भाजपा हो या फिर सपा, हर पार्टी के अंदर ग्रेटर नोएडा वेस्ट से ही क्यों उठ रही हैं मुखर आवाजें ?
Be it BJP or SP, why are vocal voices rising from Greater Noida West in every party?

Panchayat 24 : गौतम बुद्ध नगर जिले में ग्रेटर नोएडा वेस्ट शहर की स्थिति बड़ी विचित्र हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा शहरों के बीच स्थित यह शहर शासन और प्रशासन की उपेक्षाओं का शिकार रहा है। यहां पर आए दिन धरना प्रदर्शन और हंगामें की खबरें आना आम बात हो गई है। यहीं कारण है कि कभी सपनों का शहर कहे जाने वाला ग्रेटर नोएडा वेस्ट आज समस्याओं के शहर के रूप में जाना जाने लगा है। लेकिन पिछले कुछ समय से ग्रेटर नोएडा वेस्ट ने जिले की राजनीति का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। सत्ताधारी राजनीतिक दल भाजपा हो या फिर मुख्य विपक्षी दल सपा, दोनों ही पार्टियों को ग्रेटर नोएडा वेस्ट से असहज करने वाली खबरें आई है। दोनों ही दलों में संगठन में यहां से मुखर आवाजें उठ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ऐसा क्या हो गया है कि यहां से राजनीतिक दलों में विरोधी आवाजें उठ रही हैं ?
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, पिछले लगभग एक महीने में ग्रेटर नोएडा वेस्ट से दो खबरें गौतम बुद्ध नगर की राजनीति में सुर्खियां बनी हैं। पहली खबर भाजपा के पूर्व बिसरख मण्डल अध्यक्ष रवि भदौरियां का भाजपा की सक्रिय सदस्यता से त्याग पत्र देना है। दूसरी खबर दो दिन पूर्व ही समाजवादी से आई है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता जितेन्द्र अग्रवाल द्वारा पार्टी के जिलाध्यक्ष और महासचिव पर गंभी आरोप लगाते हुए पार्टी में जातीय भेदभाव का आरोप लगाया है। बता दें कि भाजपा नेता रवि भदौरिया ने भी इशारों इशारों में पार्टी जिला इकाई पर जातीय भेदभाव के कारण अनदेखी की बात कही थी।
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ग्रेटर नोएडा वेस्ट से आने वाले नेता क्यों उठा रहे हैं विरोध की आवाज ?
गौतम बुद्ध की राजनीति में ग्रेटर नोएडा वेस्ट से राजनीतिक खबरें आ रही हैं। इन खबरों के कारण भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के अंदर हड़कंप मचा दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ग्रेटर नोएडा वेस्ट से ही राजनीतिक दलों के अंदर विरोधी स्वर क्यों उठ रहे हैं ? जानकारों का मानना है कि साल 2008 में हुए परिसीमन से पूर्व दादरी विधानसभा और खुर्जा लोकसभा सीट पर नोएडा अहम भूमिका निभा रहा था। परिसीमन के बाद नोएडा एक अलग विधानसभा बन गई। इस बीच नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच ग्रेटर नोएडा वेस्ट के नाम से नया शहर अस्तित्व में आया। यह शहर दादरी विधानसभा का हिस्सा है। इसकी लोकेशन के कारण यहां तेजी से आबादी बढ़ रही है। धीरे धीरे ग्रेटर नोएडा वेस्ट दादरी विधानसभा में उस स्थिति में लगभग पहुंच गया है जिस स्थिति में कभी नोएडा होता था। यहां भी बड़ी संख्या में नोएडा की तरह बाहरी मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। ऐसे में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता पार्टी संगठन में अपनी बड़ी भूमिका चाहते हैं।
सक्रिय राजनीति के लिए ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सभी आवश्यक तत्व मौजूद हैं
जानकारों की माने तो ग्रेटर नोएडा शहर को पहले औद्योगिक क्षेत्र के रूप में नियोजित किया गया था। बाद में इस क्षेत्र में बिल्डों की रूचि बढ़ी और सरकार ने लैण्ड यूज चैंज करके इस क्षेत्र को आवासीय एवं हाऊसिंग सोसायटियों के लिए चिन्हित किया। जानकार बताते हैं कि तत्कालीनह सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र को आवासीय क्षेत्र में जरूर बदल दिया लेकिन इसके नियोजन में कोई बदलाव नहीं किया गया। जबकि आवासीय क्षेत्र होने के कारण यहां की सड़कों की चौड़ाई, लोक कल्याण के लिए आवश्यक गतिविधियों के लिए स्थान, जैसे पार्क, सरकारी अस्पताल, सरकारी कॉलेज, और कई अन्य इमारातों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। साथ ही बिल्डर बायर्स जैसी बड़ी समस्या ने स्थानीय लोगों के जीवन को गहराई से प्रभावित किया है। बिल्डर और प्राधिकरण की मिली भगत से बिडरों ने इमारतों में मनमाने तरीके से इमारतों की ऊंचाई बढ़ा दी। परिणामस्वरूप यहां तेजी से आबादी बढ़ने लगी। आबादी के साथ ट्रेफिक की समस्या विकराल हो गई। इस तरह की समस्याएं आने वाले समय में ग्रेटर नोएडा में और भी बढ़ेंगी। समस्याओं को लेकर धरना प्रदर्शन, आन्दोलन और विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए यहां भविष्य की राजनीति के लिए भरपूर मौके दिख रहे हैं। हर राजनीतिक दल ग्रेटर नोएडा वेस्ट को अपने कब्जे में करना चाहता है। मुख्य रूप से भाजपा नोएडा की तरह ग्रेटर नोएडा वेस्ट पर अपना राजनीतिक वर्चस्व कायम करके गौतम बुद्ध नगर की राजनीति में अजेय बढ़त लेना चाहती है। वहीं, समाजवादी पार्टी का गौतम बुद्ध नगर की राजीनति में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा है। पार्टी ग्रामीण आंचल में काफी सक्रिय है लेकिन शहरी क्षेत्र में उपस्थित कतई नहीं है। ऐसे में समाजवादी पार्टी चाहती है कि कम से कम ग्रेटर नोएडा वेस्ट को पर राजनीतिक वर्चस्व कायम कर लिया जाए तो दोहरा राजनीतिक लाभ होगा। पहला दादरी विधाानसभा बढ़त और दूसरा लोकसभा चुनाव में भाजपा की नोएडा की बढ़त को ग्रेटर नोएडा वेस्ट से काउंटर किया जाए।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के कार्यकर्ताओं की संगठन में अनदेखी क्यों ?
गौतम बुद्ध नगर की राजीनीति में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की भूमिका निर्विवाद रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे में सवाल उठता है कि चाहे भारतीय जनता पार्टी हो या फिर समाजवादी पार्टी, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी क्यों कर रहे हैं ? दरअसल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय लोग भी जिले की राजनीति में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की प्रसांगिकता को भली भांति समझ गए हैं। ऐसे में वह पार्टी संगठन पर अपने लिए बड़ी भूमिका तय करने के लिए प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से दबाव भी बना रहा है। जानकारों का मानना है कि ऐसे लोग संगठन में बड़ी भूमिका प्राप्त करके ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सहारे जिले में खुद को पार्टी का प्रभावी नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। वहीं, पार्टियों की जिला इकाइयों के सामने अपनी समस्या है। भले ही ग्रेटर नोएडा वेस्ट जिले की राजीनति में तेजी से उभरता हुआ संभावनाओं का केन्द्र है। इसके बावजूद पार्टी संगठन केवल ग्रेटर नोएडा वेस्ट को प्रमुखता देकर जिले के अन्य क्षेत्रों और दूसरे कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने का जोखिम मोल नहीं लेना चाहते। दूसरा, मतदाता के रूप में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोग अभी इतने सक्रिय नहीं है जितने जिले के दूसरे क्षेत्रों के मतदाता। इसके अतिरिक्त राजनीतिक दल गौतम बुद्ध नगर में फिलहाल पार्टी संगठनों को बाहरी बनाम स्थानीय की लड़ाई से बचाकर रखना चाहते हैं। ऐसे में राजनीतिक दल एक सामंजस्य बिठाने का प्रयास कर रहे हैं जो फिलहाल स्थानीय कार्यकर्ताओं और क्षेत्रों के पक्ष में झुका हुआ है। फिलहाल यह राजनीतिक दलों के लिए लाभदायक और प्रसंगिक भी है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों के मन में राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हिलौरे मार रही हैं
जानकारों की माने तो गौतम बुद्ध नगर की राजनीति को लेकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों की राजीनतिक महत्वाकांक्षाएं हिलौरे मार रही है। दरअसल, पिछले कुछ सालों से इस बात की चर्चाएं गौतम बुद्ध नगर में जोर शोर से उठ रही है कि निकट भविष्य में (2030 के आसपास की चर्चा) प्रस्तावित परिसीमन में दादरी से अलग एक होकर ग्रेटर नोएडा के रूप में एक नई विधानसभा अस्तित्व में आएगी। इस विधानसभा में पूरी तरह से बाहरी मतदाताओं और ग्रेटर नोएडा वेस्ट क्षेत्र का दबदबा होगा। उस स्थिति में ग्रेटर नोएडा वेस्ट शहर में रहने वाले लोगों पर राजनीतिक दल दांव लगाएंगे। उस स्थिति को ध्यान में रखकर राजनीति दलों के कार्यकर्ता खुद को तैयार भी कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि हालांकि इस बारे में अभी से कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। फिर भी ऐसी संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। जानकार हाल ही में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में घटा घटनाक्रम भी कमोबेश इसी दिशा की ओर इशारा करता है। वैसे भी इसका संकेत पिछले कुछ चुनावों में भी मिले हैं जब भले ही किसी राजनीतिक दल ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय लोगों को टिकट नहीं दिया। इसके बावजूद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा है। इनमें फ्लैट बायर्स के संगठन नेफोवा के अध्यक्ष अन्नु खान, सामाजिक कार्यकर्ता नरेश नौटियाल तथा कुछ अन्य नाम शामिल हैं। फ्लैट बायर्स के ही एक अन्य संगठन नेफोमा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने भी 2024 के लोकसभा चुनाव में चुनावी मैदान में उतरने का मन बनाया था लेकिन अंतिम समय पर उन्होंने अपने पैर पीछे खींच लिए। इसके अतिरिक्त ग्रेटर नोएडा वेस्ट के कुछ स्थानीय चेहरे भी इनमें शामिल हैं। इनमें मिलक लच्छी गांव के महेन्द्र सिंह नागर समाजवादी पार्टी उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके है। बिसरख गांव के रहने वाले मनवीर भाटी ने बसपा उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा था। वहीं, बिसरख गांव के ही रहने वाले दीपक भाटी चोटीवाला भी कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य चेहरे भी शामिल है जो पार्टी के टिकट पर अथवा निर्दलीय चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं।