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हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 : भाजपा तीसरी बार बनाएगी सरकार, क्‍यों हाथ आई जलेबी का स्‍वाद नहीं ले सकी कांग्रेस ?

Haryana Assembly Elections 2024: BJP will form the government for the third time, why could Congress not taste the jalebi that came in its hands?

Panchayat 24 : हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी ने सभी अनुमानों को झुठा साबित कर दिया है। आगामी पांच सालों के लिए भाजपा प्रदेश की सत्‍ता पर काबिज रहेगी। नायब सिंह सैनी ही मुख्‍यमंत्री की शपथ लेंगे। वहीं, हरियाणा चुनाव में मतगणना के दो घंटे बाद तक कांग्रेस के लिए सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। लेकिन एक दम माहौल बदल गया। कांग्रेस के हाथ में आई हरियाणा की सत्‍ता की जलेबी का स्‍वाद पार्टी नहीं ले सकी। भाजपा ने जीत की जलेबी का स्‍वाद चखा और कांग्रेस हाथ मलती रह गई। हरियाणा विधानसभा चुनाव के अप्रत्‍याशित परिणाम के बाद राजनीतिक विश्‍लेषक और तमाम मीडिया जगत से जुड़े लोग तथा कांग्रेस पार्टी के नेता तथा समर्थक इस चुनाव परिणाम का विश्‍लेषण और समीक्षा करने में जुट गए हैं। कुछ ऐसी बातें भी सामने आ रही है जिन्‍हें कांग्रेस की हार के लिए बड़ी वजह माना जा रहा है।

संविधान के नाम का राजनीतिक हित सद्धि के लिए अनावश्‍यक अतिवादी प्रयोग

दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ संविधान को लेकर एक अनोखा प्रयोग किया था। कांग्रेस के नेताओं ने हर मंच पर भाजपा नेतृत्‍व वाली कांग्रेस सरकार ने आरोप लगाया था कि संविधान खतरे में है। भाजपा संविधान बदल देगी। यहां तक कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी दलों के नेता हर मंच पर हाथ में संविधान लेकर चल रहा था। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का यह प्रयोग कुछ हद तक काम कर गया। इसके बाद संविधान को अनावश्‍यक रूप से भाजपा पर हमला करने के लिए संविधान को एक हथियार के रूप में प्रयोग करना शुरू कर दिया। जनता इस बात को समझ गई जिससे कांग्रेस के इस आरोप की धार कमजोर हो गई।

चुनाव जीतने के लिए जातीय बंटवारे का सहारा

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में चुनाव में जातीय मुद्दों का सहारा लिया। कुछ हद तक यह मुद्दा भी लोकसभा चुनाव में काम कर गया। विशेषकर कांग्रेस में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर कांग्रेस ने भाजपा के विजय रथ को रोक दिया। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने नए स्‍वरूप वाले जातीय कार्ड से भाजपा का हिन्‍दुत्‍व कार्ड भेद दिया। कांग्रेस ने एससी एसटी और ओबीसी के सहारे जातीय कार्ड का जमकर प्रयोग शुरू कर दिया। हरियाणा में जाट समाज के सहारे चुनावी नैया को पार करने का प्रयास किया। यहां तक कि किसान, जवान और पहलवान में भी कांग्रेस ने जाटवाद तलाश लिया। कांग्रेस ने जाटवाद में कुछ लोग इस कदर फंस गए थे कि जातीय आधार पर भाजपा और भाजपा उम्‍मीदवार तथा उनके समर्थकों का हिंसक विरोध तक किया। इसका प्रतिक्रिया पूरे हरियाणा में दूसरी जातीयों को मजबूत एकीकरण के रूप में सामने आई। वहीं, जाट समाज ने भी कांग्रेस के इस प्रयोग का कई कारणों से साथ नहीं दिया।

हरियाणा के किसानों के भाव को समझ नहीं सकी कांग्रेस

दरअसल, तीन कृषि कानूनों को लेकर कांग्रेस ने हरियाणा के किसानों द्वारा किसान आंदोलन में बड़े पैमाने पर हिस्‍सा लिया था। कांग्रेस को पूरा भरोसा था कि हरियाणा के किसान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करेंगे। लेकिन कांग्रेस किसानों के मन को टटोलने में सफल नहीं हो सकी। लोकसभा चुनाव के बाद पंजाब के किसानों ने एक बार फिर से दिल्‍ली की सीमा पर बैठकर केन्‍द्र सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू करने का प्रयास किया था। लेकिन इस बार पंजाब के किसान सफल नही हो सके। दरअसल, इस बार पंजाब के किसानों को हरियाणा के किसानों का सहयोग नहीं मिल पा रहा था। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुए आन्‍दोलन में जिस तरह से उपद्रव मचा था। उससे हरियाणा के किसान पंजाब के किसानों से नाराज थे। इस बात को एकसे भी समझ सकते हैं कि हरियाणा के किसान गुट के नेता चढूनी पिहोवा विधानसभा सीट से चुनाव हार गए। उन्‍हें महज 1170 वोट मिले।

पहलवानों के मुद्दे को नहीं मिला हरियाणा के मतदाताओं का समर्थन

हरियाणा विधानसभा चुनाव में महिला पहलवान विनेश फोगाट और साक्षी मलिक तथा बजरंग पुनिया ने महिला पहलवानों के शोषण के मुद्दे पर आन्‍दोलन किया। कांग्रेस ने इसको हवा दी। यहां तक कि पेरिस ओलम्पिक में फाइनल में वजन बढ़ने के बाद डिस्‍क्‍वालीफाई हुई विनेश फोगाट अैर दसके समर्थकों तथा कांग्रेस ने इसके लिए भी सरकार पर दोष मढ़ दिया। चुनाव में कांग्रेस नेता दीपेन्‍द्र हुड्डा ने इस प्रकरण को ऐसे हवा दी मानों पूरा हरियाणा प्रकरण को लेकर भारी गुस्‍से में हैं। लेकिन चुनाव परिणाम बताते हैं कि हरियाणा के मतदाताओं ने इस मुद्दे के राजनीतिकरण के पीछे की पटकथा को भांप लिया। जानकार यह भी बताते हैं कि विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया कुश्‍ती के चर्चित चेहरे थे। ऐसे में मीडिया में वह चर्चा में बने रहे। लेकिन विनेश फोगाट के कारण कई महिला पहलवानों का हित मारा गया। उनकी बात को भले ही मीडिया में उतनी तवज्‍जो नहीं मिली। लेकिन हरियाणा के मतदाताओं की भावना उनके साथ हुए अन्‍याय के साथ थी।

अग्निवीर के मुद्दे को भाजपा ने शानदार तरीके से संभाल लिया

कांग्रेस ने अग्निवीर के मुद्दे को भी हरियाणा चुनाव में मुद्दा बनाया था। कांग्रेस ने सेना में भर्ती होने वाले जवानों में भेदभाव की बात कहकर अग्निवीर के साथ सरकार द्वारा धोखे की बात कही। एक बार लगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर भाजपा और केन्‍द्र सरकार को घेर लेगी। लेकिन सरकार ने शानदार तरीके से इस मुद्दे का न केवल बचाव किया, बल्कि सभी अग्निवीरों को नौकरी देने की घोषणा करके कांग्रेस के इस चुनावी मुद्दे को निष्क्रिय कर दिया।

कांग्रेस का अति विश्‍वास पर भाजपा की चुप्‍पी पड़ गई भारी

हरियाणा चुनाव में जीत को लेकर कांग्रेस इतनी अतिवश्विास से भर गई थी कि उसको पार्टी नेताओं द्वारा की जा रही गलतियां भी दिखाई नहीं दे रही थी। वहीं, अति विश्‍वास के चलते कांग्रेस ने मूलभूत मुद्दों को समझने में चूक कर दी। कांग्रेस ने छत्‍तीस बिरादरी के भले की बात जरूर लेकिनि टिकट वितरण में यह दिखा नहीं। कांग्रेस मान बैठी थी कि हरियाणा चुनाव एक औपचारिकता है। उसकी जीत इस चुनाव में पक्‍की है। वहीं, भाजपा चुनाव में लगातार चुप्‍पी साधे रही और अपनी रणनीति पर आगे बढ़ती रही। भाजपा ने हर विधानसभा के हिसाब से मुद्दे उठाए। इन मुद्दों के प्रचार के लिए टोलियां बनाई। इस टोली की कमान एक अनुभवी नेता को बनाया गया। भाजपा की चुप्‍पी कांग्रेस के अति विश्‍वास पर भारी पड़ गई।

कांग्रेस की अंदरूनी कलह, और जाट नेताओं में हुड्डा परिवार के प्रति आशंकाए

कांग्रेस हरियाणा चुनाव में अतिविश्‍वास से भरी हुई थी। ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व ने पार्टी की अंदरूनी कलह की अनदेखी की। कुमारी शैलजा और हुड्डा परिवार का मतभेद तो चुनाव के शुरूआती दौर में ही उभरकर सामने आ गया था। पार्टी के शीर्ष नेृतृत्‍व ने इस प्रकरण को इतनी तवज्‍जो नहीं दी। वहीं, शैलजा समय समय पर अपनी नाराजगी और भाव मीडिया के सामने प्रकट कर रहे थे। हालांकि बाद में पार्टी ने मामले का हल तलाशने का प्रयास किया लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। दूसरी ओर पार्टी, हरियाणा चुनाव में जाट जाति पर पूरी तरह दाव जरूर खेल रही थी। पार्टी ने जिस तरह से जाट समाज का मतलब केवल हुड्डा परिवार बना दिया था उससे प्रदेश के कई जाट कांग्रेसी नेता आशंकित थे। इन नेताओं का मानना था कि हरियाण में कांग्रेस मतलब जाट और जाट मतलब हुड्डा परिवार बनाने से उनके राजनीतिक हित प्रभावित हेांगे।

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ की पर्दे के पीछे रही अहम भूमिका

हरियाणा चुनाव में भाजपा की अप्रत्‍याशित जीत में राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ की पर्दे के पीछे अहम भूमिका रही। जब भाजपा कांग्रेस के जातिवादी चक्रव्‍यू में  पूरी तरह से फंसती हुई दिखाई दे रही थी, उस समय राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ ने चुनाव की कमान संभाली। आरएसएस ने लोगों के बीच जाकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया। इसका प्रभाव यह हुआ कि लगभग 30 शहरी सीटों में से 21 पर भाजपा प्रत्‍याशियों ने जीत दर्ज की। वहीं, देहात में भी राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ का असर दिखा।

योगी-मोदी-भागवत का बयान कांग्रेस की जाति की राजनीति पर पड़ गया भारी

हरियाणा चुनाव से पूर्व हिन्‍दुत्‍व का चेहरा माने जाने वाले योगी-मोदी-भागवत ने सभाओं में लोगों को संबोधित करते हुए दिया गया बयान कांग्रेस की जाति आधारित चुनावी रणनीति पर भारी पड़ गया। हरियाणा में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने हिन्‍दु समाज को आगाह करते हुए कहा कि बटेंगे तो कटेंगे। वहीं, महाराष्‍ट्र की एक सभा में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मंच से कहा था कि बटेंगे तो बांटने वाले पार्टी करेंगे। वहीं, राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि हिन्‍दुओं को अपनी सुरक्षा का ठेका देने की आदत पड़ गई है। इन बयानों ने कांग्रेस की रणनीति को धवस्‍त कर दिया। हिन्‍दु समाज का बिखराव रूक गया।

भाजपा की चुनावी रणनीति 

हरियाणा चुनाव के दौरान भाजपा ने कांग्रेस के चक्रव्‍यू को तोड़ने के लिए विशेष रणनीति पर काम किया। भाजपा ने कांग्रेस से सीधी लड़ाई में फंसने से खुद को बचाया। जानकारों की माने तो भाजपा जानती थी कि सीधी लड़ाई में भाजपा को नुकसान ही होगा। भाजपा ने कांग्रेस विरोधियों और पार्टी के बागियों को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारा। इन प्रत्‍याशियों को भाजपा के लिए लाभ पहुंचाया।

समसामयिक राष्‍ट्रीय एवं अन्‍तर्राष्‍ट्रीय घटनाक्रम 

हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान राष्‍ट्रीय एवं अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कुछ ऐसी घटनाएं घटी जिन्‍होंने प्रत्‍यक्ष अप्रत्‍यक्ष रूप से भाजपा के लिए बड़ा लाभ पहुंचाया। इनमें पहला घटना बंगलादेश में हिन्‍दुओं के साथ हुई हिंसा रही। इस घटना को आगे करके भाजपा और राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ ने चुपचाप हिन्‍दुओं को जातियों में बंटने पर बंगलादेश जैसा ही परिणाम होगा, कुछ इस तरह का संदेश दिया। वहीं, तिरूपति प्रसाद प्रकरण ने हिन्‍दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई। इसका असर हरियाणा चुनाव में हिन्‍दुओं पर दिखा। इसके अतिरिक्‍त इस्राइल हमले में हिजबुल्‍ला प्रमुख नसरल्‍ला की मौत के बाद जिस तरह से पूरे देश में मुस्लिम समाज ने विरोध प्रदर्शन किया। इससे भी हिन्‍दु समाज में हरियाणा चुनाव के दौरान एकजुटता दिखाई दी। हालांकि जम्‍मु और कश्‍मीर चुनाव में यह प्रकरण भाजपा को नुकसान पहुंचा गया।

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