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गौतम बुद्ध नगर लोकसभा चुनाव का अनोखा रिकार्ड : कभी ब्‍लूचिस्‍तान तो कभी राजस्‍थान से आए कर्मयोगी बने है जनता की पहली पसंद, इस बार कौन ?

Unique record: Karmayogi, sometimes from Balochistan and sometimes from Rajasthan, has become the first choice of the people of Gautam Buddha Nagar, a record will be made again!

Panchayat 24 : गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर होने वाले चुनाव में जातीय समीकरणों के साथ-साथ सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला एक और मुद्दा ‘स्‍थानीय बनाम बाहरी’ हमेशा उभरकर सामने आता है। लेकिन यहां की जनता ने कभी भी जाति अथवा स्‍थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे को चुनाव में निर्णायक साबित नहीं होने दिया है। यहां के लोगों ने स्‍थानीय जन्‍मभूमि वाले उम्‍मीदवारों की अपेक्षा बाहर से आकर यहां की जमीन को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले लोगों को ही चुनाव में पहली पसंद बनाया है। आजादी के बाद यहां पर अधिकांशत: स्‍थानीय उम्‍मीदवार को जीत नसीब नहीं हुई है। यहीं कारण है पर कभी ब्‍लूचिस्‍तानी तो कभी राजस्‍थानी को यहां की जनता ने गले से लगाने और कंधों पर बिठाने से परहेज नहीं किया। उन्‍हें भरपूर प्‍यार भी दिया है। स्‍थानीय प्रत्‍याशी अभी तक जनता के इस प्‍यार से महरूम ही रहा है। वर्तमान में भी स्‍थानीय सांसद के खिलाफ विरोधी दल के किसी उम्‍मीदवार का कोई चमत्‍कारिक प्रदर्शन ही इस सिलसिले को तोड़ सकता है। इसकी संभावना अभी दिखाई नहीं दे रही हैं। हालांकि पूर्व की खुर्जा लोकसभा सीट पर कुछ अपवाद हुए है जो स्‍थानीय होते हुए यहां से चुनाव जीते हैं। लेकिन गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट के अस्तित्‍व में आने के बाद यह रिकार्ड लगातार बना हुआ है।

आजादी के बाद क्षेत्र की जनता का ब्‍लूचिस्‍तानी ने संसद में किया प्रतिनिधित्‍व 

देश की आजादी के बाद साल 1952 में हुए पहले आम चुनावों में वर्तमान गौतम बुद्ध नगर लोकसभा बुलन्‍दशहर जिले के अन्‍तर्गत आता था। इस आम चुनाव में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के कन्‍हैयालाल बाल्मिकी को जनता ने सांसद चुना। उन्‍होंने 1957 के लोकसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की। साल 1961 में खुर्जा लोकसभा सीट अस्तित्‍व में आई। खुर्जा लोकसभा सीट पर भी कन्‍हैयालाल बाल्मिकी ने जीत दर्ज की। उन्‍होंने पहले प्रजा सोशलिस्‍ट पार्टी के यादराम और रामचरण को लगातार चुनाव हराकर चुनावी जीत की हैट्रिक बनाई। कन्‍हैयालाल बाल्मिकी मूलरूप से ब्‍लूचिस्‍तान के के रहने वाले थे। उनका जन्‍म ब्‍लूचिस्‍तान के खाानई गांव में 14 मार्च 1919 को हुआ था। उनकी शिक्षा बुलन्‍दशहर, मेरठ और तत्‍कालीन इलाहबाद में हुई। यहां रहकर वह भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के बड़े नेताओं के संपर्क में आए और राजनीति में प्रवेश किया।

गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर जनता ने कर्म देखा है जन्‍म नहीं

गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद गौतम बुद्ध नगर लोकसभा अस्तित्‍व में आई है। पहली बार यहां साल 2009 में लोकसभा चुनाव हुए थे। इस सीट पर जनता ने स्‍थानीय और बाहरी में कोई अन्‍तर न करते हुए सभी को गले से लगाया है। यहां की जनता ने उम्‍मीदवार के कर्म को तवज्‍जो दी है। फिर चाहे वह कहीं से भी आकर यहां बसा हो। इस चुनाव में लोगों को उम्‍मीद थी कि बाहरी उम्‍मीदवार की जीत का सिलसिला टूट जाएगा। लेकिन चुनाव परिणाम ने इस आशंका को गलत साबित कर दिया। चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के उम्‍मीदवार सुरेन्‍द्र सिंह नागर को जीत मिली। सुरेन्‍द्र सिंह नागर का पैतृक गांव वर्तमान में बागपत जिले का मेहरमपुर गांव है। उनके पिता दूध कारोबार के सिलसिले में बुलन्‍दशहर जिले के गुलावठी में आकर बस गए थे।

साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में चेहरे बदले, परिणाम नहीं

गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर साल 2014 और 2019 के आम चुनाव में भी यह सिलसिला नहीं टूटा। केवल चेहरे बदल गए, परिणाम वहीं रहा। साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा उम्‍मीदवार डॉ महेश शर्मा ने भारी वोटों से स्‍थानीय उम्‍मीदवारों को चुनाव हरा दिया। डॉ महेश शर्मा मूलरूप से राजस्‍थान के रहने वाले हैं। उनका जन्‍म 30 सितंबर 1959 को राजस्‍थान के अलवर जिले के नीमराना के पास मनेठी गांव में हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव में हुई। वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा के लिए वह दिल्‍ली चले गये । उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज से स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त की। इसके बाद उन्‍होंने नोएडा को अपनी कर्मभूमि बनाया और नोएडा में आकर बस गए। बतौर चिकित्‍सक वह पिछले 35 सालों से समाज की सेवा कर रहे है।

अटल युग में भी बाहरी उम्‍मीदवार सांसद चुनकर पहुंचा लोकसभा 

अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में तत्‍कालीन खुर्जा लोकसभा सीट पर साल 1996, 1998, 1999 और 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के अशोक प्रधान ने जीत दर्ज की। अशोक प्रधान मूलरूप से दिल्‍ली के कृष्‍णनगर क्षेत्र के घोंडली गांव के रहने वाले हैं। बाद में वह नोएडा आकर बस गए।

दूसरे बाहरी उम्‍मीदवार भी चुनाव जीतकर पहुंचे हैं संसद

 खुर्जा लोकसभा सीट पर साल 1989 में जनता दल के टिकट प जीत दर्ज करने वाले भगवानदास राठौर मूलरूप से जिला हरिद्वार के रहने वाले थे। 1984 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाले वीरसेन मूलरूप से हापुड़ के रहने वाले थे। 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले त्रिलोकचंद भी बुलन्‍दशहर के शिकारपुर के रहने वाले थे। 1971 में कांग्रेस के टिकट पर खुर्जा लोकसभा से चुनाव जीतकर संसद पहुंचने वाले हरि सिंह बुलन्‍दशहर के रहने वाले थे। बता दें कि बुलन्‍दशहर लोकसभा सीट एक अलग लोकसभा सीट है। खुर्जा लोकसभा सीट में बुलन्‍दशहर की सिकन्‍द्राबाद, जेवर, खुर्जा, छतारी और दादरी विधानसभाएं आती थी।

खुर्जा लोकसभा सीट पर हुए कुछ अपवाद

हालांकि खुर्जा लोकसभा सीट पर स्‍थानीय होकर भी जीत दर्ज करने वालों में कुछ अपवाद भी रहे हैं। इनमें साज 1991 में जनता दल के टिकट पर चुनाव जीतने वाले तथा बाद में कांग्रेस में शामिल होने वाले रोशनलाल मूलरूप से सिकन्‍द्राबाद के रहने वाले थे।1967 में सोशलिस्‍ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले रामचरण खुर्जा लोकसभा की डिबाई विधानसभा के रहने वाले थे। वहीं,1977 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले मोहनलाल पिपिल जरूर खुर्जा लोकसभा की सिकन्‍द्रबाद विधानसभा के ही उम्‍मीदवार ही थे।

डॉ महेश शर्मा इस बार भी रिकार्ड को रखेंगे कायम !

लोकसभा चुनाव 2024 में गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर एक बार फिर से यह अनोखा रिकार्ड आगे बढ़ने जा रहा है। राजस्‍थान से आकर नोएडा को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले डॉ महेश शर्मा को भाजपा ने गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट से उम्‍मीदवार बनाया है। वह लगातार चौथी बार पार्टी प्रत्‍याशी बनाए गए हैं। लगातार दो बार साल 2014 और 2019 में भारी वोटों से जीत दर्ज कर चुके हैं। वर्तमान में गौतम बुद्ध नगर में चुनाव को लेकर जो माहौल बना हुआ है। उससे प्रतीत हो रहा है कि भाजपा प्रत्‍याशी डॉ महेश शर्मा एक बार फिर इस लोकसभा सीट पर बड़ी जीत की ओर बढ़ रहे हैं।

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