जिला प्रशासन

पुलिस-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की बैठक सुखद संकेत, बैठक नई दिशा में शुरूआत या औपचारिकता ?

Meeting of police-administration and public representatives is a pleasant sign. Is the meeting a beginning in a new direction or a formality?

Panchayat 24 : गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट बनने के बाद शायद पहली बार पुलिस-प्रशासन और जनता के प्रतिनिधियों ने एक साथ बैठक कर जनता के मुद्दों पर एक साथ चर्चा की। तीनों ही संस्‍थाएं जनता के कल्‍याण के लिए प्रयासरत रहती है। ऐसे में इस तरह बैठक करके जनता के प्रकरणों पर विचार विमर्श किया जाना बेहज जरूरी है। इससे तीनों ही संस्‍थाओं के बीच बेहतर तालमेल और सामंजस्‍य स्‍थापित करने का बेहतर अवसर मिला है। वहीं, एक दूसरे के अनुभव एवं जानकारियों को लाभ मिल सकता है। इस नजरिए से पुलिस-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की यह बैठक जनकल्‍याण की दिशा में शुभ संकेत है।

नोएडा सेक्‍टर-108 पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सभागार में संपन्‍न हुई। बैठक में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, पुलिस कमिश्नर लक्ष्‍मी सिंह स्‍थानीय सांसद डॉ महेश शर्मा, एमएलसी श्रीचंद शर्मा, नरेन्‍द्र सिंह भाटी और दादरी विधायक तेजपाल सिंह नागर सहित पुलिस के अन्‍य अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस बैठक में नोएडा के विधायक पंकज सिंह और जेवर विधायक धीरेन्‍द्र सिंह अनुपस्थित रहे। पंकज सिंह के बारे में सूचना मिली कि वह जिले से बाहर थे। बाद में सोशल मीडिया से मिली सूचना से पता चला कि वह लखनऊ में थे और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से भी उन्‍होंने मुलाकात की थी। धीरेन्‍द्र सिंह की अनुपस्थिति के कारणों का पता नहीं चल सका। हो सकता है कि वह भी किसी कारणवश इस बैठक में उपस्थित नहीं हो सके। लेकिन उनकी अनुपस्थिति को राजनीतिक कारणों से जोड़ा रहा और कई तरह की चर्चाएं भी चली। हालांकि बेहतर होता कि पंकज सिंह और धीरेन्‍द्र सिंह भी बैठक में उपस्थित होकर अपने क्षेत्र की जनता के मुद्दों पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ चर्चा करते। उनकी समस्‍याओं से आला अधिकारियों को अवगत कराते।

दरअसल, जनता की समस्‍याओं का समाधान इन तीन संस्‍थाओं अर्थात पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा ही किया जाता है। जनता पहले अपनी समस्‍या को लेकर पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों से मिलते हैं। यदि समस्‍या का समाधान नहीं होता है अथवा उनके साथ समस्‍या समाधान में किसी तरह का भेदभाव किया जाता है तो लोग अपने जनप्रतिनिधियों से संपर्क करते हैं। कई बार लोगों की समस्‍याओं की जानकारी इन तीनों ही संस्‍थाओं को होती जरूर है, लेकिन यह जानकारी पूरी नहीं होती है। जानकारी का अलग अलग पक्ष ही इनको पता होता है। यही कारण है कि कई बार पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधि लोगों की समस्‍या का समाधान तो करना चाहते हैं लेकिन समस्‍या को देखने के नजरिए में विरोधाभाष के कारण टकराव एवं मतभेद पैदा हो जाते हैं।

सवाल यह उठता है कि जब पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का उद्देश्‍य जनसरोकार से जुड़े विषयों से जुड़ा है तो तीनों ही संस्‍थाओं ने अभी तक आपस में एक दूसरे के साथ बैठकर सामुहिक चर्चा की शुरूआत क्‍यों नहीं की ? सवाल तो यह भी उठता है कि पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिस बैठक को हम शुभ संकेत बता रहे हैं, वह कितनी आगे बढ़ेगी ? कहीं सकारात्‍मक उद्देश्‍य से शुरू की गई यह बैठक औपचारिकता भर बनकर न रह जाएगी ? खैर, हमारे इन सभी सवालों के जवाब तो आने वाला समय ही देगा, लेकिन इस तरह की बैठक के आयोजन के लिए पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को श्रेय दिया जाना चाहिए।

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