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व्‍यवस्‍था की उदासीनता से तिलपता बना नासूर, नहीं बदले हालात तो भविष्‍य में समस्‍या के तिलपता मॉडल की होगी भरमार

Tilpata has become a sore spot due to the indifference of the authority and administration, if the situation does not change then there will be an abundance of Tilpata model in the future

Panchayat 24 : गौतम बुद्ध नगर जिले में आजकल तिलपता गांव काफी चर्चा में बना हुआ है। चर्चा का कारण तिलपता गांव में सड़क पर लगने वाला जाम है। यहां लगने वाले जाम की हालत कुछ ऐसी है कि लोगों को चंद मिनटों की दूरी तय करने में घंटों तक लाखों वाहन चालकों को जूझना पड़ता है। यह समस्‍या गरीब की भूख, मजदूर की गरीबी, आम आदमी की मजबूरी और तिलपता गांव के लोगों की लाचारी ही है, शायद इसी लिए लोग परेशानियों को झेलते हुए हर रोज यहां से गुजरने को मजबूर हैं।

ऐसा नहीं है कि जिले में तिलपता ऐसा अकेला उदाहरण है जहां हालात इतने गंभीर है। जिस स्‍थान पर भी तिलपता गांव जैसे परिस्थितयां और कारण उत्‍पन्‍न होने लगते हैं, उस मार्ग पर तिलपता गांव समस्‍या पैदा होने लगती है। दादरी नोएडा मोड़ पर हल्‍द्वानी मोड़ इसका ताजा उदाहरण है।

व्‍यवस्‍था चाहकर भी इस समस्‍या से लोगों को छुटकारा नहीं दिला पा रही है। हालात यह बन गए हैं कि तिलपता पूरी व्‍यवस्‍था के लिए नासूर बन चुका है। यदि हालात जल्‍द नहीं बदले तो जिले में समस्‍या के तिलपता मॉडलों की भरमार होगी, जिससे पीछा छुड़ाना और नजर चुराना प्राधिकरण, प्रशासन, पीडब्‍ल्‍यूडी और समूची व्‍यवस्‍थास से जुड़े जनप्रतिनिधियों के लिए आसान नहीं होगा।

क्‍या है पूरा मामला ?

दरअसल, नोएडा को दादरी से जोड़ने वाला सबसे पुराना मार्ग दादरी-सूरजपुर-नोएडा मार्ग ही है। यह मार्ग जिले के सबसे व्‍यस्‍त सड़क मार्गों में से एक है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों वाहनों में लाखों लोग गुजरते हैं। वर्तमान में इस मार्ग पर जल निकासी की उचित व्‍यवस्‍था नहीं होने के कारण नालियों से निकलने वाला पानी सड़क पर हमेशा पानी जमा रहता है, लेकिन वाहन चालकों को उस समय भीषण समस्‍या से जुझना पड़ता है जब बरसात के मौसम में सड़क पानी में पूरी तरह से डूब जाती है। इतना ही नहीं सड़क पर घुटनों तक पानी भरा होने होता है जिसके चलते भीषण हादसे भी होते रहते हैं। सड़क किनारे स्थित तालाब इस स्थिति को और बिगाड़ देता है। तालाब से सामान्‍य दिनों में ओवर फ्लो होकर सड़क पर बहने वाला पानी इस तरह से जमा हो जाता है कि वहां से गुजरने वाले वाहन चालक इस भ्रम का शिकार हो जाते हैं कि कुछ समय पूर्व यहां पर भारी बारिश हुई थी जिसके चलते सड़क पर इतना पानी भर गया है।

ग्रामीणों में अतिक्रमण की होड़ 

तिलपता गांव से होकर गुजरने वाली सड़क पर जो हालात बने हैं उनके लिए ग्रामीण भी बहुत हद तक जिम्‍मेवार हैं। सड़क के आसपास की जमीन पर लोगों ने तेजी से अवैध कब्‍जा किया है। इतना ही नहीं सड़क के बेहद करीब कई-कई मंजिला इमारतें भी बन चुकी हैं। अतिक्रमण की हालत यह है कि कई स्‍थानों पर सड़क किनारे फुटपाथ भी नहीं बची है। पैदल आदमी के लिए सड़क पर चलना बेहद मुश्किल और खतरों से भरा हुआ है। सड़क किनारे गाड़ी रोकने और खड़ी करने के लिए भी जमीन शेष नहीं है। अतिक्रमण के हालात को सड़क से मकानों का बहुत ऊंंचा स्‍तर पर बना होना और मकानों में प्रवेश के लिए रैंप बनाकर अधिक बिगाड़ दिया गया है।

सड़क किनारे पानी निकासी की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है 

इस सड़क मार्ग की सबसे बड़ी परेशानी जलभराव है। नालियों से निकलने वाला पानी हमेशा सड़क पर भरा रहता है। सड़क किनारे पक्‍के नाले की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है। लोगों ने अपने मनमर्जी और सहुलियत के हिसाब से नालियों का निर्माण किया है। अपनी मर्जी से नालियों को आकार दिया है। जिसके चलते इन नालियों में गांव के गंदे पानी का निकल पाना कतई संभव नहीं है। यही कारण है कि कई स्‍थानों पर नालियां क्षतिग्रस्‍त हो चुकी है। नालियों में कीचड़ भरा हुआ है। आश्‍यर्च की बात यह है कि सड़क के दोनों ओर नालियां ऊंची हैं और सड़क का स्‍तर नीचा है। ऐसे में सड़क के पानी का नालियों में जाने का विचार करना भी बेईमानी ही है। यदि समय रहते सड़क के किनारे नाले बना दिए गए होते तो बहुत हद तक सड़क पर यह हालात नहीं होते।

तालाब में गंदा पानी समाहित करने की क्षमता नहीं

तिलपता गांव के पानी की उचित व्‍यवस्‍था नहीं होने के कारण गंदा पानी गांव के तालाब में जमा होता है। वर्तमान में तालाब में पानी को समाहित करने की क्षमता नहीं है। इसके बावजूद तालाब की जमीन पर भी तेजी से अतिक्रमाण हुआ है जिससे तालाब का आकार छोटा हो गया है। परिणामस्‍वरूप पानी तालाब से ओवर फ्लो होकर सड़क पर जमा होता रहता है।

तिलपता गांव की समस्‍या तो केवल झांकी है, पूरे जिले में पिक्‍चर अभी बाकी है

ऐसा कतई नहीं है कि जिले में केवल तिलपता गांव से  होकर गुजरने वाली सड़क की समस्‍या गंभीर है। इस लिए समस्‍या को प्रकाशित किया जा रहा है। दरअसल, सच्‍चाई यह है कि जिले में भारी संख्‍या में समस्‍या के तिलपता मॉडल अस्तित्‍व में आ चुके हैं। यहां से गुजरने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामाना करना पड़ता है। हालांकि, इनमें से किसी ने भी अभी तिलपता गांव जैसा विकट समस्‍या का रूप धारण नहीं किया है अथवा इनका विकल्‍प यात्रियों के पास है जिसके चलते वह समस्‍या तिलपता गांव जैसी भीषण प्रतीत नहीं होती है।

कहां-कहां अस्तित्‍व में आ रहे हैं समस्‍या के तिलपता मॉडल

व्‍यवस्‍था के चलते सड़क मार्गों पर होने वाले अतिक्रमण और जलभराव के कारण समस्‍या के तिलपता मॉडल तेजी से अस्तित्‍व में आ रहे हैं। इसके कई उदाहरण जिले की सीमा शुरू होते ही जीटी रोड़ पर देखे जाते हैं। हालांकि एनएचएआई द्वारा नेशनल हाईवे चौड़ीकरण के बाद इस राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर यह समस्‍या बहुत हद तक कम हुइ है। इसके बावजूद अभी भी व्‍यवसायिक गतिविधियों के कारण आबादी क्षेत्र में यह समस्‍या बनी हुई है जिससे यहां पर जाम लगता है।

वहीं, दादरी नगर के बीचों बीच से होकर गुजरने वाले सड़क मार्ग पर लगने वाले भीषण जाम से समस्‍त दिल्‍ली एनसीआर और उत्‍तर प्रदेश परिचित रहा है। बाइपास निर्माण के बाद भी दादरी नगर में जाम की भीषण समस्‍या है। इसके पीछे बहुत हद तक व्‍यापारिक गतिविधियां ही है। पैदल चलने के लिए फुटपाथ भी पूरी तरह अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं। ई-रिक्‍शा और ऑटो की सड़क पर तेजी से बढ़ी समस्‍या ने इस समस्‍या को विकराल बना दिया है। दादरी के रेलवे रोड़ पर भी धीरे-धीरे यह समस्‍या बढ़ रही है। वहीं जारचा रोड़ पर अतिक्रमण के कारण जाम का बुरा हाल है। दादरी से सटा हुआ चिटेहरा गांव में तेजी से नया तिलपता बनने की ओर अग्रसर है। यहां पर भी तिलपता गांव की समस्‍या को पैदा करने वाले सभी कारण मौजूद हैं।

इसके अतिरिक्‍त दादरी-सूरजपुर मार्ग पर देवला गांव, और सूरजपुर कस्‍बे की स्थिति बहुत दयनीय है। सूरजपुर-नोएडा मार्ग पर भंगेल, कासना-सिकन्‍द्रबाद मार्ग पर कई गांव  सड़क पर अतिक्रमण और जलभराव के कारण इस श्रेणी में आते हैं। वहीं, जिले के पुराने कस्‍बे जैसे बिलासपुर, दनकौर, जेवर, और रबूपुरा में भी इन कारणों के चलते जाम की समस्‍या पैदा हो रही है। नोएडा के कुछ सेक्‍टरों की सड़के बुरी तरह से अतिक्रमण का शिकार हैं जिसके चलते वहां से गुजरना परेशानियों भरा है।

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