डरावना सपना रूप बदलकर फिर आया दादरी क्षेत्र के लोगों के सामने, हैप्पी एंडिंग के बावजूद खड़ें हैं कई अहम सवाल
The dreadful dream has again come in front of the people of Dadri area in a different form, despite the happy ending many important questions remain

Panchayat 24 : दादरी क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में 28 सितंबर 2015 के दिन गौ हत्या के बाद गौमांस पकाए जाने के आरोप में अकलाख नामक व्यक्ति की भीड़ ने हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद दादरी क्षेत्र राष्ट्रीय चर्चाओं का केन्द्र बन गया था। यहां के लोग सपने में भी इस घटना को याद करना नहीं चाहेंगे। इसको संयोग कहे या फिर विधि का विधान, जब भी लोगों को लगता है कि बिसाहड़ा कांड इतिहास के पन्नों मे दफन हो गया है तभी कोई घटना या कोई खबर सामने आकर धुंधली हो चुकी स्मृतियों को ताजा कर देती है। एक दशक बाद दादरी क्षेत्र में यह कहानी एक बार फिर घूमकर सामने आई है जिसने बिसाहड़ा कांड की स्मृतियों को पुन: मन मस्तिष्क में उभार दिया है।
दरअसल, दादरी कोतवाली पुलिस ने पिछले 9 नवंबर को गौ मांस से लदे हुए एक कंटेनर को जब्त किया था। पुलिस को यह सूचना हिन्दूवादी संगठन की ओर से दी गई थी। केंटर में भरकर यह मांस पश्चिम बंगाल से दादरी स्थित बिसाहड़ा रोड़ स्थित एक कोल्ड स्टोर में रखने के लिए लाया गया था। यहां से यह मांस दिल्ली एनसीआर और देश के दूसरे हिस्सों में पर पहुंचाया जाना था। पुलिस ने कोल्ड स्टोरेज पर छापा मारा तो सामने चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। यहां भी अच्छी खासी मात्रा में मांस रखा गया था। मांस को जांच के लिए मथुरा लैब भेजा गया। मथुरा लैब से इस बार मांस की रिपोर्ट आने में बिसाहड़ा प्रकरण की तरह एक साल से अधिक का समन नहीं लगा। चंद दिनों में ही जांच के लिए भेजे गए मांस की रिपोर्ट आ गई। जांच रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि कैंटर से जब्त किए गए और कोल्ड स्टोरेज में रखा गया मांस गौ मांस ही है। पुलिस ने कंटेनर से जब्त और कोल्ड स्टोरेज में रखे गए लगभग 185 टन गौ मांस को रात को ही जमीन में दबाकर नष्ट कर दिया। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
कुछ लोग इस कार्रवाई को पुलिस की सफलता बता रहे हैं कि सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया। वहीं, कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। पहला सवाल यही है कि बिसाहड़ा रोड स्थित कोल्ड स्टोरेज में एक दिन में इतनी बड़ी मात्रा में गौमांस एकत्रित नहीं हो सकता। स्पष्ट है कि काफी समय से यहां लाकर गौमांस रखा जा रहा था। फिर पुलिस और लोकल इंटेलीजेंस को इस बारे में कोई जानकारी क्यों नहीं हुई ? सवाल यह भी है कि पुलिस ने जिन लोगों को पकड़ा है उनमें कोल्ड स्टोरेज मालिक पूरन जोशी, कोल्ड स्टोरेज के डायरेक्टर मोहम्मद खुर्शिदुन नबी, अक्षय सक्सेना, चालक शिव शंकर और परिचालक सचिन को गिरफ्तार किया है। पूरे प्रकरण में बड़ा अपराधी वह व्यक्ति है जो इस पूरे नेटवर्क को चला रहा है। वह कौन है ? पकड़े गए गौमांस का असली मालिक कौन है ? क्या इस पूरे प्रकरण के तार इस रैकेट को संचालित करने वाले किसी बड़े माफिया से जुड़ रहे हैं ? इस गोरखधंधे को संचालित करने वालों को कहां से ऑक्सीजन मिल रही है ? सत्ता के किसी कोने बैठे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का इस अवैध कारोबार को करने वालों की पीठ पर हाथ तो नहीं है ? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो हर व्यक्ति के मन में पैदा हो रहे हैं। इन सवालों के जवाब अवश्य ही सामने आने चाहिए।
इस प्रकराण को लेकर मन में एक सवाल बार बार उभरता है कि गौमांस के गोरखधंधे को संचालित करने वाले अपराधियों ने गौमांस को रखने के लिए बिसाहड़ा के आसपास के क्षेत्र को ही क्यों चुना गया ? क्या इसके पीछे भी आरोपियों का कोई विशेष मकसद छिपा हुआ था ? बिसाहड़ा गांव में गौमांस को लेकर अनजाने में हुई एक घटना की दादरी क्षेत्र ने भारी कीमत चुकाई है। इस घटना के जख्म धीरे धीरे भरने लगे हैं। ऐसे में यदि सैकड़ों टन गौमांस के कोल्ड स्टोरेज में होने की सूचना गलती से भी क्षेत्र में फैल जाती तो लोगों की भावनाएं आहत जरूर होती। इसका परिणाम क्या होता, यह बताने की जरूरत नहीं है। हालांकि दादरी क्षेत्र के लोगों के लिए अच्छा हुआ कि मामला शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया। लेकिन इस प्रकरण से यह स्पष्ट हो गया है कि भले ही प्रदेश सरकार गौ संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन अभी भी बड़े पैमाने पर गौ हत्याएं हो रही हैं। गौमांस का कारोबार लगातार जारी है। अर्थात इस गोरखधंधे को संचालित करने वाले माफियाओं की रीढ पर प्रहार अभी बाकी है।