दादरी विधानसभास्पेशल स्टोरी

दादरी रैली के बाद सपा में बढ़ी गुटबाजी और अंदरूनी रार, जिला इकाई में दरार!

Panchayat 24 (दादरी विधानसभा): हमारे देहात में एक कहावत प्रचलित है—“न सूत, न कपास; जुलाहे से लट्ठम-लट्ठा।” दादरी स्थित मिहिर भोज डिग्री कॉलेज में 29 मार्च को आयोजित समाजवादी समता भाईचारा रैली के बाद गौतम बुद्ध नगर की समाजवादी पार्टी में कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है।

आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए इस रैली को पार्टी के कई नेता बड़ी सफलता और प्रदेश में अगली समाजवादी पार्टी की सरकार का आना तय मान रहे हैं। इसी के साथ संगठन के भीतर श्रेय लेने की होड़ भी तेज हो गई है। रैली की सफलता में अपनी-अपनी भूमिका को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच खींचतान अब न केवल खुलकर सामने आने लगी है, बल्कि एक दूसरे के प्रति भाषा की सीमाएं भी लाँघी जा रही हैं।

जिले में पार्टी के वरिष्ठ नेता राजकुमार भाटी और जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी के समर्थक आमने-सामने आ गए हैं। दोनों गुटों के समर्थक एवं कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है।

विवाद उस समय उभरकर सामने आया जब जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी द्वारा ग्रेटर नोएडा के एक होटल में रैली में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में रैली के मुख्य आयोजक राजकुमार भाटी सहित कई प्रमुख नेता अनुपस्थित रहे।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश सचिव कुलदीप भाटी ने सोशल मीडिया पर जिलाध्यक्ष पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में सच्चे कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है और ऐसे लोगों को सम्मानित किया जा रहा है जो रैली के विरोध में थे। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना संयोजक और प्रमुख सहयोगियों की मौजूदगी के ऐसा आयोजन क्या पार्टी को विभाजित करने की रणनीति है।

दूसरी ओर, सुधीर भाटी गुट के समर्थकों ने भी पलटवार किया। अमन नागर नमक एक कार्यकर्ता ने लिखा कि रैली की सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सभी कार्यकर्ताओं की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। अकबर खान सैफी ने लिखा है कि आज की बैठक में उन लोगों का सम्मान किया गया जिन्हें दादरी रैली में जानबूझकर अपमानित किया गया था। वहीं कुछ अन्य समर्थकों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के चलते संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

दरअसल, दादा रैली के बाद समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं का एक धड़ा राजकुमार भाटी के साथ अपना भविष्य देख रहा है। वहीं, कोई पार्टी कार्यकर्ताओं पर एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो दादरी रैली के बाद राजकुमार भाटी की भूमिका को आसान का भरी नजरों से देख रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को भी जिले में चल रही इस खींचतान की जानकारी है। रैली के बाद राजकुमार भाटी को उच्च सदन भेजे जाने की चर्चाएं भी सामने आई थीं, लेकिन अब इन पर विराम लग गया है। बताया जाता है कि अखिलेश यादव ने राजकुमार भाटी को ऐसी कोई भी संभावना नहीं होने का स्पष्ट संदेश दिया है। चर्चाओं पर विराम इसी का परिणाम है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच जिले में समाजवादी पार्टी के अन्य गुट, वीर सिंह नागर, डॉ. महेंद्र सिंह नागर और फकीरचंद नागर, फिलहाल पूरे घटनाक्रम से दूरी बनाकर स्थिति का आकलन कर रहे हैं। संक्षेप में कहे तो दादरी रैली के बाद जहां पार्टी अपनी मजबूती का दावा कर रही है, वहीं अंदरूनी गुटबाजी संगठन और पार्टी के लिए चुनौती बनती दिख रही है।

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