रन्हेरा गांव नाले के पानी में डूबा : जेवर क्षेत्र के गांवों के चेहरों पर यमुना प्राधिकरण द्वारा किया गया विकास का मेकअप बह गया
Ranhera village submerged in drain water: The development makeup done by Yamuna Authority on the faces of the villages of Jewar area got washed away

Panchayat 24 : चेहरे पर किया गया मेकअप एक महिला अथवा पुरूष की सुन्दरता में चार चांद लगा देता है। वैसे सच्चाई यह है कि यह महिला अथवा पुरूष की वास्तविक सुन्दरता को छिपा देता है। कई बार यह मेकअप सामने वाले को भ्रम में डाल देता है। यह बदलाव महज क्षणिक होता है। प्रकृति के सामने यह सुन्दरता कहीं नहीं टिकती है। बरसात की एक बूंद सारी सच्चाई को उजागर कर ही देती है। मेकप स्थान विशेष का भी होता है। बस तरीका कुछ अलग होता है।
यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने जेवर क्षेत्र का मेकअप शानदार तरीके से किया है। यहां बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने मेकअप की सुन्दरता में चार चांद लगा दिए हैं। इससे प्राधिकरण की परियोजनाएं हाथों हाथ बिक रही हैं। देश और दुनिया के लोग इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं। रियल एस्टेट के लिए जेवर क्षेत्र को भविष्य का हॉटस्पॉट माना जा रहा है। इसमें कोई शंका नहीं है कि एयरपोर्ट कई मायनों में मील का पत्थर साबित होगा। इतना ही नहीं इस मेकअप की आड़ में जेवर क्षेत्र के गांवों के अतुलनीय विकास की कहानी मीडिया और सोशल मीडिया पर कही जा रही है।
बड़ा सवाल यह है कि जेवर क्षेत्र के गांवों का भविष्य क्या होगा ? क्या गांव सेक्टरों की तर्ज पर विकसित होकर आधुनिक शहर का हिस्सा बन जाएंगे ? यीडा ने जिस तरह से जेवर के गांवों को मॉडल गांव बनाने की बात कही थी, उससे कुछ उम्मीद अवश्य बंधी। पंचायत 24 की टीम ने कुछ दिन पूर्व जेवर क्षेत्र में बन रहे बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के गांवों का दौरा किया था। वास्तविकता से रूबरू होने पर पता चला की प्राधिकरण द्वारा गांवों के विकास को लेकर घोषणाओं का मेकअप अधिक किया है। क्षेत्र से दूर रहने वाले लोगों के मन में जेवर क्षेत्र के गांवों के प्रति धारणा मीडिया और सोशल मीडिया पर पेश की जा रही तस्वीरों से हो सकता है बदल गई हो, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए हालात बहुत कुछ नहीं बदले हैं।
बारिश के कारण एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले गांवों में से एक रन्हैरा में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। गांव में चार फीट तक पानी जमा है। घरों में पानी घुस चुका है। लगातार हो रही बारिश के कारण हालात और बिगड़ गए हैं। फसलें पानी में डूबने से नष्ट हो गई हैं। स्कूल में पानी भरने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। हालात यह हो गए हैं कि लोगों के सामने खाद्य संकट पैदा हो गया है। गांव में इंसान ही नहीं मवेशियों पर भी संकट मंडरा रहा है। वहीं, जल भराव के कारण गांव में संक्रमण का खतरा भी पैदा हो गया है। गांव में जहरीले जीव घरों में विचरण कर रहे हैं। करिश्मा नामक एक महिला की सांप के काटने से मौत हो चुकी है। मकानों में दरारें आने के कारण गिरने का खतरा पैदा हो गया है। लोग भयभीत हैं।
रन्हेरा गांव में बाढ़ जैसे हालात प्राकृतिक कतई नहीं है। यह संकट मानव निर्मित है। दरअसल, एयरपोर्ट निर्माण के लिए दनकौर क्षेत्र के धनौरी गांव के पास से गुजरने वाले पथवाये नाले को रन्हेरा गांव के पास बंदकर दिया था। हालांकि सिंचाई विभाग ने वैकल्पिक नाले का निर्माण किया था लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया गया। विभाग ने इसके प्रति उदासीनता बरतते हुए लावारिस छोड़ दिया। परिणामस्वरूप पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश के कारण दनकौर से लेकर रबूपुरा तक का पानी रन्हेरा गांव में घुस गया। नाले का ढलान मानकों के अनुसार नहीं होने से पानी नहीं निकल पा रहा है। प्रशासन लगातार पानी निकासी की कोशिश कर रहा है लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिल रही है। लगातार हो रही बारिश समस्या विकराल रूप धारण कर रही है।
इस प्रकरण से एक बात स्पष्ट है कि प्राधिकरण ने विकास परियोजनाओं के लिए जेवर क्षेत्र के गांवों की जमीन का अधिग्रहण जरूर किया है, लेकिन इन गांवों का विकास अभी प्राधिकरण की प्राथमिकता पर नहीं है। प्राधिकरण की घोषणाएं एवं दावें अभी हवाई अधिक और सतही कम हैं। यह बात स्पष्ट है कि जिस पथवाये नाले को एयरपोर्ट निर्माण के कारण बंद किया गया, उसकी उपयोगिता बरसात के दिनों में अधिक होती है। यह जानते हुए भी बिना परिणाम पर विचार किए इस नाले को बंद कर दिया गया। सिंचाई विभाग द्वारा वैकल्पिक नाले का निर्माण किया गया लेकिन इसकी गुणवत्ता और उपयोगिता का परीक्षा नहीं किया गया। यदि समय रहते हुए प्रशासन इस बात पर ध्यान देता तो रन्हेरा गांव की इस त्रासदी का सामना नहीं करना पड़ता।
ऐसे में सवाल तो उठता है कि एक खुशहाल गांव को त्रासदी में डालने के लिए क्या सिंचाई विभाग या प्रशासन जिम्मेवार है जिसने वैकल्पिक नाला जल निकासी के लिए बनाया लेकिन इसके निर्माण में उदासीनता बरती ? या फिर इसके लिए प्राधिकरण जिम्मेवार है जो जेवर क्षेत्र के गांवों की जमीन पर बनने वाली परियोजनओं को बेचने में व्यस्त रहा लेकिन रन्हेरा गांव के पास बरसाती पथवाये नाले को बंद किए जाने के बाद के परिणाम के बारे में अंजान रहा ? प्राधिकरण के पास सिविल इंजीनियरों की एक अच्छी खासी टीम है। यदि समय रहते नाले की समस्या का संज्ञान लिया जाता तो रन्हेरा गांव को बड़ी विपदा में पड़ने से बचाया नहीं जा सकता था ?
या फिर इस विपदा के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि जिम्मेवार हैं, जो सोशल मीडिया पर जेवर के विकास की झांकी पेश करते हैं लेकिन स्थानीय लोग इस विकास की क्या कीमत चुना रहे हैं ? इसकी भनक तक उन्हें नहीं लगी है अथवा नजरअंदाज समस्या को नजर अंदाज कर देते हैं ? या फिर सभी ने एयरपोर्ट निर्माण की शर्तों पर गांवों को होने वाली परेशानियों से आंखें बंद कर ली है। यदि ऐसा है तो जेवर क्षेत्र के गांवों के विकास को लेकर आशंका पैदा होती है कि इनका हाल भी नोएडा और ग्रेटर नोएडा के गांवों जैसा न हो जाए, जो गांव रहे नहीं, और शहर कभी बनेंगे नहीं। बस समस्या ही समस्या है।