीन खाली है। सर्वे के आधार पर ही प्राधिकरण जमीन अधिग्रहण करेगा। हाल ही में यमुना प्राधिकरण (यीडा) ने 40 गांवों की जमीन का सर्वे किया है। इसके बाद कोई भी किसान खाली जमीन पर आबादी का दावा पेश नहीं कर सकेगा। प्राधिकरण विकास के लिए इन गांवों की 15 हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण करेगा।
इन गांवों का किया गया है सर्वे
इन गांवों में रबूपुरा, तिरथली, चकबीरमपुर, बीरमपुर, करौली बांगर, मोहम्मदाबाद खेड़ा, तकीपुर बांगर, मयाना, आकलपुर, मकसूदपुर, भुन्ना तगा, कुरैब, मुद्रिगढ़ी, चकजलालाबाद, मुरादगढ़ी, टप्पल बाजना, डोरपुरी, स्यारील, मुढ़रह, कल्लूपुरा, कानपुर, जौनचाना, नंगला शाहपुर, इस्माइलनगर उर्फ भोवरा, भीकनपुर, आकलपुर, रन्टेरा दस्तमपुर, मिल्क करीमाबाद, मकसूदपुर, मोहम्मदपुर जादौन, फाजिलपुर आदि गांव शामिल है।
बसाए जाएंगे नए सेक्टर
यमुना प्राधिकरण (यीडा) द्वारा जिन 40 गांवों का सर्वे किया है उनकी 15 हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण करके नए सेक्टर बसाने की योजना पर काम कर रहा है। यहां प्राधिकरण की सेक्टर पांच, छ:, सात, आठ, नौ, दस और ग्यारह बसाए जाने की योजना है। इन सेक्टरों में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शुरू होंगे। इन सेक्टरों के लिए जमीन अधिग्रहण पर प्राधिकरण 13 हजार 8 सौ 97 करोड़ रूपये खर्च करेगा। यहां औद्योगिक, संस्थागत और आवासीय सेक्टरों सहित, सड़क, सीवर, पार्क, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर 77 हजार 3 सौ 77 करोड़ की धनराशि खर्च की जाएगी।
यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह का कहना है कि अधिग्रहण के बाद किसान जमीन को आबादी की बताकर लीजबैक के लिए आंदोलन करते रहे हैं । इसको लेकर विवाद होते हैं । पूर्व में हुए सैकड़ोंं लीजबैक के मामलों और विवादों का अब तक निपटारा नहीं हो सका है । ऐसे में अधिग्रहण पूर्व सर्वे कराकर जमीन अधिग्रहण से जुड़ी एक बड़ी समस्या का समाधान करने का प्रयास किया गया है