सहारनपुर लोकसभा सीट : लोकसभा चुनाव 2024 में क्या है राजनीति का मिजाज, कौन किस पर पड़ रहा है भारी ?
Saharanpur Lok Sabha seat: What is the mood of politics in Lok Sabha elections 2024, who is gaining on whom?

Panchayat 24 : उत्तर प्रदेश की सहारनपुर लोकसभा सीट पर देश की आजादी के देश भर में साल 1952 में पहली बार हुए लोकसभा चुनावों के साथ ही यहां भी लोकसभा चुनाव हुए थे। देश की आजादी के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर साल 1971 तक यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी। साल 1977 में पहली बार यहां राजनीतिक बदलाव हुआ और यहां जनता पार्टी के राशीद मसूद चुनाव जीत गए। 1980 के चुनाव में राशीद मसूद एक बार फिर जनता पार्टी ( सेक्यूलर) से सांसद चुने गए। 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में यह सीट एक बार फिर कांग्रेस के कब्जे में आ गई। इस बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के यशपाल सिंह चुनाव जीत दर्ज की। 1989 और 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में एक बार फिर जनता दल के राशीद मसूद के सिर जीत का सहरा बंधा। 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने यहां पर जीत का स्वाद चखा और नकली सिंह विजयी हुए। 1998 के लोकसभा चुनाव में भी वह जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। 1999 में बहुजन समाज पार्टी के मंसूर अली खान, 2004 में समाजवादी पार्टी से राशीद मसूद, 2009 में बहुजन समाज पार्टी के जगदीश राणा, 2014 में भारतीय जनता पार्टी के राघव लखनपाल और 2019 में बहुजन समाज पार्टी के हाजी फजलुर्ररहमान ने जीत दर्ज की थी।
सहारनपुर लोकसभा सीट की विधानसभावार वर्तमान स्थिति
र्तमान में इस सीट के अन्तर्गत वर्तमान में बीहट, सहारनपुर नगर, सहारनपुर, देवबंद और रामपुर मनिहारन सहित कुल 5 विधानसभाएं आती हैं। यहां पर बीहट विधानसभा पर समाजवादी पार्टी के उमर अली खान, सहारनपुर नगर विधानसभा सीट पर भाजपा के राजीव गुम्बर, सहारनपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के आशु मलिक,देवबंद विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के ब्रजेश सिंह और रामपुर महिनहारन (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के ही देवेन्द्र कुमार निम का कब्जा है।
वर्तमान में क्या है राजनीतिक दलों की स्थिति ?
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने इस बार राघव लखनपाल शर्मा को टिकट दिया है। राघव लखनपाल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीत गए थे। वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी हाजी फजलुर्र रहमान से 22,417 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी ने एक बार फिर से राघव लखनपाल शर्मा पर भरोसा जताते हुए सहारपुर से टिकट दिया है। वहीं, इंडिया गठबंधन की ओर से यह लोकसभा सीट कांग्रेस के खाते में गई है। यहां से कांग्रेस ने इमरान मसूद को चुनाव में उतारा है। इमरान मसूद सहारपुर से पांच बार के लोकसभा सांसद रह चुके रासीद मसूद के भतीजे हैं। इमरान मसूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बोटी बोटी करने वाले अपने विवादित बयान के चलते काफी चर्चा में रहे थे। वहीं, बहुजन समाज पार्टी ने यहां से वर्तमान संसद हाजी फजलुर्ररहमान का टिकट काटकर माजिद अली को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा है।
सहारनपुर लोकसभा सीट के जातीय समीकरण
यहां पर कुल 18,51, 847 मतदाता हैं। इनमें 9,78,421 पुरूष 8,73,341 महिला मतदाता हैं। इनमें 85 थर्ड जेंडर भी हैं। यहां पर कुल आबादी का लगभग 56 प्रतिशत हिन्दू और 44 प्रतिशत मुस्लिम हैं। जानकारों की माने तो सहारनपुर लोकसभा सीट पर मुस्लिम और दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 6.5 लाख, दलित 3.5 लाख, राजपूत 1.5 लाख, सैनी 1.25 लाख, गुर्जर 1.2 लाख, जाट 1 लाख, ब्राह्मण 80 हजार और वैश्य मतदाता की संख्या 70 हजार है।
सहारनपुर लोकसभा सीट पर चुनावी राजनीति को प्रभावित करने वाले समीकरण
इस लोकसभा सीट पर फिलहाल मुकाबला त्रिकोणीय दिखाई दे रहा है। यहां पर चुनाव में मुस्लिम एवं दलित मतदाता काफी प्रभावशाली साबित होते हैं। यहां चुनाव में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण बड़ा समीकरण रहा है। यहीं कारण है कि कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद की रणनीति कुछ इस प्रकार की है कि हिन्दू मतदाताओं को ध्रुवीकरण के जाल में फंसने से बचाया जा सके। इमरान हिन्दू एवं मुस्मि मतदाताओं को साधने का प्रयास कर रहे हैं। वह सिद्धपीठ त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर में मत्था टेका। मुस्लिम मतदाताओं के साथ कुछ अन्य जातियों के मिलने से कांग्रेस मजबूत होती है। यदि यहां पर ध्रुवीकरण होता है तो यह कांग्रेस प्रत्याशी के लिए नुकसानदेह होगा। हालांकि इमरान मसूद का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ दिया गया बोटी बोटी वाला बयान उनके लिए आज भी राजनीतिक तौर पर नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसके अतिरिक्त बहुजन समाज पार्टी की ओर से यहां से मुस्लिम प्रत्याशी माजिद अली को चुनावी मैदान में उतारा है। यह भी इंडिया गठबंधन प्रत्याशी इमरान मसूद के लिए चिंता खड़ी करने वाला समीकरण है।
वहीं, भाजपा प्रत्याशी राघव लखनपाल हिन्दुओं को एक जुट करने पर जोर दे रहे हैं। वह योगी और मोदी के चेहरे को आगे करके उनके विकास कार्यों की चर्चा करते हैं। योगी राजज में कानून व्यवस्था में हुए सुधार को अहम मानते हैं। इसके अतिरिक्त एकजुट हिन्दू वाला समीकरण राघव लखनपाल के पक्ष में जाता है। यहीं कारण है कि यहां पर भाजपा समर्थक 6 लाख बनाम 11 लाख की बात करते हैं। हालांकि राजपूत समाज द्वारा भाजपा के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम भी कुछ रंग दिखा सकती है। राघव लखनपाल की हार में पिछली बार हिन्दु मतदाताओं का बिखराव बड़ी जिम्मेवार रही। ऐसे में इस बार भाजपा उम्मीदवार हिन्दु मतदाताओं विशेष कर पिछड़ा वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
हालांकि इस सीट पर वर्तमान में बसपा के हाजी फजलर्रहमान सांसद है। लेकिन बसपा ने उनके स्थान पर माजिद अली को चुनाव मैदान में उतारा है। इससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। माजिद अली दलित और मुस्लिम गठजोड़ के सहारे चुनाव में अपनी जीत का दावा पेश कर रहे है।