स्पेशल स्टोरी

बिसाहड़ा में अकलाख की मौत के बाद देश में साम्‍प्रदायिक सौहार्द को खतरे में बताने वाले देवला में ब्रह्मजीत की हत्‍या पर पीडित परिवार को सांत्‍वना देने तक नहीं पहुंच सके

Why are those who said that communal harmony is in danger after the death of Akhlaq in Bisahada silent on the murder of Brahmjeet in Deola?

Panchayat 24 :  गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के सेंट्रल नोएडा जोन में देवला गांव में एक सप्‍ताह पूर्व ब्रह्मजीत सिंह नामक व्‍यक्ति की हत्‍या हुई थी। पुलिस मामले में कानूनी कार्रवाई कर रही है। कुछ नामज आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। शेष फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की भी जल्‍द गिरफ्तारी का पुलिस दावा कर रही है। ब्रह्मजीत की मौत को देवला गांवासी भूलकर आगे बढ़ जाएंगे। पीडित परिजन भी असहनीय पीड़ा को मन में लिए अपने कामकाज में जुट जाएंगे। इस घटना ने देश में तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों, एजेंडाबाज बुद्धिजीवियों और किसी की मौत की आड़ में जहरीले बयान देकर सामाजिक माहौल को खराब करने वाले समाज के तथाकथित ठेकेदारों के चेहरों से नकाब हटा दिया है।

देवला गांव की घटना ने देवला से 15 किमी दूर बिसाहड़ा गांव में 28 सितंबर 2015 में अकलाख हत्‍याकांड़ की याद दिला दी। दरअसल, बिसाहड़ा में बहुसंख्‍यक भीड़ ने अल्‍पसंख्‍यक समाज के अकलाख की हत्‍या कर दी थी। इस हत्‍याकांड़ को गांव के चंद शरारती तत्‍वों ने अंजाम दिया। इस हत्‍याकांड़ को देश भर में इस तरह से पेश किया गया कि  गांव का सम्‍पूर्ण बहुसंख्‍यक हिन्‍दू समाज इस हत्‍याकांड़ में शामिल था। देश का शायद ही कोई राजनीतिक दल और बड़ा नेता होगा जिसने बिसाहड़ा पर बयान न दिया हो। असदुद्दीन ओवेसी, अरविन्‍द केजरीवाल, नसमुद्दीन सिदीकी और राहुल गांधी बिसाहड़ा पहुंचे।

बसपा और उत्‍तर प्रदेश के सत्‍ताधारी दल समाजवादी पार्टी ने बिसाहड़ा में डेरा डाल दिया। संगीत सोम सहित कई भाजपा नेता और हिन्‍दुवादी संगठनों के लोग भी बिसाहड़ा पहुंच गए। समाजवादी पार्टी ने किस तरह से पीडित परिवार की मदद की यह किसी से छिपी हुई नहीं है। इस घटना के बाद तथाकथित बु‍द्धिजीवी वर्ग को देश असहिष्‍णुता का माहौल  और साम्‍प्रदायिक सौहादर्य खतरे में महसूस होने लगा। अवार्ड वापसी अभियान चलाया गया। घटना का अन्‍तर्राष्‍ट्रीयकरण करने का प्रयास किया गया। समाज के ठेकेदारों ने मुसलमानों को भड़काने का प्रयास किया। महीनों गांव में पुलिस बल तैनात रहा। पु‍लिस पर राजनी‍तिक दबाव में कार्रवाई करने का भी आरोप लगा।

वहीं, देवला गांव निवासी ब्रह्मजीत बीते 29 नवंबर को रहस्‍यमय तरीके से गायब हो गया था। बीते रविवार गांव के पास पक्षी विहार के जंगलों में मिला था। स्‍पष्‍ट हो गया कि हत्‍या कर शव को जंगल में छिपाने के लिए छिपाया गया हे। पुलिस ने शव को कब्‍जे में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार ब्रह्मजीत की हत्‍या हारून नामक एक व्‍यक्ति ने अपने साथी गुलनशन तीन अन्‍य लोगों के साथ मिलकर 85 हजार रूपये के लेनदेन में हुई थी। पुलिस ने पांच लोगों को नामजद करते हुए चार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी हारून ब्रह्मजीत से परिचित था। उसका ब्रह्मजीत का परिवार हारून को अपने हर कार्यक्रम में बुलाता था। जरूरत पड़ने पर हारून ब्रह्मजीत से आर्थिक सहयोग लेता था। यही आर्थिक मदद ब्रह्मजीत की मौत का कारण भी बन गई।

घटना के छ: दिन बाद इस घटना के बारे में पीडित परिवार, गांव के लोग और पुलिस के अतिरिक्‍त शायद ही किसी को घटना से कोई सरोकार हो। घटना पर राष्‍ट्रीय बयान की बात छोड़ ही दीजिए किसी स्‍थानीय नेता ने भी बयान नहीं दिया है। ब्रह्मजीत के घर शौक प्रकट करने पहुंचे लोगों का कहना था कि देश की राजनीतिक चरित्र को देखते हुए मुस्लिम वोटबैंक पर राजनीति करने वाले दलों और उनके नेताओं की चुप्‍पी समझ में आती है। इनकी नजर में अकलाख और ब्रह्मजीत की हत्‍या में जमीन आसमान का अंतर है। दुख इस बात का है कि हिन्‍दुओं को एक रहोगे तो सेफ रहोगे ओर बंटोगे तो कटोगे जैसा नारा देने वाली भाजपा और पार्टी के नेताओं ने ब्रह्मजीत की हत्‍या पर आंखें मूंद ली हैं। शौक प्रकट करने भाजपा का कोई स्‍थानीय नेता पीडित के घर तक नहीं पहुंचा है। हिन्‍दुओं के नाम पर गांव में वोट मांगने वाली भाजपा के नेताओं को पीडित परिजनों से मिलकर सांत्‍वना देने तक का समय नहीं है।

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