कैराना लोकसभा सीट : धर्म से ऊपर जाति चुनावी समीकरणों को करती है प्रभावित, जानिए क्या है चुनावी स्थिति ?

Panchayat 24 : उत्तर प्रदेश की जिन लोकसभा सीटों पर पहले चरण में चुनाव होना है, उनमे कैराना लोकसभा सीट की राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा हो रही है। कैराना लोकसभा सीट पर साल 1962 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी यशपाल सिंह ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1967 में समयुक्ता सोसलिस्ट पार्टी के गयूर अली खान, 1971 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शफक्त जंग, 1977 में जनता पार्टी के चंदन सिंह, 1980 में जनता पार्टी (सेक्यूलर) के टिकट पर गायत्री देवी, 1984 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार अख्तर हसन, 1989 और 1991 में जनता दल के टिकट पर हरपाल सिंह पंवार, 1996 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मुनव्वर हसन, 1998 में भारतीय जनता पार्टी के वीरेन्द्र वर्मा, 1999 में राष्ट्रीय लोकदल के अमीर आलम खान, 2004 में राष्ट्रीय लोकदल की प्रत्याशी अनुराधा चौधरी, 2009 में बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी तबस्सुम हसन और साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के हुकुम सिंह ने जीत दर्ज की थी। हुकुम सिंह की मौत के बाद यहां हुए उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर तबस्सुम हसन ने एक बार फिर जीत दर्ज की। वहीं, साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रदीप चौधरी ने जीत दर्ज की थी।
वर्तमान में क्या है चुनावी समीकरण ?
वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी पार्टी ने एक बार फिर से सांसद प्रदीप चौधरी पर भरोसा जाताया है। प्रदीप चौधरी गुर्जर समाज से हैं। प्रदीप चौधरी गुर्जर समाज और मोदी-योगी के मैजिक के सहारे एक बार फिर चुनाव में मजबूती से ताल ठोक रहे हैं। वहं, इंडिया गठबंधन की ओर से समाजवादी पार्टी ने इस बार मुस्लिम समाज की इकरा हसन को चुनाव में उतारा है। समाजवादी पार्टी प्रत्याशी इकरा हसन को मुस्लिम वोटों का बड़ा सहारा है। बहुजन समाज वादी पार्टी ने यहां से राजपूत समाज के श्रीपाल राणा को चुनाव मैदान में उतारा है। श्रीपाल राणा के चुनाव में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। हालांकि मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच होने की उम्मीद है।
कौन है इकरा हसन ?
समाजवादी पार्टी प्रतयाशी इकरा हसन का संबंध कैराना लोकसभा के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से हैं। इकरा हसन के दादा अख्तर हसन ने यहां से नगरपालिका परिषद के सभासद का चुनाव जीता था। इसके बाद वह नगरपालिका परिषद के चेयरमैन और फिर लोकसभा के सदस्य का चुनाव जीते। उनके बाद उनके बेटे मुनव्वर हसन ने भी दो बार यहां से लोकसभा चुनाव जीता। उनके देहांत के बाद उनकी पत्नी तबस्सुम हसन ने भी यहां से दो बार लोकसभा का चुनाव जीता है। तबस्सुम हसन के बेटे नाहिद हसन साल 2014 में कैराना विधानसभा से विधायक का चुनाव जीते थे। इकरा हसन नाहिद हसन की छोटी बहन है। इकरा हसन ने लंदन से पढ़ाई की है। उसका राजनीति से पाला 2022 के विधानसभा चुनाव में उस समय पड़ा जब एक मामले में नाहिद हसन को जेल जाना पड़ा था। नाहिद हसन की अनुपस्थिति में इकरा हसन ने चुनावी कमान संभाली थी। चुनाव में नाहिद हसन की जीत का श्रेय इकरा हसन को ही जाता है।
कैराना लोकसभा सीट की विधानसभावार स्थिति
कैराना लोकसभा सीट के अन्तर्गत शामली और सहारनपुर विधानसभाओं सहित कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं। शामली जिले की थानाभवन, कैराना और शामली विधानसभाएं इस लोकसभा सीट के अन्तर्गत आती हैं। वहीं, सहारनुपर जिले की नकुड और गंगोह विधानसभाएं आती है। नकुड विधानसभा पर भारतीय जनता पार्टी के मुकेश चौधरी और गंगोह विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के कीरत सिंह का कब्जा है। वहीं, थाना थवन और राष्ट्रीय लोकदल के अशरफ अली खान और प्रसन्न चौधरी विधायक हैं। जबकि कैराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के नाहिद हसन विधायक हैं।
कैराना लोकसभा सीट पर क्या हैं जातीय समीकरण ?
कैराना लोकसभा सीट पर कुल 17 लाख 19 हजार 11 मतदाता हैं। इनमें 871 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। वहीं, पुरुष 921820 और महिला 800518 मतदाता शामिल हैं। यह लोकसभा मुस्लिम बाहुल्य है और लगभग 5.75 लाख मुस्लिम मतदाता है जबकि लगभग 12 लाख हिन्दु मतदाता हैं। वहीं, हिन्दुओं में 1.75 लाख जाट मतदाता, 1.20 सैनी मतदाता, 1.32 लाख कश्यप मतदाता, 70 हजार ब्राह्मण मतदाता, 2.50 दलित मतदाता, 60 हजार वैश्य मतदाता और लगभग 1.25 लाख गुर्जर मतदाता हैं।
कैराना लोकसभा सीट पर धर्म ओर सम्प्रदाय पर जाति निभाती है अहम भूमिका
कैराना लोकसभा सीट देश की उन सीटों में से एक है जहां चुनावी राजनीति में धर्म और और सम्प्रदाय मुख्य भूमिका निभाती है। दरअसल, कैराना लोकसभा सीट पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज में गुर्जर जाति के लोग शामिल हैं। इनके बुजुर्गों ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। मुस्लिम गुर्जर आज भी रीति रिवाजों, परंपराओं और संस्कृति रूप से हिन्दु गुर्जरों से जुड़े हुए हैं। कई बार चुनावों में इस जातीय भाईचारे ने चुनावी परिणामों को भी प्रभावित किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता हुकुम सिंह हिन्दु गुर्जर और मुस्लिम गुर्जर जातियों को राजनीति में साथ जोड़ने में बहुत हद तक कामयाब रहे थे। लोकसभा चुनाव 2024 में इकरा हसन मुस्लिम गुर्जर समाज से आती है। समाजवादी पार्टी उम्मीदवार इकरा हसन जातीय समानता के नाम पर हिन्दु गुर्जरों में पैठ बनाने का प्रयास कर रही है। यह भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी के लिए चिंता का विषय है।
भाजपा प्रत्याशी का मजबूत पक्ष
योगी और मोदी सरकारों के विकास के काम, कैराना के अपराध पर भाजपा शासन में लगाम लगना, मुजफ्फरनगर दंगों के बाद हर चुनाव में होने वाला ध्रुवीकरण, राष्ट्रीय लोकदल का एनडीए में शामिल होना।
भाजपा प्रत्याशी का कमजोर पक्ष
बाहरी प्रत्याशी होना, बसपा द्वारा राजपूत समाज के प्रत्याशी को टिकट दिया जाना, सत्ता विरोध।
समाजवादी पार्टी प्रत्याशी का मजबूत पक्ष
एकमुश्त मुस्लिम वोट, मुस्लिम गुर्जरों और हिन्दु गुर्जरों में एक दूसरों के प्रति सहानभूति, सत्ता विरोध में बेहतर विकल्प।
समाजवादी पार्टी का कमजोर पक्ष
चुनावी ध्रुवीकरण में बहुसंख्यक वोटरों का एक साथ जुड़ जाना, योगी-मोदी का विपक्ष के पास कोई विकल्प नहीं होना, राष्ट्रीय लोकदल का एनडीए में शामिल होना।
बसपा प्रत्याशी का मजबूत पक्ष
एक मुश्त दलित मतदाता,
बसपा प्रत्याशी का कमजोर पक्ष
दलित वोटरों के अतिरिक्त अन्य समाज के मतदाताओं को नहीं जोड़ पाना, दलित मतदाताओं में भाजपा की सेंध।
कैराना लोकसभा सीट के प्रमुख मुद्दे
गन्ना बकाया भुगतान और पर्ची विवाद, शामली में जाम के लिए ओवरब्रिज की मांग, मेरठ-करनाल हाइवे की मरम्मत, नगर विकास के लिए शामली विकास प्राधिकरण की मांग, रिम-धुरा उद्योग को पुनर्जीवन देने की मांग,