ओवेसी ने जय फिलीस्तीन का नारा लगाकर संसद भवन को संकीर्ण उद्देश्य के लिए प्रयोग किया, आपकी क्या राय है ?
Owaisi used the Parliament House for narrow purpose by raising the slogan Jai Palestine. What is your opinion?

Panchayat 24 : 18वीं लोकसभा चुनाव के बाद संसद का सत्र शुरू हो गया है। नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई गई। देश के विभिन्न हिस्सों से चुनकर आए लोकसभा के सदस्यों ने संसद की परंपरा के अनुसार शपथ ली। किसी ने संस्कृत, किसी ने हिन्दी किसी ने उर्दू अथवा क्षेत्रीय भाषा में शपथ लेने के बाद अपने अंदाज में संसद के प्रति अपनी निष्ठा का जयघोष किया। लेकिन तेलांगना के हैदराबाद से एआईएमआईएम पार्टी के सांसद असादुद्दीन ओवेसी की शपथ पर विवाद हो गया। ओवेसी ने उर्दू में शपथ ग्रहण के बाद संसद भवन के मंच पर फिलीस्तीन के लिए किया गया जयघोष करते हुए कहा जय फिलीस्तीन। सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के सामने इस मामले की शिकायत करते हुए ओवेसी की सदस्यता रद्द करने की मांग भी की है। ओवेसी की सदस्यता रहती है अथवा जाएगी, यह एक अलग विषय है, लेकिन ओवेसी ने मौका देखकर अपने संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्य के लिए संसद को एक मंच के तौर पर प्रयोग किया है।
दरअसल, देश के अन्दर एक बड़ा वर्ग है जिसको भारत के इस्राइल से प्रगाढ़ होते संबंध रास नहीं आ रहे हैं। यह वर्ग समय समय पर इस्राइल से भारत की बढ़ती नजदीकियों की आलोचना करता रहा है। आतंकवादी संगठन ने इस्राइल पर हमला करके बड़ी संख्या में इस्राइली नागरिकों की हत्या कर दी। कई लोगों को अगवा कर लिया। इस्राइल ने फिलीस्तीन पर जबरदस्त तरीके से जवाबी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोग मारे जा रहे हैं। फिलीस्तीन का बड़ा हिस्सा खण्डहर बन चुका है। इस युद्ध के चलते भारत की विदेश नीति में इस्राइल को दिए गए स्थान का फिर से विरोध कर रहा है। यह वर्ग चाहता है कि भारत पूरी तरह से इस्राइल से संबंध समाप्त कर फिलीस्तीन पर की गई कार्रवाई का अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर विरोध करें। इस वर्ग में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें विदेश नीति की कतई समझ नहीं है, लेकिन धार्मिक समानता के आधार पर फिलीस्तीन का समर्थन और इस्राइल का विरोध कर रहे हैं। असादुद्दीन ओवेसी की पार्टी एआईएमआईएम भी भारत इस्राइल संबंधों का विरोध करते हुए फिलीस्तीन का समर्थन की पेरोकार है।
संसद भवन के मंच से जय फिलीस्तीन का जयघोष करके धार्मिक आधार पर फिलीस्तीन का समर्थन करने वाले भारतीय के उस वर्ग को साधने का प्रयास किया है। बता दें कि ओवेसी की पार्टी के वोटबैंक में फिलीस्तीन प्रमी गैंग बड़ी संख्या में हैं। पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि ओवेसी के द्वारा धार्मिक आधार पर एकजुटता दिखाने वाले इस फिलीस्तीनी गैंग को पूरे देश में एक नेतृत्व के नीचे लाने का प्रयास किया गया है। हालांकि अपने इन प्रयासों में वह आंशिक रूप से ही सफल हो सके हैं। अधिकांश स्थानों पर स्थानीय मुद्दों के कारण वह सफल नहीं हो सके है। इस्राइल-फिलीस्तीन युद्ध के बाद से इस वर्ग के सामने धार्मिक एकता का भाव उफान पर है। दूसरे मुद्दे फिलहाल कमजोर पड़ें हैं। ऐसे में संसद भवन के मंच से ओवेसी ने इस फिलीस्तीन प्रेमी गैंग को बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया है। संसद में जय फिलीस्तीन का नारा लगाकर ओवेसी ने इस वर्ग को बताने का प्रयास किया है कि वह अकेले ऐसे नेता है जो फिलीस्तीन के प्रति उनके भाव को समझते हैं और उनके साथ खड़े हैं।
फिर तो देश की संसद में जय पाकिस्तान और जय चाइना के भी नारे लगाए जाने लगेंगे…………
असादुद्दीन ओवेसी द्वारा शपथ ग्रहण के दौरान संसद भवन में जय फिलीस्तीन का नारा लगाकर भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करने का प्रयास किया है। यदि इसको संवैधानिक परंपरा की आड़ में माफ किया गया तो यह भी संभव है कि आने वाले समय में कोई पाकिस्तान प्रेमी संसद में जय पाकिस्तान और जय चाइना के भी नारे लगाने का प्रयास करेगा। असादुद्दीन ओवेसी भले ही भारतीय संविधान की दुहाई देकर अपने कुत्सित प्रयासों के पक्ष में तर्क गढ़ते रहे, लेकिन भारत के प्रति उनकी आस्था पर सवाल उठता है। ऐसे कई मौके आए हैं जब ओवेसी राष्ट्रीय गान और भारत माता की जय बोलने से मना कर चुके हैं। एक चैनल पर उन्होंने सार्वजनिक तौर पर भी कहा था कि उनकी गर्दन पर छुरी भी रख दो तो भी वह भारत माता की जय और राष्ट्रगान नहीं बोलेंगे। इसके लिए उन्होंने संविधान और धर्म को आधार बनाया था। आश्चर्य की बात यह है कि क्या संसद भवन के मंच पर जय फिलीस्तीन बोलने के लिए ओवेसी का धर्म और संविधान इजाजत देते हैं ?