नोएडा जोन

इंजीनियर से साजिशकर्ता तक: नोएडा हिंसा के साजिशकर्ता आदित्य आनंद का NIT जमशेदपुर और Genpact से भी रहा है संबंध, हिंसा में पढ़े-लिखे दिमाग और संगठनों के नेटवर्क की भूमिका उजागर

Panchayat 24 (नोएडा) : नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के मामले में गिरफ्तार आरोपी आदित्य आनंद उर्फ रस्टी की प्रोफाइल ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने ला दिए हैं। एक ओर जहां वह उच्च शिक्षित और तकनीकी पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा, वहीं दूसरी ओर उस पर संगठित तरीके से हिंसा और अशांति फैलाने की साजिश रचने के गंभीर आरोप लगे हैं।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, आदित्य आनंद ने प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उसने Genpact जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया। एक सफल करियर की शुरुआत के बावजूद उसका झुकाव धीरे-धीरे सामाजिक और श्रमिक संगठनों की ओर बढ़ता गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का संपर्क मजदूर बिगुल, Disha Student Organisation, RWPI (भारतीय क्रांतिकारी मजदूर पार्टी), NBS (नौजवान भारत सभा) और एकता संघर्ष समिति, गौतमबुद्धनगर जैसे संगठनों से रहा। इन संगठनों के माध्यम से वह विभिन्न गतिविधियों में शामिल हुआ और धीरे-धीरे आंदोलन की रणनीतियों में सक्रिय भूमिका निभाने लगा।

सूत्रों के अनुसार, इन संगठनों के नेटवर्क के जरिए ही आरोपी ने अन्य लोगों से संपर्क स्थापित किया और आंदोलन को व्यापक रूप देने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि मार्च के अंत से अप्रैल की शुरुआत के बीच कई बैठकों में आंदोलन को आक्रामक बनाने और सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाने की योजना बनाई गई थी।

13 अप्रैल को गौतमबुद्धनगर में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं ने प्रशासन को सतर्क कर दिया। जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह घटनाएं अचानक नहीं बल्कि पूर्व नियोजित रणनीति का हिस्सा थीं, जिसमें तकनीकी और संगठित दोनों स्तरों पर तैयारी की गई थी।

एजेंसियों का मानना है कि आरोपी की शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर अनुभव ने उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को जोड़ने, संदेश प्रसारित करने और योजनाओं को क्रियान्वित करने में मदद की। यही वजह है कि वह कथित रूप से इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम कड़ी बनकर उभरा।

फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन संगठनों की भूमिका कितनी गहरी थी और क्या यह नेटवर्क किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा था।

यह मामला एक गंभीर संकेत देता है कि किस तरह शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम व्यक्ति भी संगठित नेटवर्क के माध्यम से कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं। नोएडा हिंसा की जांच अब केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे जुड़े संगठनों और उनके प्रभाव की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है।

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