अन्य जिलेउत्तर प्रदेश

पश्चिमी यूपी भाजपा के दो दिग्‍गज संजीव बालियान और संगीत सोम एक बार फिर आए आमने सामने, जानिए क्‍या है मामला ?

Two stalwarts of western UP BJP Sanjeev Balyan and Sangeet Som once again came face to face, know what is the matter?

Panchayat 24 : पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के दो दिग्‍गज नेता संजीव बालियान और संगीत सोम के बीच एक बार फिर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। दोनों नेता एक मुद्दे को लेकर एक दूसरे के सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं। दरअस, इस बार दाोनों के एक दूसरे के आमने सामने आने का मुद्दा बनी है पश्चिम उत्‍तर प्रदेश को अलग राज्‍य बनाए जाने की मांग। मुजफ्फफरनगर के पूर्व सांसद संजीव बालियान जहां पश्चिम उत्‍तर प्रदेश को एक अलग राज्‍य बनाए जाने के पक्ष में हैं। वह कई बार अलग अलग मौकों पर इसकी मांग करते रहे हैं। वहीं, मेरठ की सरधना विधानसभा के पूर्व विधायक संगीत सोम ने पश्चिमी उत्‍तर उत्‍तर प्रदेश को एक अलग राज्‍य बनाए जाने की किसी भी मांग का हर स्‍तर पर विरोध किए जाने की बात कही है।

क्‍या है पूरा मामला ?

दरअसल, पश्चिम उत्‍तर प्रदेश को अलग राज्‍य बनाए जाने की मांग पुरानी है। कभी हरित प्रदेश, कभी किसान प्रदेश तो कभी पश्चिम उत्‍तर प्रदेश के नाम से पश्चिम उत्‍तर प्रदेश के लगभग 29 जिलों को मिलाकर एक अलग राज्‍य बनाए जाने की मांग की जाती रही है। इसमें जाट लैंड कहे जाने वाले उत्‍तर प्रदेश के सभी जिले शामिल है। राष्‍ट्रीय लोकदल अलग प्रदेश बनाए जाने का हिमायती रहा है। उत्‍तर प्रदेश के सभी बड़े राजनीतिक दल भाजपा, कांग्रेस, बसपा और भाजपा हालांकि पश्चिम उत्‍तर प्रदेश को अलग राज्‍य बनाए जाने के विरोधी ही रहे हैं। लेकिन साल 2012 के विधानसभा चुनाव से पूर्व बसपा प्रमुख मायावती ने साल 2012 में उत्‍तर प्रदेश को क्षेत्रफल एवं आबादी के लिहाज से चार अलग राज्‍यों हरित प्रदेश, अवध प्रदेश, बुंदेलखंड और पूर्वांचल प्रदेश के बांटने का प्रस्‍ताव पेश किया था। हालांकि यह प्रस्‍ताव गिर गया। 2024 के लोगसभा चुनाव से पूर्व बहुजन समाज पार्टी ने एक बार फिर से पश्चिम उत्‍तर प्रदेश को अलग राज्‍य बनाए जाने का मुद्दा उठाया था। हालांकि सपा, कांग्रेस और भाजपा इस मुद्दे पर एक साथ खड़ी नजर आती हैं। तीनों ही दलों ने पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश को अलग राज्‍य बनाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। बता दें कि प्रशासनिक तौर पर पश्चिम उत्‍तर प्रदेश में आने वो जिलों में मेरठ, बुलंदशहर, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा, संभल, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, एटा, हाथरस, कासगंज, इटावा, औरैया और फर्रुखाबाद शामिल हैं।

संजीव बालियान ने उठाई पश्चिम उत्‍तर प्रदेश बनाए जाने की मांग

दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पूर्व मुजफ्फरनगर के तत्‍कालीन भाजपा सांसद संजीव बायिान ने पश्चिम उत्‍तर प्रदेश को अलग राज्‍य बनाए जाने की मांग उठाई थी। संजीव बालियान का तर्क रहा है कि छोटे राज्‍य प्रशासनिक रूप से अधिक सुविधापूर्ण होते हैं। छोटे राज्‍यों में विकास तेजी से होता है। उन्‍होंने इसके लिए उत्‍तर प्रदेश से टूटकर बने उत्‍तराखंड राज्‍य का उदाहरण देते हुए कहा है कि उत्‍तराखंड ते तेजी से विकास किया है। वर्तमान में भी वह अपनी मांग पर डटे हुए हैं। उन्‍होंने हाल ही में मेरठ में पश्चिम उत्‍तर प्रदेश को लेकर आयोजित एक कार्यकम में कहा है कि पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश अलग बनाए जाना आने वाली पीढियों के हित में हैं।

मैं  पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश को अलग राज्‍य बनाए जाने का समर्थन करता हूं। इस मांग का मैं पहले भी समर्थन करता था, आज भी करता हूंं। उत्‍तर प्रदेश के भविष्‍य के लिए उत्‍तर प्रदेश का बंटवारा होना चाहिए। यह कोई पश्चिम और पूर्व की लड़ाई नहीं है। पूरे उत्‍तर प्रदेश को विकास के लिए बंटवारें की आवश्‍यकता है। चाहे फिर पश्चिम उत्‍तर प्रदेश की बात हो, बूंदेलखंड की बात हो या फिर पूर्वांचल उत्‍तर प्रदेश की हो। इसमें जाति, धर्म अथवा क्षेत्र का कोई विषय नहीं है। मैं यह बात पार्टी प्रतिनिधि के रूप में नहीं कह रहा हूं। मैं यह मांग एक नागरिक एवं निजी तौर पर कर रहा हूं।

पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश को किसी भी कीमत पर नहीं बनने दिया जाएगा

वहीं, पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश बनाए जाने की मांग का मेरठ के सरधना से पूर्व विधायक संगीत सोम ने कड़ा विरोध किया है। उन्‍होंने कहा है कि किसी भी कीमत पर पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश को नहीं बनने दिया जाएगा। संगीत सोम ने कहा कि पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश केा अलग राज्‍य बनाए जाने की मांग संजीव सोम की अपनी निजी मांग हो सकती है। ना तो यह भाजपा संगठन का विचार है और न ही यह क्षेत्र की जनता चाहती है। उन्‍होंने कहा कि पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश का विचार विनाशकारी साबित होगा। उन्‍होंने कहा कि पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश तेजी से विकास कर रहा है। इस लिए इसका बंटवारा करने की आवश्‍यकता नहीं है। यदि ऐसा किया गया तो इस क्षेत्र की तेजी से डेमोग्राफी बदलेगी। उन्‍होंने सुझाव दिया कि यदि पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश को दिल्‍ली के साथ जोड़ा जाता है तो हम उसका स्‍वागति करंगे। ऐसा करने से न तो नए सिरे से लोकसभा और विधानसभाओं का परिसीमन करना होगा। दिल्‍ली का हाईकोर्ट ही इस क्षेत्र का भी हाई कोर्ट होगा।

पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश को अलग राज्‍य बनाए जाने की मांग आवश्‍यक और अप्रासंगिक है। पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश का विकास तेजी से हो रहा है। हम इसका तरह की किसी भी मांग का खुलकर विरोध करते हैं। उन्‍होंने कहा कि जिस तरह से इस क्षेत्र की डेमोग्राफी तेजी से बदली जा रही है, यह प्रदेश एक मिनी पाकिस्‍तान बन जाएगा। हम ऐसा कभी भी नहीं होने देंगे। संजीव बालियान की यह मांग उनकी‍ निजी मांग हो सकती है। पार्टी का ऐसा कोई विचार नहीं है।

Related Articles

Back to top button