उत्तर प्रदेश में इंडी गठबंधन का हाल : अखिलेश यादव मध्य प्रदेश का कर्ज उत्तर प्रदेश में सूद सहित चुकाएंगे ?
Condition of Indi alliance in Uttar Pradesh: Will Akhilesh Yadav repay the loan of Madhya Pradesh with interest in Uttar Pradesh?

Panchayat 24 : लोकसभा चुनाव करीब आते ही राजनीतिक दलों ने अपने तरकस से तीर निकालने शुरू कर दिए हैं। इसकी शुरूआत सबसे पहले उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी ने कर दी है। समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी ने प्रत्याशियों के 16 नामों की एक सूची जारी कर दी है। समाजवादी पार्टी द्वारा जारी की गई सूची के बाद राजनीतिक गलियारों में उत्तर प्रदेश में इंडी गठबंधन के भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इसके पीछे मुख्य वजह यह मानी जा रही है कि समाजवादी पार्टी ने उन सीटों पर भी अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं जहां पर कांग्रेस अपना दावा मजबूती से पेश करती है।
इन सीटों पर घोषित किए हैं समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम
समाजवादी पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव 2024 के लिए उत्तर प्रदेश में संभल, फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, लखनऊ, लखनऊ, खीरी, धौराहरा, फर्रखाबाद, अकबरपुर, बदायूं, बांदा, फैजाबा, अंबेड़करनगर, बस्ती और गोरखपुर लोकसभा सीटों पर अपने 16 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इनमें कुछ सीटें वह भी शामिल हैं जिनको लेकर कांग्रेस काफी आशावान है। इनमें लखीमपुर खीरी और फर्रूखाबाद सीटें शामिल हैं। लखीमपुर खीरी सीट पर प्रियंका गांधी, राहुल गांधी सहित कई पार्टी नेता लगातार दौरा करते रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि केन्द्रीय मंत्री अजय कुमार टेनी के बेटे द्वारा किसानों को अपनी गाड़ी से कुचले जाने के बाद यहां की जनता कांग्रेस को भाजपा के विकल्प के तौर पर चुनेगी। वहीं, फर्रूखाबाद सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता सलमान खुर्शीद भी चुनाव लड़ते रहे हैं।
अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए 11 सीटें छोड़ने की बात कह चुके हैं
हालांकि अखिलेश यादव पूर्व में ही इंडी गठबंधन के बनाए रखने के नाम पर कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में 11 सीटें दिए जाने की बात कह चुके हैं। वहीं, कांग्रेस की ओर से अभी यही कहा जा रहा है कि गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब कांग्रेस अभी गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बातचीत तय नहीं होने की बात कह रही है तो अखिलेश यादव ने किस आधार पर कांग्रेस के लिए 11 सीटें देने की बात कही है। यदि अखिलेश यादव ने अपनी ओर से ही यह 11 सीटों कांग्रेस के लिए छोड़ी हैं और कांग्रेस इससे सहमत नहीं है तो ऐसे में उत्तर प्रदेश में इंडी गठबंधन का भविष्य खतरे में पड़ता दिख रहा है।
सपा ने कांग्रेस को दिया कूटनीतिक संदेश
उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की न्याय यात्रा के प्रवेश से पूर्व पहली सूची जारी कर समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी के 16 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। अखिलेश यादव के इस दाव को कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी अपने प्रदर्शन को देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सुधराना चहती है। ऐसे में पार्टी अखिलेश यादव द्वारा छोड़ी गई 11 सीटों को नाकाफी मान रही है। वहीं पार्टी के लोग इस बात से भी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं कि बिना कांग्रेस के शीर्ष नेतृतव से बातचीत के अखिलेश यादव ने स्वयं ही कांग्रेस के लिए 11 सीटें छोड़ने का फैसला कर लिया है। जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव से पूर्व अखिलेश यादव ने कांग्रेस पार्टी को कूटनीतिक संदेश दे दिया है। अखिलेश यादव ने कांग्रेस के लिए 11 सीटें छोड़कर बता दिया है कि उनकी उत्तर प्रदेश में क्या हालत है और उत्तर प्रदेश में गठबंधन का असली प्रतिनिधि कांग्रेस नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी है। ऐसे में समाजवादी पार्टी गठबंधन धर्म को निभाना चाहती है, लेकिन गठबंधन को बनाए रखना कांग्रेस की जिम्मेवारी है।
मध्य प्रदेश का कर्ज उत्तर प्रदेश में सूद सहित चुकाना चाहती है समाजवादी पार्टी
जानकारों की माने तो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्याक्ष अखिलेश यादव को मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी द्वारा उनके साथ किए गए आचरण को भूले नहीं हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से महज 7 सीटें मांगी थी। बाद में 5 सीटों पर बात बनती दिख रही थी। लेकिन बाद में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के लिए कोई भी सीट देने में रूचि नहीं दिखाई। मध्य प्रदेश में कांग्रेस अतिवादी विचार का शिकार हो गई थी जिसके चलते उसने अपने तात्कालिक लाभ के लिए राष्ट्रव्यापी गठबंधन के बनने से पहले ही दरार डालने की नींव रख दी थी। मध्य प्रदेश चुनाव में गोटी कांग्रेस के हाथ में थी लेकिन उत्तर प्रदेश में राजनीति की बिसात अखिलेश यादव के अनुसार बिछी हुई है। यहां चाल भी अखिलेश यादव के अनुसार ही चली जाएगी। यदि कांग्रेस को गठबंधन को बचाना है तो अखिलेश यादव की बात को मानना होगा अर्थात उत्तर प्रदेश में गठबंधन बनाए रखने का जिम्मा हर हाल में कांग्रेस के कंधों पर है।
समाजवादी पार्टी दूसरे विकल्प पर भी काम कर रही है
हालांकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी इंडी गठबंधन से बाहर होना नहीं चाहती है। लेकिन यह भी तय है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी गठबंधन की प्रतिनिधि कांग्रेस को स्वीकार करने के लिए भी तैयार नहीं है। पिछले कुछ महीनों से अखिलेश यादव पीडीए अर्थात पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों को अपनी राजनीति के केन्द्र में रख रहे हैं। यदि उत्तर प्रदेश में गठबंंधन कायम रहा तो समाजवादी पार्टी पीडीए को गठबंधन की महत्वपूर्ण नीति के रूप में चुनाव मैदान में जाएगी। यदि उत्तर प्रदेश में इंडी गठबंधन किसी कारण से टूटता है तो समाजवादी पार्टी पूरी तरह अपनी चुनावी रणनीति को पीडीए के नए समीकरण के इर्दगिर्द रखेगी।